हीरे की परख जोहरी ही जाने | सफलता जानिए कैसे ?

परख से सफलता की ओर –

हीरे की परख जोहरी ही जाने |  – हमारी परख करने की अथवा परखने की क्षमता ही हमे सफलता की उचाईयो पर ले जाती है | कहा भी गया है, ”हीरे की परख जोहरी ही जाने |”छोटी असफलताए भी कभी-कभी बड़ी सफलता का मार्ग या रास्ता तय कर देती है | बशर्ते इन्सान में जुनून और अनुशासन के साथ -साथ धैर्य और साहस का होना जरुरी है |साथ ही परखने की क्षमता भी महत्वपूर्ण है |

क्योंकि किसी विद्वान ने कहा है ”बादाम खाने से अकल आये या ना आये,लेकिन ठोकर खाने से अकल जरूर आती है |”इसलिए हमें हर परिस्थति में धैर्य और सकारात्मक रवैया बनाये रखना चाहिए | हमारा यह नजरिया अथवा परखने की क्षमता ही हमें सफलता प्रदान करते है |

हीरे की परख जोहरी ही जाने | इसलिए  परख कर ही मित्र और संगत अपनाये –

हमारी परख स्पष्ट होनी चाहिए | परखने की क्षमता और सोचने का नजरिया ही हमारी संगत अथवा मित्रता तय करते है |और मित्र अथवा संगत ही हमें ऊचाइया या सफलता अथवा असफलता के मार्ग की ओर ले जाते है | हमें यह भी परखने की क्षमता से ही पता चलता है, कि हमारे मित्र या साथी ”हमारे साथ है” या ”हम उनके साथ है|” इसलिए कहा गया है,हीरे की परख जोहरी ही जाने |

क्योंकि मित्र या संगत में साथी ऐसे होने चाहिए,जो ‘संकट के समय तो यह कहे हाँ मै उनका मित्र हूँ’ और उन्नति (progress) के समय यह कहे ‘हाँ वह मेरा मित्र है|’

अपनी परख को ऐसी उन्नत बनाओ कि ”आपके मित्र कर्ण जैसे भी होने चाहिए, जिन्होंने दुर्योधन की हार निश्चित होने पर भी साथ नहीं छोड़ा |” और ”मित्र श्री कृष्ण जी जैसे भी होने चाहिए, जो आपकी हार को भी निश्चित जीत में बदल दे|”अर्थात संक्षेप में मित्रता और संगत परख कर ही अपनाये |और अपनाने के बाद मिलावट बिलकुल भी न करे |मिलावट न स्वयं करे और न सहन करे |

अमूमन अधिकतर लोग इस परख क्षमता के अभाव में धोखा खा जाते है |और बुद्धिमान व्यक्ति भी इसके कारण समय निकलने पर पश्चाताप की अग्नि में जलते रहते है |वास्तव में मित्रता और संगति विश्वसनीय और स्टैंड रखने वाले व्यक्ति के साथ रखना चाहिए | क्योंकि

गलत संगति के साथ ही वैचारिक जहर अपना प्रभाव दिखाता है |और एक गलत सलाह ही व्यक्ति को सफलता से असफलता के रास्ते पर अथवा अर्श से फ़र्स पर भी ले जाती है | इसलिए अपने best सलाहकार मित्र होने चाहिए | इसलिए ”मूर्ख दोस्त के बजाय समझदार दुश्मन बना लेना उचित होता है |”

कर्मफल सबको भोगना पड़ता है –

वैसे हम सभी को अपने कर्मो का फल जरुर भोगना पड़ता है |जिन्हें अक्सर लोग भाग्यफल भी कहते है |हमारे आज के किये गये कर्म ही भविष्य में हमारा भाग्य का निर्माण करते है |अतः विद्वान लोगो की या निश्छल भाव रखने वाले मित्रो की संगत अपनाना चाहिए | क्योंकि ”सकारात्मक सोच अथवा बड़ी सोच वाले, निश्छल मन या सबका भला चाहने वाले लोगो की मित्रता या संगत किसी आभूषण की भांति हमारी शोभा में चार चाँद लगाती है |और उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त करती है |ego और अहंकार से सदा दूरी बनाये रखना चाहिए |किसी ने कहा है ‘ऐसे श्रेष्ठ विचार वाले मित्र या संगति में किसी गलती या गलत समझ के कारण झुकना पड़े तो झुक जाओ |लेकिन अहंकार के वसीभूत होकर ऐसे मित्र या संगत अपना negative प्रभाव दिखाए तो झुकने के बजाय रूक जाओ |’

और पुनः अपनी पारखी निगाह को और पैनी अंतर्दृष्टि प्रदान कर परखने की क्षमता से अच्छी संगत अपनाओ |और स्वयं की quality में सुधार कर निरंतर सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते चलो |सफलता आपके क़दम जरूर चूमेगी |

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Know the diamond test. Know how to succeed

From test to success –

Our ability to test or test takes us to the height of success. It has been said, “Let the jeweler know the diamond.” Small failures sometimes set the path or path to great success. Provided that it is necessary to have patience and courage along with passion and discipline in a person. Also, the ability to test is also important.

Because a scholar has said, “Whether eating almonds makes you speechless or not, but stumbling comes to wisdom.” Therefore, we must maintain patience and a positive attitude in every situation. This is our attitude or ability to test. Provide success

Friend and company adopt after examining –

Our test should be clear. Our ability to test and think attitude determines our company or friend. And friend or company leads us to the path of success or success or failure. We also know this from our ability to test. It goes on, that our friend or partner is “with us” or “we are with them”.

Because there should be friends or friends in the company who say ‘I am their friend in the time of crisis’ and in the progress, they should say ‘Yes he is my friend’.

Make your trial so advanced that “Your friends should be like Karna, who did not leave Duryodhana’s defeat even though he is sure” and “Friends should be like Shri Krishna Ji, who will also win your defeat for sure.” Change in it. “That is, in a nutshell, try it only after testing friendliness and relevance. And after adopting, do not do adulteration at all. Do not adulterate yourself or tolerate it.

Usually, most people are deceived due to a lack of this ability. And even intelligent people keep burning in the fire of repentance as time goes on. In fact, friendship and association should be kept with someone who is reliable and standing.

Along with the wrong association, the ideological poison shows its effect. And one wrong advice only leads the person from success to failure or from haughtiness to the force. Therefore, your best advisors should be friends. Therefore, “It is advisable to make a sensible enemy rather than a foolish friend.”

Everybody has to suffer –

By the way, we all have to bear the fruits of our deeds. People are often called lucky ones. Our deeds are done today to create our destiny in the future. Therefore, adopt the company of scholars or friends with low values. Because “Like positive or thinking big, low-minded or good-for-all people like friendship or any ornament, it adds to our beauty. It also paves the way for progress. Ego and ego forever One should keep a distance. Someone has said, ‘If you have to bow down due to any mistake or misunderstanding in such a best-friend or association. But be distracted by the ego and show your negative effect to such a friend or relative, then stop instead of bowing down. | ‘

And again, give a good insight into your test and keep it well consistent with your ability to test and improve your quality and keep moving forward with positive thinking. Success will surely kiss you.

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