world war 1 : प्रथम विश्वयुद्ध कब , क्यों और कैसे हुआ ?

world war 1- प्रथम विश्व युद्ध (WWI या WW1 के संक्षिप्त रूप में जाना जाता है) यूरोप में होने वाला यह एक वैश्विक युद्ध था । जो 28 जुलाई 1914 से 11 नवंबर 1918 तक चला था । अर्थात world war 1 प्रथम विश्‍व युद्ध साल 1914 में 28 जुलाई को शुरू हुआ था । जब ऑस्ट्रिया- हंगरी ने सर्बिया के खिलाफ जंग का ऐलान किया । इस विश्व युद्ध को ग्रेट वार या ग्लोबल वार भी कहा जाता है। उस समय ऐसा माना गया कि इस युद्ध के बाद सारे युद्ध ख़त्म हो जायेंगे, इसे ‘वॉर टू एंड आल वार्स’ भी कहा गया पर इस युद्ध के 20 साल बाद ही द्वितीय विश्व युद्ध भी हुआ।

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28 जून 1914 को, बोस्निया के सर्ब यूगोस्लाव राष्ट्रवादी गैवरिलो प्रिंसिपल ने साराजेवो में ऑस्ट्रो-हंगेरियन वारिस आर्चड्यूक फ्रांज फर्डिनेंड की हत्या कर दी, जिससे जुलाई संकट पैदा हो गया। इसके उत्तर में, ऑस्ट्रिया-हंगरी ने 23 जुलाई को सर्बिया को एक अंतिम चेतावनी जारी कर दी। सर्बिया का उत्तर ऑस्ट्रियाई लोगों को संतुष्ट करने में विफल रहा, और दोनों युद्ध स्तर पर चले गए। गठबंधनों के एक संजाल ने बाल्कन में द्विपक्षीय मुद्दे से यूरोप के अधिकांश भाग को संकट में डाल दिया। जुलाई 1914 तक, यूरोप की महाशक्तियों को दो गठबंधन में विभाजित किया गया था, ट्रिपल एंटेंटे : जिसमें फ्रांस, रूस और ब्रिटेन शामिल थे; तथा ट्रिपल एलायंस :जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी और इटली। ट्रिपल एलायंस की प्रकृति केवल रक्षात्मक था, जिससे इटली को अप्रैल 1915 तक युद्ध से बाहर रहने की अनुमति मिली, जब वह ऑस्ट्रिया-हंगरी के साथ अपने संबंधों के बिगड़ने के बाद मित्र देशों की शक्तियों में शामिल हो गया। रूस ने सर्बिया को वापस लेने की आवश्यकता महसूस की, और 28 जुलाई को ऑस्ट्रिया-हंगरी के बेलग्रेड के सर्बियाई राजधानी पर गोलाबारी के बाद आंशिक रूप से एकत्रीकरण को मंजूरी दी।
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world war 1 प्रथम विश्व युद्ध में शामिल देश (Countries Involved in World War)

इस युद्ध में एक तरफ मित्र राष्ट्रों जिनमें इंग्लैंड, फ्रांस, रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका, इटली, रूमानिया तथा उनके सहयोगी राष्ट्रों और दूसरी तरफ केंद्रीय शक्तियों जिनमें जर्मनी, ऑस्ट्रिया, तुर्की, बुल्गारिया आदि देश शामिल थे । जिस समय यह युद्ध शुरू हुआ उस समय ऑस्ट्रो- हंगरी में हब्स्बर्ग नामक वंश का शासन था । जो वर्तमान समय में तुर्की का इलाक़ा है।

world war 1 होनें का कारण और परिणाम (The Cause And Consequences of The First World War)

world war 1 के लिए कोई एक कारण नहीं था इसके अनेक कारण उत्तरदायी थे । इसके लिए 1914 तक होनें वाली अनेक घटनाओं और कारणों का परिणाम माना जा सकता है । हालाँकि इस इस युद्ध का तात्कालिक कारण यूरोप के सबसे बड़े ऑस्ट्रिया-हंगरी साम्राज्य के उत्तराधिकारी आर्चड्यूक फर्डिनेंड और उनकी पत्नी की बोस्निया में हुई हत्या को ही माना जाता है। इसके अन्य कारण इस प्रकार है-

मिलिट्रीज्म (Militarism)

सभी देश सुरक्षा की दृष्टिकोण से अनेक प्रकार के आधुनिक अस्त्र शस्त्रों का निर्माण करनें लगे । इसके फलस्वरुप मशीन गन, टैंक, जहाज और अधिक सैनिकों पर विशेष ध्यान देने लगे । यहाँ तक कि कई देशों नें अपनी सैनिकों की संख्या में काफी विस्तार किया, और इस मामले में जर्मनी और ब्रिटेन सबसे आगे थे ।

ऐसे में अन्य देशों ने भी जर्मनी और ब्रिटेन से बराबरी करनें की कोशिश की परन्तु यह संभव नहीं था । इस प्रकार एक ऐसी अवधारणा बन गयी कि जिस देश के पास आधुनिकअस्त्र शस्त्र और जितने अधिक सैनिक होंगे वह देश उतना ही ताकतवर होगा । इसके पश्चात सभी देशों नें अपनी सेनाओं का आकार बढ़ाना शुरू किया ।

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गुप्त संधियाँ और गुटों का निर्माण (Creation of Secret Treaties and Factions)

यूरोप में 19वीं शताब्दी के दौरान जर्मनी के चांसलर बिस्मार्क नें अपने देश को यूरोपीय राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत बनानें के लिए गुप्त संधिया करना शुरू कर दिया । बिस्मार्क नें ऑस्ट्रिया के साथ द्वैत संधि और रूस के साथ मैत्री संधि के साथ-साथ उसनें इटली और ऑस्ट्रिया के साथ भी मैत्री संधि की ।

इसके फलस्वरूप यूरोप में एक नए गुट का निर्माण हुआ, जिसे त्रिगुट संधि कहा जाता है । इसमें जर्मनी, ऑस्ट्रिया और इटली शामिल थे । हालाँकि इटलीज र्मनी और ऑस्ट्रिया के साथ था, परन्तु युद्ध के दौरान इटली नें पाला बदल कर फ्रांस एवं ब्रिटेन के साथ युद्ध करना शुरू कर दिया था।

साम्राज्यवाद की प्रतिस्पर्धा (Competitiveness of Imperialism)

सन 1880 के बाद सभी बड़े देश जिनमें फ्रांस, जर्मनी, होलैंड बेल्जियम आदि अफ्रीका पर क़ब्ज़ा कर रहे थे और ब्रिटेन इन सभी देशों का नेतृत्व कर रहा था, क्योंकि ब्रिटेन की इस समय काफ़ी सफ़ल देश था और बाक़ी देश इसके विकास मॉडल को कॉपी करना चाहते थे । पूरी दुनिया के 25 प्रतिशत भाग पर एक समय ब्रिटिश शासन का राजस्व था, जिसके कारण ब्रिटेन के पास बहुत अधिक संसाधन आ गये थे और इसी वजह से इनकी सैन्य क्षमता में भी काफी वृद्धि हुई ।

राष्ट्रवाद की भावना (The Spirit of Nationalism)

19वीं शताब्दी मे जर्मनी, इटली, अन्य बोल्टिक देशों में राष्ट्रवाद पूर्ण रूप से फ़ैल चुका था, जिसके कारण यह लड़ाई एक ग्लोरिअस लड़ाई के रूप मे भी सामने आई । इन देशों को ऐसा लगने लगा कि कोई भी देश लड़ाई लड़ के और जीत के ही महान बन सकता है. इस तरह से देश की महानता को उसके क्षेत्रफल से जोड़ के देखा जाने लगा ।

world war 1 से पहले एक पोस्टर बना था, जिसमें कई देश एक दूसरे पर आक्रमण करते नजर आ रहे थे । इस पोस्टर में साइबेरिया को एक बहुत छोटे बच्चे के रूप में दिखाया गया था, जिसमें साइबेरिया, ऑस्ट्रिया से कह रहा था कि यदि तुम मुझे मारोगे तो रूस तुम्हे मारेगा । इसी प्रकार यदि रूस ऑस्ट्रिया को मारता है, तो जर्मनी रूस को मारेगा । इस तरह सभी एक दुसरे के दुश्मन हो गये, जबकि झगड़ा सिर्फ साइबेरिया और ऑस्ट्रिया के बीच में था ।

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प्रथम विश्व युद्ध का मुख्य कारण (The Main Reason for the First World War)

प्रथम विश्वयुद्ध का तात्कालिक कारण आर्चड्यूक फर्डिनेंड और उनकी पत्नी की बोस्निया में हत्या कर दी गयी । इस हत्या के बाद यूरोप स्तब्ध हो गया और उसनें इस घटना के लिए सर्विया को जिम्मेदार ठहराया । इसके बाद ऑस्ट्रिया ने साइबेरिया को आत्मसमर्पण करनें के लिए कहा । ऐसी परिस्थितियों में साइबेरिया ने रूस से मदद माँगी और रूस को बाल्टिक्स में हस्तक्षेप करने का एक अवसर मिल गया ।

इसी बीच ऑस्ट्रिया हंगरी नें जर्मनी से सहायता मांगी । जर्मनी का सहयोग मिलनें पर ऑस्ट्रिया हंगरी नें साइबेरिया पर हमला करना शुरू कर दिया और इसी बीच रूस ने जर्मनी से लड़ाई की घोषणा कर दी और इसके कुछ दिनों बाद ही  फ्रांस ने भी जर्मनी से लड़ाई की घोषणा कर दी ।

प्रथम विश्व युद्ध का समय (Time of The First World War)

इस प्रकार अगस्त में युद्ध शुरू हो गया और जर्मनी नें फ़्रांस को हरानें के लिए एक योजना बनायी और इसके लिए जर्मनी नें बेल्जियम का रास्ता चुना । जैसे ही जर्मनी के सैनिकों नें  बेल्जियम में प्रवेश किया, उधर से ब्रिटेन ने जर्मनी पर हमला कर दिया । ब्रिटेन का जर्मनी पर हमला करनें का मुख्य कारण बेल्जियम और ब्रिटेन के बीच सन 1839 में एक समझौता हुआ था । हालाँकि जर्मनी की सेनाओं नें ईस्ट फ्रंट पर रूस को पराजित कर दिया । इस हमले के दौरान लगभग 3 लाख रूसी सैनिक शहीद हो गये ।

इसी दौरान ओटोमन एम्पायर ने भी रूस पर हमला कर दिया क्योंकि ओटोमन और रूस दोनों एक लम्बे अरसे से एक दूसरे के दुश्मन थे, और इसी के साथ ओटोमन ने सुएज कैनाल पर भी हमला कर दिया । फ्रांस और जर्मनी तीन वर्ष तक ऐसे ही आमने सामने रहे, इस दौरान न तो फ्रांस ही आगे बढ़ पाया और न जर्मनी । यह एक ऐसा समय था, जब लगभग पूरी दुनिया में लड़ाई छिड़ी हुई थी । जिसके कारण इसे ग्लोबल वार भी कहा जाता है ।

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युद्ध समाप्ति और परिणाम

First World War in Hindi में युद्ध की समाप्ति और परिणाम बहुत ही भयावह रहे थे। 1918 में जर्मन आक्रमण के बाद मित्र देशों के पलटवार ने जर्मन सेना को निर्णायक वापसी हेतु मजबूर कर दिया। अक्तूबर-नवंबर 1918 में क्रमशः तुर्की और ऑस्ट्रिया ने आत्मसमर्पण कर दिया, जिससे जर्मनी अकेला पड़ गया। बाद में जर्मनी की हार हुई और वहां सत्ता भी बदली, नई सत्ता के आने से जर्मनी ने युद्धविराम के घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए और यह प्रथम विश्वयुद्ध 11 नवंबर 1918 को जाकर खत्म हुआ। इस विश्वयुद्ध में एक करोड़ दस लाख सिपाही और लगभग 60 लाख आम नागरिक मारे गए। इसमें मरने वालों की संख्या एक करोड़ सत्तर लाख थी वहीं 2 करोड़ घायल हुए थे। इस युद्ध ने पूरी दुनिया को आर्थिक मंदी में भी ला दिया था। इस युद्ध के बाद अमेरिका एक विश्व शक्ति बन के उभरा था।

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