भीष्म-अभिमन्यु वध ~ महाभारत Bhishma-abhimanyu slaughter

भीष्म-अभिमन्यु वध

भीष्म-अभिमन्यु वध ~ महाभारत पहले दिन से ही महाभारत का युद्ध बड़े ही भयंकर रूप से प्रारम्भ हुआ। आठवें दिन का युद्ध भी घनघोर था। इस दिन अर्जुन की दूसरी पत्नी उलूपी से उत्पन्न पुत्र महारथी इरावान मारा गया। उसकी मृत्यु से अर्जुन बहुत क्षुब्ध हो उठे। उन्होंने कौरवों की अपार सेना नष्ट कर दी। … Read more

महाभारत युद्ध का आरम्भ The beginning of the Mahabharata war

महाभारत युद्ध

महाभारत युद्ध का आरम्भ महाभारत युद्ध में दोनों पक्षों की सेनाओं का सम्मिलित संख्या बल अठ्ठारह अक्षौहिणी था। युधिष्ठिर सात अक्षौहिणी सेना के, जबकि दुर्योधन ग्यारह अक्षौहिणी सेना का स्वामी था। पाण्डव तथा कौरव दोनों ही ओर की सेनाएँ युद्ध के लिए तैयार हुईं। पहले भगवान श्रीकृष्ण परम क्रोधी दुर्योधन के पास दूत बनकर गये। … Read more

कृष्ण का शान्ति प्रस्ताव ~ महाभारत Peace offer of Krishna

कृष्ण का शान्ति प्रस्ताव

कृष्ण का शान्ति प्रस्ताव ~ महाभारत राजा सुशर्मा तथा कौरवों को रणभूमि से भगा देने के बाद पाण्डवों ने स्वयं को सार्वजनिक रूप से प्रकट कर दिया। उनका असली परिचय पाकर विराट को अत्यन्त प्रसन्नता हुई और उन्होंने अपनी पुत्री उत्तरा का विवाह अर्जुन से करना चाहा, किन्तु अर्जुन ने कहा कि उन्होंने उत्तरा को … Read more

विराट नगर पर कौरवोँ का आक्रमण ~ महाभारत

विराट नगर पर कौरवोँ

विराट नगर पर कौरवोँ का आक्रमण ~ महाभारत कीचक के वध की सूचना आँधी की तरह चारों ओर फैल गई। वास्तव में कीचक बड़ा पराक्रमी था और उससे त्रिगर्त के राजा सुशर्मा तथा हस्तिनापुर के कौरव आदि डरते थे। कीचक की मृत्यु हो जाने पर राजा सुशर्मा और कौरवों विराट नगर पर आक्रमण करने के … Read more

कीचक वध की कथा ~ महाभारत Story of Keechaka

कीचक वध की कथा

कीचक वध की कथा ~ महाभारत पाण्डवों को मत्स्य नरेश विराट की राजधानी में निवास करते हुए दस माह व्यतीत हो गये। सहसा एक दिन राजा विराट का साला कीचक अपनी बहन सुदेष्णा से भेंट करने आया। जब उसकी द‍ृष्टि सैरन्ध्री (द्रौपदी) पर पड़ी तो वह काम-पीड़ित हो उठा तथा सैरन्ध्री से एकान्त में मिलने … Read more

पाण्डवों का अज्ञातवास ~ महाभारत Pandavas Unknown ~ Mahabharata

पाण्डवों का अज्ञातवास

पाण्डवों का अज्ञातवास ~ महाभारत ‘अज्ञातवास’ का अर्थ है- “बिना किसी के संज्ञान में आये किसी अपरिचित स्थान व अज्ञात स्थान में रहना।” वनवास के बारहवें वर्ष के पूर्ण होने पर पाण्डवों ने अब अपने अज्ञातवास के लिये मत्स्य देश के राजा विराट के यहाँ रहने की योजना बनाई। उन्होंने अपना वेश बदला और मत्स्य … Read more