Thursday, May 23, 2024
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चांद पर भारत और याद आ रहे राकेश शर्मा, जानते हैं किस हाल में है अपना वो पहला अंतिरक्ष यात्री?

चांद पर भारत और याद आ रहे राकेश शर्मा- भारत ने चंद्रयान-3 के जरिये चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रच दिया। यह पहली बार नहीं था जब भारत ने अंतरिक्ष की दुनिया में इतिहास रचा हो। एक इतिहास आज से 39 साल पहले भी रचा गया था। उस इतिहास का नायक भारत का पहला अंतरिक्ष यात्री था। 23 अगस्त को शाम को भारत का चंद्रयान-3 पर लैंडिंग की तैयारी में था। बेंगलुरू के इसरो स्थित कमांड सेंटर से लेकर देशभर में दुआओं का दौर चल रहा था। इसरो सेंटर में वैज्ञानिकों की धड़कनें बढ़ी हुई थीं। जैसे-जैसे घड़ी की सुईयां 6 बजने के करीब पहुंच रही थी लोगों की धुकधुकी बढ़ती जा रही थी। आखिरकार शाम 6.04 मिनट पर चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम ने चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रच दिया। इसरो जब चंद्रमा पर इतिहास रच दिया तो ऐसे समय में एक शख्स को याद करना जरूरी हो जाता है।

ये वो शख्स है जो भारत के अंतरिक्ष में कामयाबी का जिंदा प्रतीक है। ऐसे में सवाल है कि आखिर वो शख्स कहां है जो भारत की तरफ से अंतरिक्ष में पहुंचे थे। लखनऊ।  23 अगस्त को शाम को भारत का चंद्रयान-3 पर लैंडिंग की तैयारी में था। बेंगलुरू के इसरो स्थित कमांड सेंटर से लेकर देशभर में दुआओं का दौर चल रहा था। इसरो सेंटर में वैज्ञानिकों की धड़कनें बढ़ी हुई थीं। जैसे-जैसे घड़ी की सुईयां 6 बजने के करीब पहुंच रही थी लोगों की धुकधुकी बढ़ती जा रही थी। आखिरकार शाम 6.04 मिनट पर चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम ने चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रच दिया। इसरो जब चंद्रमा पर इतिहास रच दिया तो ऐसे समय में एक शख्स को याद करना जरूरी हो जाता है। ये वो शख्स है जो भारत के अंतरिक्ष में कामयाबी का जिंदा प्रतीक है। ऐसे में सवाल है कि आखिर वो शख्स कहां है जो भारत की तरफ से अंतरिक्ष में पहुंचे थे।

चांद पर भारत और याद आ रहे राकेश शर्मा

इस साल जुलाई में देश के पहले अंतरिक्ष यात्री और भारतीय वायुसेना के पूर्व पायलट राकेश शर्मा की एक तस्वीर ऑनलाइन दिखी थी। इसके जरिये पता लगा कि वो तमिलनाडु में एकांत जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उनके साथ उनकी पत्नी मधु भी रहती हैं। भारत के अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में राकेश शर्मा ने एक अमिट छाप छोड़ी। राकेश शर्मा साल 2021 में बेंगलुरु स्थित कंपनी कैडिला लैब्स के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष थे। इसके अलावा, शर्मा ने इसरो के गगनयान के लिए राष्ट्रीय सलाहकार परिषद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह परिषद् अंतरिक्ष यात्री चयन कार्यक्रम की देखरेख करती थी।

भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा का जन्म पंजाब के पटियाला में हुआ था। उन्होंने सेंट एंथनी हाई स्कूल और सेंट जॉर्ज ग्रामर स्कूल जैसे प्रतिष्ठित स्कूलों में पढ़ाई की। इसके बाद हैदराबाद के निजाम कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। सैन्य करियर के प्रति उनका जुनून उन्हें पुणे के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में ले गया। एनडीए की ट्रेनिंग के बाद वह 1970 में भारतीय वायु सेना (IAF) में शामिल हुए। यहां उन्होंने एक टेस्ट पायलट के रूप में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वह, 1984 में एयरफोर्स में स्क्वाड्रन लीडर बन गए। उन्होंने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान मिग-21 पर 21 लड़ाकू मिशनों में उड़ान भरते हुए अपनी असाधारण क्षमताओं का प्रदर्शन किया।

चांद पर भारत और याद आ रहे राकेश शर्मा

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चांद पर भात और याद आ रहे राकेश शर्मा

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Click here- चंद्रयान 3 की लैंडिंग का वीडियो जारी

अंतरिक्ष में पहुंच कर रचा था इतिहास

जब भी भारत और अंतरिक्ष की बात होती है तो एक चेहरा निर्विवाद रूप से सामने आता है। राकेश शर्मा वो शख्स हैं जिन्होंने भारत की तरफ से पहली बार अंतरिक्ष में पहुंचे थे। राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष में 7 दिन 21 घंटा और 40 मिनट बिताए थे। उन्होंने भारत के गौरव को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया था। भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान प्रयासों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के बावजूद, उन्होंने अपनी योगदान के अनुरूप प्रसिद्धि और पहचान नहीं मिली।

गगनयान प्रोजेक्ट से जुड़े

इस साल जुलाई में देश के पहले अंतरिक्ष यात्री और भारतीय वायुसेना के पूर्व पायलट राकेश शर्मा की एक तस्वीर ऑनलाइन दिखी थी। इसके जरिये पता लगा कि वो तमिलनाडु में एकांत जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उनके साथ उनकी पत्नी मधु भी रहती हैं। भात के अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में राकेश शर्मा ने एक अमिट छाप छोड़ी। राकेश शर्मा साल 2021 में बेंगलुरु स्थित कंपनी कैडिला लैब्स के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष थे। इसके अलावा, शर्मा ने इसरो के गगनयान के लिए राष्ट्रीय सलाहकार परिषद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह परिषद् अंतरिक्ष यात्री चयन कार्यक्रम की देखरेख करती थी।

भारतीय के रूप में असाधारण उपलब्धि

राकेश शर्मा को 1982 में सोवियत-भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए चुना गया था। उन्होंने मॉस्को के यूरी गगारिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में कठिन प्रशिक्षण लिया। उन्होंने दो सोवियत कॉस्मोनॉट्स के साथ सोयुज टी-11 में अंतरिक्ष की यात्रा की। उन्होंने अपनी उपलब्धियों के लिए प्रतिष्ठित हीरो ऑफ द सोवियत यूनियन का खिताब प्राप्त किया। साल 1984 में राकेश शर्मा ने पहली बार अंतरिक्ष में गए थे। भारत का पहला अंतरिक्ष यात्री होना राकेश शर्मा के लिए असाधारण उपलब्धि के रूप में दर्ज है।

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एयरफोर्स में बने पायलट

भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा का जन्म पंजाब के पटियाला में हुआ था। उन्होंने सेंट एंथनी हाई स्कूल और सेंट जॉर्ज ग्रामर स्कूल जैसे प्रतिष्ठित स्कूलों में पढ़ाई की। इसके बाद हैदराबाद के निजाम कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। सैन्य करियर के प्रति उका जुनून उन्हें पुणे के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में ले गया। एनडीए की ट्रेनिंग के बाद वह 1970 में भारतीय वायु सेना (IAF) में शामिल हुए। यहां उन्होंने एक टेस्ट पायलट के रूप में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वह, 1984 में एयरफोर्स में स्क्वाड्रन लीडर बन गए। उन्होंने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान मिग-21 पर 21 लड़ाकू मिशनों में उड़ान भरते हुए अपनी असाधारण क्षमताओं का प्रदर्शन किया।

चंद्रयान की कामयाबी का भरोसा

जब देश चंद्रयान-3 के चंद्रमा पर सुरक्षित उतरने का इंतजार कर रहा था तब राकेश शर्मा को इसरो की कामयाबी का भरोसा था। राकेश शर्मा ने कहा था कि ISRO के काम करने के तरीके को जानने के बाद, मैं गर्व से कह सकता हूं कि चंद्रयान-3 का सुरक्षित चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने में कामयाब होगा। उन्होंने कहा था कि पिछले 40 वर्षों में, सीमित संसाधनों के बावजूद, ISRO ने एक शानदार यात्रा की है। उन्होंने कहा था कि हमने वर्षों में जो कार्यक्रम चलाए हैं, वे दुनिया को हैरान कर चुके हैं।

एचएएल में चीफ टेस्ट पायलट

वह 1987 में विंग कमांडर के रूप में रिटायर्ड होने के बाद हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) में चीफ टेस्ट पायलट के रूप में शामिल हुए। हालांकि, एक बार नासिक के ओजार में एक मिग-21 की टेस्ट उड़ान के दौरान एक वह बाल-बा बच गए। उन्होंने 2001 में प्लेन उड़ाना छोड़ दिया। इसके बाद वह तमिलनाडु के कुन्नूर में बस गए। यहां राकेश शर्मा गोल्फ, बागवानी, योग, पढ़ने और यात्रा जैसे शौक पूरा करते हुए जीवन बीता रहे हैं।

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चंद्रयान-3 की लैंडिंग को लेकर भी राकेश शर्मा का आया था रिएक्शन

चंद्रयान-3 की लैंडिंग को लेकर पूरी दुनिया काफी उत्साहित थी। सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया इसरो के तीसरे मून मिशन पर टकटकी लगाए बैठी थी। भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने भी चंद्रयान-3 को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था, ”इसरो के कामकाज के तरीके को जानकर मैं गर्व से कह सकता हूं कि चंद्रयान -3 की सुरक्षित लैंडिंग होगी।” 3 अप्रैल 1984 को सोयूज टी-11 से उड़ान भरने वाले शर्मा ने कहा, “पिछले 40 सालों में सीमित संसाधनों के बावजूद, इसरो ने एक शानदार यात्रा की है, हमने पिछले कुछ वर्षों में जो कार्यक्रम चलाए हैं, उन्होंने दुनिया को आश्चर्यचकित कर दिया है।”

राकेश शर्मा को यह पुख्ता तौर पर पता था कि इसरो ने जो एक बार ठान लिया, उसे वह पूरा कता ही है। यही वजह थी कि उन्हें भी पूरा विश्वास था कि चंद्रयान-3 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करके इतिहास रचने जा रहा है।

चांद पर भारत और याद आ रहे राकेश शर्मा FAQ’S

चांद पर जाने वाले भारत के पहले व्यक्ति कौन थे?

उन्होंने 20 जुलाई 1969 को चंद्र की सतह पर पहला कदम रखा। बज़ एल्ड्रिन चाँद पर उतरने वाले दूसरे व्यक्ति बने। नील आर्मस्ट्रांग और बज़ एल्ड्रिन अपोलो 11 नामक अभियान में चंद्र सतह पर गए। राकेश शर्मा अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय थे।

राकेश शर्मा अंतरिक्ष में कब गया था?

साल 1984 में अंतरिक्ष में जाने वाले राकेश शर्मा के बारे में लोग काफी सर्च करते रहते हैं।

चाँद पर जाने वाली पहली भारतीय पुरुष कौन थी?

चांद के करीब जाने वाले इकलौते भारतीय Rakesh Sharma हैं, जो साल 1984 में मून मिशन पर गए थे.

अंतरिक्ष यात्री कौन थे?

यूरी गगारिन (Yuri Gagarin) (9 मार्च 1934 – 27 मार्च 1968), भूतपूर्व सोवियत संघ के हवाबाज़ और अंतरिक्ष यात्री थे। १२ अप्रैल, १९६१ को अंतरिक्ष में जाने वाले वे प्रथम मानव थे। अन्तरिक्ष की यात्रा करने के बाद गगारिन अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठित व्यक्ति बन चुके थे और उन्हें कई तरह के पदक और खिताबों से सम्मानित किया गया था।

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