स्वदेशी वस्तुओ के फायदे |

गर हम लोग अधिक से अधिक स्वदेशी  वस्तुओ का  प्रयोग करते हैं तो उस पर होने वाला फायदा भी अपने देश को होगा।चुकि  विदेशी वस्तुओं का मूल्य तो अधिक रहता ही है उससे होने वाले  अधिकांश फायदे  विदेशी लोगों के हिस्से में आता है।

 स्वदेशी की परिभाषा-

स्वदेश शब्द में ही स्वदेशी का अर्थ छुपा हुआ है | मतलब अपने देश का सामान अथवा अपने देश में निर्मित वस्तुएं ।अर्थात किसी भौगोलिक क्षेत्र में जन्मी, निर्मित या कल्पित वस्तुओं, नीतियों, विचारों को स्वदेशी कहते हैं।

स्वदेशी वस्तुओ को क्यों अपनाएँ ?

अगर हम वैश्विक स्तर पर तुलना करें और अध्ययन करें | कि कोई भी देश किस आधार पर और किस गति से प्रगति कर रहा है | तो हम पाते हैं कि इसकी वजह उस देश का स्वदेशी व्यापार ही है। अर्थात  हमारी वह भावना जो हमें दूर का छोड़कर अपने समीपवर्ती परिवेश का ही उपयोग करना सिखाती है। सीधे शब्दों में बात करें तो “हमारे ही देश में हमारे ही लोगों द्वारा निर्मित वस्तुओं का उपयोग करना”।

अर्थ के क्षेत्र में मुझे अपने पड़ोसियों(देशवासियों) द्वारा निर्मित वस्तुओं का ही उपयोग करना चाहिए और अगर कहीं उनके द्वारा निर्मित वस्तुओं की गुणवत्ता कम है तो सार्थक सलाह देकर उन वस्तुओं की गुणवत्ता में सुधार करवाना चाहिए | और उन्हें ज्यादा सम्पूर्ण और सक्षम बना कर उनकी सेवा करनी चाहिए। ऐसा करने से बिना किसी विशेष श्रम और समय को खर्च किए हम पुनः शीर्ष पर पंहुच सकेंगे।तथा हमारी आत्मनिर्भर बनने की राह आसान होगी |इसी प्रकार अनेक स्वदेशी वस्तुओ के फायदे है |अतः देशहित का स्मरण कर अधिकाश स्वदेशी वस्तुओ को use करना चाहिए |

स्वदेशी वस्तुओ का महत्व

अगर देश के नागरिक अपने ही देश में निर्मित वस्तुओं का उपयोग करें तो उस राष्ट्र की प्रगति को कोई नहीं रोक सकता। सन 1947 में 1 रुपया 1 डालर के बराबर होता था जो वर्तमान में घटकर 70 रुपये 1 डालर के बराबर हो गया है। आजादी के 67 वर्ष बाद भी हम खिलौने चीन के बने हुये प्रयोग करते है। थोक के भाव इंजीनीयर पैदा करने वाले हमारे देश में.कैलकुलेटर, मैमोरी कार्ड , सिम कार्ड …… जैसी छोटी छोटी वस्तऐं भी चीन से आयातित करनी पड रही है।दैनिक रोजमर्रा की वस्तुओं साबुन, सैम्पू, क्रीम, तेल, जूता, कपडे, पैन, घडी, मोबाईल, पानी की बोतल, चाय, काँफी,अचार का डिब्बा,……यहाँ तक नमक भी इनमें अधिकाँश वस्तुऐं विदेशी होती है।

इसे अपनाना होगा –

अभी भी वक्त है अगर अभी भी हमने ध्यान नहीं दिया तो भारत में आर्थिक गुलामी आ जायेगी। भारत की अर्थव्यवस्था विदेशी कम्पनियों की गुलाम बन जायेगी। कहीं ऎसा ना हो आने वाले समय में हमारी पीढी हमसे कहे जब विदेशी कम्पनियाँ देश लूट रही थी तब तुम क्या फेसबुक चला रहे थे। विश्व बैंक और W.T.O. की शर्तों को मानना आज हमारी मजबूरी बन गया है। अगर रुपये की कीमत और गिरती है तो जो हम पर विदेशी कर्जा है वह कई गुणा हो जायेगा।आने वाली आर्थिक गुलामी से बचने का एक मात्र उपाय है स्वदेशी प्रचार।तथा ऊपर लिखित ऐसे अनेक विदेशी products का परित्याग साथ ही अधिकतम स्वदेशी वस्तुओ का use करना  हमे अपनी habit में अपनाना होगा |

वैसे तो स्वदेशी वस्तुओ के फायदे अनगिनत है | जिस पर अध्याय लिखे जा सकते है | लेकिन संक्षेप  में यदि हमें आत्मनिर्भर बनना है और देश को आर्थिक महाशक्ति बनाना है| तो हमें स्वदेशी का प्रचार -प्रसार करना है |तथा स्वदेशी वस्तुओ की productivity बढानी होगी |और उन्हें अनिवार्य रूप से अपनाना होगा |राजीव भाई दीक्षित और बाबा रामदेव जैसे महापुरुषों के बताएं रास्ते पर चलना चाहिए | मै तो उनके स्वदेशी वस्तुओ के बारे में वर्णित विचारो को श्रेष्ठ मानता हूँ |ऐसे श्रेष्ठ विचारो को अपनाने से देश आर्थिक महाशक्ति और  हम आत्मनिर्भर बन सकते है |


useful of indigenous goods

If we use more and more indigenous goods, then our country will also benefit from it. Because the value of foreign goods remains high, most of the benefit comes from the share of foreign people.

Definition of Swadeshi

The meaning of Swadeshi is hidden in the word Swadesh itself. This means the goods of our country or the goods manufactured in our country. That is, the goods, policies, ideas, born or created in a geographical area, are called indigenous.

Why adopt indigenous goods?

If we compare and study globally. On what basis and at what speed any country is progressing. So we find that the reason is the indigenous trade of that country. That is our spirit which teaches us to use our immediate surroundings while leaving far away. Simply put, “to use the goods manufactured by our people in our own country”.

In the field of meaning, I should use only the goods manufactured by my neighbors (countrymen) and if the quality of the goods manufactured by them is low, then the quality of those goods should be improved by giving meaningful advice. And they should serve them by making them more complete and capable. By doing this, we will be able to reach the top again without spending any special labor and time. And our path of becoming self-reliant will be easy. Similarly, there are advantages of many indigenous items. Therefore, we should use more indigenous goods by remembering the national interest.

Importance of swadeshi

If the citizens of the country use the goods manufactured in their own country then no one can stop the progress of that nation. In 1947, 1 rupee was equal to 1 dollar, which has been reduced to 70 rupees 1 dollar at present. Even after 67 years of independence, we use toys made from China. In our country producing wholesale prices, even small items like calculator, memory card, sim card …… have to be imported from China. Daily items like soap, shampoo, cream, oil, shoe, Clothes, pan, watch, mobile, water bottle, tea, coffee, pickle box …… even salt has a majority of these items.

It has to be adopted –

There is still time if we still do not pay attention, then economic slavery will come in India. India’s economy will become a slave to foreign companies. Somewhere in the future, our generation should tell us when foreign companies were looting the country, what were you running Facebook? The World Bank and W.T.O. It has become our compulsion to accept the conditions of If the value of the rupee falls further, then the foreign debt we owe will multiply. The only way to avoid economic slavery is through indigenous propaganda. And the abandonment of many such foreign products written above, as well as the use of maximum indigenous goods. We have to adopt it in our habit.

By the way, the benefits of indigenous goods are countless. On which chapters can be written. But in short, if we have to become self-reliant and make the country an economic superpower. So we have to propagate Swadeshi. And the productivity of Swadeshi goods will have to increase. And they must adopt it. We should follow the path of great men like Rajiv Bhai Dixit and Baba Ramdev. I consider the ideas mentioned about their indigenous things to be superior. By adopting such excellent ideas, the country can become an economic superpower and we can become self-reliant.

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