स्वदेशी वस्तुओ का महत्त्व | जानिए कैसे ?

स्वदेशी वस्तुओ का महत्व जानकर आर्थिक महाशक्ति बनने वाले देश |

पिछले अंक में स्वदेशी वस्तुओ के फायदे | के बारे में पढ़ा अब स्वदेशी वस्तुओ के महत्व के बारे में विस्तार से जानिए 

किसी भी देश को यदि आर्थिक, सामाजिक, तकनिकी , सुरक्षा आदि क्षेत्र में समर्थ व महाशक्ति बनना है, तो स्वदेशी मन्त्र को अपनाना ही होगा दूसरा कोई मार्ग नहीं। जैसे –
अमरीका  – लम्बे समय से अंग्रेज़ों का गुलाम रहा, 200 वर्ष पहले इस देश का कोई अस्तित्व नहीं था। पर जब वहां स्वदेशी के मन्त्र को लेकर जार्ज वाशिंगटन ने क्रांति किया तो आज अमरीका विश्व में महाशक्ति बन चूका है। दुनिया के बाजार में अमरीका का 25 प्रतिसत सामान बिकता है।

जापान – जापान 3 बार गुलाम हुआ पहले अंग्रेज़, फिर डच पुर्तगाली और स्पेनिश का, फिर तीसरी बार अमरीका का जिसने सन 1945 में जापान के दो महत्वपूर्ण शहर हिरोशिमा व नागासाकी पर परमाणु बम गिरा दिए थे। 100 वर्ष पहले तक जापान की दुनिया में कोई पहचान नहीं थी। लेकिन स्वदेशी के जज्बे के कारण जापान पिछले 60 वर्षों में पुनः दुनिया की महाशक्तियों में से एक है।

चीन – चीन भी अंग्रेज़ों का ही गुलाम था। अंग्रेज़ों ने चीन के लोगों को अफीम के नशे में इस कदर डुबो दिया था कि वो सिर्फ जिन्दा लाश बन कर रह गए थे। सन 1949 तक चीन भिखारी देश था। विदेशी क़र्ज़ में डूबा था। बाद में वहां एक स्वदेशी के क्रांतिकारी नेता माओजेजांग ने पुरे देश की तस्वीर ही बदल दी। आज चीन आर्थिक क्षेत्र में अप्रत्याशित ऊंचाई पर  विकास कर रहा है | आज दुनिया के बाजार में चीन का 25 प्रतिसत सामान बिकता है।

मलेशिया – पिछले 50 वर्षों के पहले मलेशिया एक गुमनाम देश था जिसकी कोई पहचान नहीं थी। किन्तु स्वदेशी के कारण मलेशिया मात्र 25 वर्षों में खड़ा हो गया , और दुनिया के बाजार में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने लगा।

भारत का गौरवपूर्ण इतिहास

विदेशी बैसाखियों पर कोई भी देश ज्यादा दिन तक नहीं टिक सकता। अंग्रेज़ों के आने से पहले हमारा देश हर क्षेत्र में विकसित व महाशक्ति था। अंग्रेज़ों के शाशनकाल में लार्ड मैकाले ने भारत की गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था को बदल दिया। पढाई जाने वाली इतिहास की किताबों में भारत के गौरवपूर्ण इतिहास में फेर बदल कर दिया। भारत को गरीब देश, सपेरों का देश, लुटेरों का देश, हर तरह से बदहाल देश दर्शाया गया। जबकि इंग्लैंड व स्कॉटलैंड के ही करीब 200 इतिहासकारों ने भारत के बारे में इतिहास की किताबों में जो लिखा है वो इसके उलट दूसरी ही कहानी बयां करती हैं। इन इतिहासकारों के अनुसार :-

  • भारत के गांवों में जरूरत के सभी सामान तैयार होते थे, शहर से सिर्फ नमक आती थी।
  • सन 1835 तक भारत का 33 प्रतिसत सामान दुनिया के बाजारों में जाता था।
  • भारत में तैयार लोहा दुनिया में सर्वश्रेष्ठ माना जाता था। सरगुजा (छत्तीसगढ़) के आस-पास लोहे के 1000 कारखाने थे।
  • यूरोप के देशों की तुलना में भारत की फसल प्रति एकड़ तीन गुना ज्यादा होती थी।
  • गुरुकुल शिक्षा पद्धति बहुत मजबूत थी, वैदिक गणित के सूत्रों से गड़ना कैलकुलेटर से भी शीघ्र होती थी।
  • भारत के गांवों में लोगों के घर में सोने के सिक्कों के ढेर पाए जाते थे, जिसे वो गिनकर नहीं तौल कर रखते थे।
  • भारत का कपड़ा विदेशों में सोने के वजन के बराबर तौल में बिकता था।
  • भारत में इतनी अधिक समृद्धि थी कि मंदिर भी सोने के बनवा दिए जाते थे।

इसलिए अब जरूरत आन पड़ी है कि भारत को और अधिक लुटने से बचाएं। और अपने देश को समृद्ध व शक्तिशाली बनाने के लिए स्वदेशी आंदोलन को हम सब तेज़ गति से आगे बढ़ाएं। इस हेतु व्यक्तिगत स्तर पर हम यह जरूर करें –

  • जहाँ तक संभव हो,स्वदेशी व विदेशी कंपनियों की सूची अपने पास रखें और स्वदेशी वस्तुएं ही खरीदें। 
  • अपने देश की निर्मित वस्तुओं की गुणवत्ता में कमीं होने पर निर्माणकर्ताओं से गुणवत्ता में सुधार के लिए निवेदन करें।
  • यदि व्यवस्था बन सके तो आप स्वयं शून्य तकनीकी के उत्पाद बनाना प्रारम्भ करें।

हमारी habits .

 स्वदेशी स्टोर : आम जीवन में हर किसी को ये मुमकिन नहीं हो पाता कि सभी विदेशी और स्वदेशी कंपनियों के नाम की सूची अपने पास रख सकें, और सामान खरीदते वक़्त इस बात का ध्यान रह पाना भी मुश्किल हो जाता है कि जो सामान हम खरीद रहें हैं वो कहाँ से निर्मित है। ऐसा इसलिए है कि हमारी आदत में ही ये शामिल नहीं है। हम वस्तुओं के दाम देख कर ही सस्ते-महंगे के अनुसार सामान लेते हैं, फिर चाहे वो सामान चीन से बना हो या फिर पाकिस्तान से बना हो | अतः हमें स्वदेशी स्टोर से ही समान खरीदने की habit अपनानी होगी | साथ ही price के बजाय स्वदेशी को महत्वपूर्ण मानना होगा |

वर्तमान में स्वदेशी प्रयास

पीएम नरेंद्र मोदी ने भी लोगों से ‘लोकल फॉर वोकल’ की बात पर जोर दिया है | पीएम के इस आह्वान के बाद लोग स्वदेशी वस्तुएं अपनाने पर जोर दे रहे है | स्वदेशी जागरण मंच ने गृह मंत्रालय की तर्ज पर रक्षा मंत्रालय की आर्मी कैंटीन और अन्य मंत्रलाय में भी स्वदेशी लागू करने की बात कही है | लोगों को स्वदेशी अपनाने के लिए घर-घर प्रचार करने से लेकर सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर स्वदेशी और विदेशी वस्तुओं की सूची भेजकर अपने अभियान से जोड़ने का काम शुरु कर दिया   है |

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कैंटीन में भी स्वदेशी लागू 

पीएम के वोकल फॉर लोकल के आग्रह के बाद व्यापक प्रभाव शुरु हो गया है | गृह मंत्रालय ने भी कहा है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कैंटीन पर अब सिर्फ स्वदेशी उत्पादों की ही बिक्री होगी | अगर इसी तरह रक्षा मंत्रालय और अन्य मंत्रालय में भी ऐसा होता है तो अच्छा होगा | हमें बाहर से सामान मंगवाने की ज़रुरत नहीं है कि अब हम सब भारत में ही निर्माण कर सकते है | हम देश में उद्योगों का विकास करेंगे | जिससे रोजगार के अवसर निर्माण होंगे | इससे अर्थव्यवस्था को बहुत बल मिलेगा | रोजगार का सृजन होगा | छोटे बड़े उद्योगों का विकास के साथ-साथ कृषि के क्षेत्र में भी बहुत विकास देखने को मिलेगा.. इस प्रकार स्वदेसी वस्तुओ को अपनाना हम सबके लिए उपयुक्त रहेगा |

वोकल फॉर लोकल |

वैसे देखा जाये तो केंद्र सरकार का ‘वोकल फॉर लोकल’ का कदम मेक इन इंडिया का दूसरा रूप नहीं है | बल्कि यह उससे बेहतर है | मेक इन इंडिया में विदेशी कंपनियां भारत में आकर उद्योग लगाने पर काम करती हैं | जबकि ‘वोकल फॉर लोकल’ में स्वदेशी के साथ ही स्थानीय प्रोडक्टस पर फोकस किया जाएगा | हमारा नारा और हमारा सपना ‘चाहत से देसी, जरूरत में स्वदेशी अब आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है  |

 जनजागरुकता अभियान होना चाहिए 

स्वदेशी हर देश के लिए हर समय बहुत आवश्यक होता है |

स्वदेशी की बात करने का मतलब यह नहीं है कि विदेशों से व्यापार संबंध समाप्त कर लेना | ऐसा बिल्कुल नहीं है | भारत के कई देशों से व्यापारिक संबंध रहे हैं. लेकिन जो हमारे देश में बन सकता है या उपलब्ध है उसका इस्तेमाल अब हम करेंगे | कई संगठन  समाज में स्वदेशी अपनाने को लेकर एक जनजागरुकता अभियान शुरु कर  सकते है |और करना भी चाहिए |

लोकल फॉर वोकल का प्रयास अच्छा है | लेकिन इसके लिए थोड़ा समय लगेगा | इसका पूरा असर लंबे समय बाद अर्थव्यवस्था पर नजर आएगा | हम आत्मनिर्भर बनकर खड़े होंगे |

लोकल फॉर वोकल का प्रयास अच्छा है | लेकिन इसके लिए थोड़ा समय लगेगा | इसका पूरा असर लंबे समय बाद अर्थव्यवस्था पर नजर आएगा | हम आत्मनिर्भर बनकर खड़े होंगे |

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Countries becoming economic superpowers knowing the importance of Swadeshi.

If any country wants to become capable and a superpower in the field of economic, social, technology, security, etc., then the indigenous mantra will have to be adopted. like –
America – Slave to the British for a long time, 200 years ago this country did not exist. But when George Washington made a revolution there about the Swadeshi mantra, America has become a superpower in the world today. 25 percent of America’s goods are sold in the world market.

Japan – Japan was enslaved 3 times, first to the English, then to the Dutch, Portuguese and Spanish, and then to the United States for the third time in 1945, which dropped atomic bombs on two important cities of Japan, Hiroshima, and Nagasaki. 100 years ago, Japan had no identity in the world. But due to the indigenous spirit, Japan is again one of the world’s superpowers in the last 60 years.

China – China was also a slave of the British. The British had soaked the people of China intoxicated by opium so much that they had become mere dead bodies. China was a beggar country until 1949. The foreign debt was in debt. Later, a revolutionary leader of Swadeshi there, Maojejang changed the picture of the whole country. Today, China is developing at an unprecedented height in the economic sector. Today, 25 percent of China’s goods are sold in the world market.

Malaysia – Prior to the last 50 years, Malaysia was an anonymous country with no identity. But due to Swadeshi, Malaysia stood up in just 25 years and started making its presence in the world market.

The proud history of India

No country can last long on foreign crutches. Before the arrival of the British, our country was developed and a superpower in every field. Lord Macaulay changed the Gurukul education system of India during British rule. Changed the glorious history of India in the history books being read. India was shown as a poor country, a country of snakes, a country of robbers, a bad country in every way. Whereas, about 200 historians from England and Scotland have written a different story about India than they have written in history books. According to these historians: –

All the items of need were prepared in the villages of India, the only salt came from the city.
By 1835, 33 percent of India’s goods used to go to the world markets.
Iron prepared in India was considered the best in the world. There were 1000 iron factories around Surguja (Chhattisgarh).
Compared to the countries of Europe, India’s crop was three times more per acre.
The Gurukul education system was very strong, it was quicker than a calculator to break with the sources of Vedic mathematics.
In India’s villages, heaps of gold coins were found in people’s homes, which they did not count and weigh.
India’s cloth was sold in weights equal to the weight of gold abroad.
India had so much prosperity that even temples were made of gold.

  • Therefore, the need now is to save India from further plundering. And to make our country prosperous and powerful, we should all move forward with the Swadeshi movement. For this, we must do this on a personal level –
  • As far as possible, keep the list of indigenous and foreign companies with you and buy indigenous items only.
    In case of a decrease in the quality of manufactured goods of your country, request the manufacturers for improvement in quality.
    If the system can be made, then you start making products of zero technology yourself.
    Our habits.

Swadeshi Store: In normal life, it is not possible for everyone to keep a list of names of all foreign and indigenous companies, and while buying goods, it becomes difficult to keep in mind that the goods we are buying. Where is it made from This is because it is not included in our habit? Seeing the prices of goods, we take goods according to cheap and expensive, whether those goods are made from China or Pakistan. Therefore, we have to adopt the habit of buying the same from indigenous stores. Also, Swadeshi has to be considered important rather than price.

Swadeshi at present

PM Narendra Modi has also emphasized to the people about ‘Local for Vocal’. After this call of PM, people are insisting on adopting indigenous goods. Swadeshi Jagran Manch has said to introduce Swadeshi in the army canteen and other ministries of the Ministry of Defense on the lines of the Ministry of Home Affairs. From publicity to door-to-door campaigning of people to adopt Swadeshi, the list of indigenous and foreign goods on social media and WhatsApp has started connecting with their campaign.

We have never believed in our people in the last 70 years. We became based on FDI and foreign investment. Today such a situation has come that it is very important for us to adopt Swadeshi. For so many years we depended on foreign goods. The market was captured by outside companies. This completely affected employment opportunities in the country.

Indigenous implementation in the canteen of Central Armed Police Forces

After the PM’s request for Vocal for Local, a wide impact has started. The Ministry of Home Affairs has also said that now only indigenous products will be sold at the canteen of the Central Armed Police Forces. If the same happens in the Ministry of Defense and another ministry, it would be good. We do not need to order goods from outside, now we can all manufacture in India itself. Let us develop industries in the country

Will Which will create employment opportunities. This will give a lot of boost to the economy. Employment will be created. Along with the development of small and big industries, there will also be a lot of development in the field of agriculture .. Thus, it will be appropriate for all of us to adopt self-government goods.

Vocal For Local |

By the way, the central government’s move for ‘Vocal for Local’ is not another form of Make in India. Rather it is better than that. In Make in India, foreign companies come to India and work on setting up industries. Whereas ‘Vocal for Local’ will focus on indigenous as well as local products. Our slogan and our dream are’ Desi with desire, Swadeshi in need is now seen moving forward.

There should be a public awareness campaign

Swadeshi is very important for every country at all times.

Talking about Swadeshi does not mean ending trade relations with foreign countries. This is not the case at all. India has business relations with many countries. But what can be made or available in our country, we will use it now. Many organizations can start a public awareness campaign to adopt Swadeshi in society.

Local for the vocal effort is good. But it will take some time. Its full effect will be seen in the economy after a long time. We will stand up as self-sufficient.

1 thought on “स्वदेशी वस्तुओ का महत्त्व | जानिए कैसे ?”

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