सोचों तो leader की तरह

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हमारी सोच अथवा पसंद और नापसंद का सफ़लता से सम्बंध

सोच

सोच सिर्फ सफल एवं सकारात्मक होनी चाहिए | बड़ी सोच रखने वाले अथवा अमीर व्यक्तियों से यदि आप द्वेष या नफरत रखते है | या आप उनके प्रशंसक है,आपका यह द्रष्टिकोण यह तैय कर देता है कि आपकी सोच सकारात्मक है या नकारात्मक | आप अमीर बनने की राह पर है या गरीब बनने की|

क्योकि हम जिसे पसंद करते है वो ही बनते है| और हम जिससे नफरत करते है वह हम नही बनते | इसी सम्बन्ध में किसी ने कहा है “वे कड़के(आर्थिक तंगी में) है इसलिए वे अमीरों से द्वेष रखते है| या फिर अमीरों से द्वेष रखते है इसलिए वे कड़के(Bitter) है|” अतः सोचों तो leader की तरह|

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 आपकी सोच एवं विचारो का मानव जीवन पर प्रभाव

याद रखे किसी भी द्रष्टिकोण के प्रति विचार ही वह सामग्री है ,जो हमारे दिमाग में दाखिल होने पर हमारी,खुशी,सफलता अमीरी अथवा गरीबी को या तो बढ़ाते है या घटाते है |सोच

यद्पि,अमीर बनने के लिए आपको परिपूर्ण आदर्श बनने की जरूरत नही है तथापि यह जानने की जरूरत अवश्य है कि “आपकी सोच आपको अथवा दूसरो को सशक्त बना रही है या नही ” यदि नही तो तत्काल आपको ज्यादा सकारात्मक सोच एवं  विचारो पर ‘ध्यान केन्द्रित’ करना चाहिए | 

सफलता के लिए नकारात्मक के बजाय सकारात्मक सोच अपनाना चाहिए |

अक्सर नकारात्मक लोगो से सुना होगा वह अमीर है तो ‘वह बेईमान,धोखेबाज ,निन्दनीय और औछा होगा’| जबकि हकीकत यह है कि ‘अमीरों के बारे में उसके द्वेषतापूर्वक ऐसे विचार है इसी कारण वह गरीब है’|

यदि उसके विचारो में प्रसंशा भरे शब्दों की झलक होती तो ‘निश्चित रूप से वह सफल या अमीर बना होता’ या फिर ‘सफलता की राह पर अग्रसर होता’| ,उसकी बात में कुछ प्रतिशत सच्चाई हो सकती है लेकिन संभवतया 95% से ज्यादा झूठ है| अतः बड़ी सोच और प्रशंसा का रूप अख्तियार कर लेना चाहिए जो सभी के लिए श्रेष्ठ एवं सकारात्मक है | द्वेष हमेशा नकारात्मकता का पुलिंदा है|

बड़ी सोच एवं अमीर मानसिकता के लोग ‘दौलत बनाने’ के मामले में जोखिम उठाना Brain tonic and opportunity के रूप में लेते है वे समस्याओं में भी अवसर की सम्भावनाए  खोज लेते है तथा उत्साह पूर्वक ‘सकारात्मक अवसर’ उत्पन कर समस्याओ का निराकरण कर देते है और शिकायत एवं बहाना ढूंढने से सदा परहेज करते है |

              ज़िम्मेदारी से सफ़लता की ओर                                

 चूंकि अमीर तथा बड़ी सोच रखने वाले जो भी  निर्णय लेते है उसके ,’अच्छे या बुरे परिणाम’ के लिए भी स्वयं को उत्तरदायी ठहराते है तथा परिणाम को मनमाफिक दिशा देने में माहिर होते है ,चाहे परिस्थितिया कितनी ही विकट क्यों ना हो जैसे ……

‘कोरोना महामारी’ से लगभग विश्व के सभी देशो में विकट स्थति बनी हुई है |इसी श्रेणी में हमारे देश भारत वर्ष की स्थिति भी कुछ ऐसे ही विकट अंदेशा होते हुए ऐसे वक्त में माननीय मोदी जी ने ताली बजवाकर ,थाली बजवाकर ,lockdown करवाकर ,best suggestion देकर अपनी बड़ी सोच का बहुत बड़ा उदहारण पेश कर सम्पूर्ण अंधकार को party बनाकर सारे देश को प्रकाश पर्व के रूप में उत्साहित किया तथा लोगो में व्याप्त भय मिटाकर आत्म विश्वास से सराबोर किया|

तथा अन्य देशो की अपेक्षा काफ़ी कम सुविधा एवं जनसँख्या के अनुपात में काफ़ी कम संसाधनों के होते हुए भी सफलता का परचम फहरा दिया तथा best leader एवं बड़ी सोच होने का उदाहरण पेश किया|

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संक्षेप में किसी के लिए नफरत या द्वेष का भाव रखेंगे तो दुखी रहेंगे तथा प्रेम एवं प्रसंशा (positivity )का मनोभाव रखेंगे तो सदा ख़ुश एवं तनाव मुक्त जीवन जीयेंगे और जोखिम उठाने एवं समस्या सुलझाने वाला(big thinking)नजरिया अपनाएंगे तो आपका दृष्टिकोण अमीर बनाने में “मील का पत्थर” साबित होगा| इसलिए सोचों तो leader की तरह|

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