Balshastri Jambhekar Biography : बालशास्त्री जांभेकर का जीवन परिचय |

परिचय – Balshastri Jambhekar Biography : बाल गंगाधर जांभेकर मराठी पत्रकारिता के अग्रदूत थे। उन्होने 6 जनवरी, 1832 को ‘दर्पण’ नामक प्रथम मराठी अखबार शुरू किया तथा इतिहास और गणित से संबंधित विषयों पर अनेक पुस्तकें लिखीं। उन्हें मराठी भाषा में पत्रकारिता शुरू करने के अपने प्रयासों के लिए ‘मराठी पत्रकारिता के पिता’ के रूप में भी जाना जाता है।

वे बचपन से ही प्रतिभाशाली और बुद्धिमान थे तथा वयस्क होने पर कई विषयों में एक महान विद्वान और शोधकर्ता बन गए। वह बहुत कम समय के लिए ही सक्रिय थे, लेकिन उनके असाधारण काम ने भारत पर एक स्थायी छाप छोड़ दी। आइए जानते है विस्तार से Balshastri Jambhekar Biography : बालशास्त्री जांभेकर का जीवन परिचय…

Balshastri Jambhekar Biography

Balshastri Jambhekar Biography : शुरूआती जीवन

बाल गंधाधर जांभेकर का जन्म 6 जनवरी, 1812 में महाराष्ट्र राज्य के कोंकण क्षेत्र में देवगढ़ तालुका (सिंधुदुर्ग) के पोम्भुरले गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम गंगाधरशास्त्री था, जो एकअच्छे वैदिक थे। उन्होंने अपने पिता गंगाधरशास्त्री से घर पर मराठी और संस्कृत भाषाओं का अध्ययन शुरू किया।

बाल गंधाधर जांभेकर सन 1820 में अध्ययन की समाप्ति के बाद एल्फिंस्टन कॉलेज में अपने गुरु के सहायक के रूप में गणित के अध्यापक नियुक्त हुए। 1832 में वे अक्कलकोट के राजकुमार के अंग्रेजी के अध्यापक के रूप में भी रहे। इसी वर्ष ‘भाऊ महाजन’ के सहयोग से उन्होंने “दर्पण” नामक अंग्रेजी मराठी साप्ताहिक चलाया। इसमें वे अंग्रेजी विभाग में लिखते थे। वे अनेक भाषाओं के पंडित थे। मराठी और संस्कृत के अतिरिक्त लैटिन, ग्रीक, इंग्लिश, फ्रेंच, फारसी, अरबी, हिंदी, बंगाली, गुजराती तथा कन्नड भाषाएँ उन्हें आती थीं।

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बाल गंधाधर जांभेकर की इस बहुमुखी योग्यता देखकर सरकार ने “जस्टिस ऑफ दि पीस” के पद पर उनकी नियुक्ति की। इस नाते वे हाईकोर्ट में ग्रांड ज्यूरी का काम करते थे। 1842 से 1844 तक एज्युकेशनल इन्सपेक्टर तथा ट्रेनिंग कॉलेज के प्रिंसिपल के रूप में भी रहे। 1840 में “दिग्दर्शन” नाम की एक मासिक पत्रिका भी उन्होंने शुरू की। इसमें वे शास्त्रीय विषयों पर निबंध लिखते थे।

पत्रकारिता

6 जनवरी सन् 1832 में ‘दर्पण’ अखबार का पहला अंक प्रकाशित हुआ। जनता के लिए अखबार की भाषा मराठी रखी गई थी, लेकिन अखबार का एक कॉलम अंग्रेजी भाषा में भी लिखा गया। अखबार की कीमत 1 रुपये थी। यह अखबार, अंग्रेजी और मराठी जैसी भाषाओं में प्रकाशित हुआ। इस अखबार में दो कॉलम थे।

दर्पण अखबार साढ़े आठ साल तक चला, और जुलाई 1840 में उनका अंतिम अंक प्रकाशित हुआ था। इस समाचार पत्र का उद्देश्य स्वदेशी लोगों के बीच व्यापारिक हित का अध्ययन करना और इस समृद्धि और देश की समृद्धि के तरीके पर यहां के लोगों के कल्याण के बारे में सोचना था।

Balshastri Jambhekar Biography  सामाजिक कार्य

बाल गंधाधर जांभेकर ने सार्वजनिक पुस्तकालयों के महत्व को पहचानते हुए, ‘बॉम्बे नेटिव जनरल लाइब्रेरी’ की स्थापना की। वह ‘एशियाटिक सोसाइटी’ के त्रैमासिक क्वार्टर में एक पुस्तिका लिखने वाले पहले भारतीय थे।

बाल गंधाधर जांभेकर देश की प्रगति, आधुनिक सोच और संस्कृति को विकसित करने के लिए वैज्ञानिक ज्ञान की आवश्यकता और सामाजिक मुद्दों को देखने की न्यायिक भूमिका के वैज्ञानिक ज्ञान को बढ़ावा देने की आवश्यकता के बारे में जानते थे। संक्षेप में, वे आज की तरह एक ज्ञानी समाज द्वारा केवल 200 साल पहले की उम्मीद कर रहे थे।

सच्चे अर्थ में बाल गंधाधर जांभेकर ने अपने कर्म में अपने जीवन का समर्पण किया था। ग्रहण से संबंधित वास्तविकता अपने भाषाणों में प्रकट करने तथा ‘श्रीपती शेषाद्रि’ नामक ब्राह्मण को ईसाई धर्म से पुन: हिंदूधर्म में लेने के कारण वे जाति से बहिष्कृत कर दिए गए थे। इस मायने में, वे समाज सुधारक थे। उनकी प्रतिभा और प्रयास ने न केवल महाराष्ट्र की जनता, बल्कि पूरे भारत में, एक प्रतिष्ठित समाज सुधारक और पत्रकार के रूप में अपनी कभी न मिटने वाली छाप छोड़ी।

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सम्मान

बाल गंधाधर जांभेकर ने बॉम्बे नेटिव एजुकेशन सोसाइटी के ‘मूल सचिव’, अक्कलकोट के शिक्षक, एल्फिंस्टन इंस्टीट्यूट में पहले सहायक प्रोफेसर, स्कूल अन्वेषक, स्कूल के निदेशक (सामान्य स्कूल) में विभिन्न पदों पर काम किया। उन्हें 1840 में जस्टिस ऑफ द पीस बनाया गया था।

निधन

बाल गंधाधर जांभेकर शिलालेखों की खोज के सिलसिले में कनकेश्वर गए थे, वही उन्हें लू लग गई। इसी में उनका निधन 18 मई, 1846 को हुआ। इस ब्लॉग मे Balshastri Jambhekar Biography : बालशास्त्री जांभेकर का जीवन परिचय जाना। यदि पोस्ट अच्छी लगे तो शेयर जरूर करे। धन्यवाद।।

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