भगवान्‌ का वरदान श्री रामचरितमानस बालकाण्ड

भगवान्‌ का वरदान श्री रामचरितमानस बालकाण्ड

दोहा :
* जानि सभय सुर भूमि सुनि बचन समेत सनेह।
गगनगिरा गंभीर भइ हरनि सोक संदेह॥186॥
भावार्थ:-देवताओं और पृथ्वी को भयभीत जानकर और उनके स्नेहयुक्त वचन सुनकर शोक और संदेह को हरने वाली गंभीर आकाशवाणी हुई॥186॥

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चौपाई :
* जनि डरपहु मुनि सिद्ध सुरेसा। तुम्हहि लागि धरिहउँ नर बेसा॥
अंसन्ह सहित मनुज अवतारा। लेहउँ दिनकर बंस उदारा॥1॥
भावार्थ:-हे मुनि, सिद्ध और देवताओं के स्वामियों! डरो मत। तुम्हारे लिए मैं मनुष्य का रूप धारण करूँगा और उदार (पवित्र) सूर्यवंश में अंशों सहित मनुष्य का अवतार लूँगा॥1॥
* कस्यप अदिति महातप कीन्हा। तिन्ह कहुँ मैं पूरब बर दीन्हा॥
ते दसरथ कौसल्या रूपा। कोसलपुरीं प्रगट नर भूपा॥2॥
भावार्थ:-कश्यप और अदिति ने बड़ा भारी तप किया था। मैं पहले ही उनको वर दे चुका हूँ। वे ही दशरथ और कौसल्या के रूप में मनुष्यों के राजा होकर श्री अयोध्यापुरी में प्रकट हुए हैं॥2॥

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* तिन्ह कें गृह अवतरिहउँ जाई। रघुकुल तिलक सो चारिउ भाई॥
नारद बचन सत्य सब करिहउँ। परम सक्ति समेत अवतरिहउँ॥3॥
भावार्थ:-उन्हीं के घर जाकर मैं रघुकुल में श्रेष्ठ चार भाइयों के रूप में अवतार लूँगा। नारद के सब वचन मैं सत्य करूँगा और अपनी पराशक्ति के सहित अवतार लूँगा॥3॥
* हरिहउँ सकल भूमि गरुआई। निर्भय होहु देव समुदाई॥
गगन ब्रह्मबानी सुनि काना। तुरत फिरे सुर हृदय जुड़ाना॥4॥
भावार्थ:-मैं पृथ्वी का सब भार हर लूँगा। हे देववृंद! तुम निर्भय हो जाओ। आकाश में ब्रह्म (भगवान) की वाणी को कान से सुनकर देवता तुरंत लौट गए। उनका हृदय शीतल हो गया॥4॥
* तब ब्रह्माँ धरनिहि समुझावा। अभय भई भरोस जियँ आवा॥5॥
भावार्थ:-तब ब्रह्माजी ने पृथ्वी को समझाया। वह भी निर्भय हुई और उसके जी में भरोसा (ढाढस) आ गया॥5॥
दोहा :
* निज लोकहि बिरंचि गे देवन्ह इहइ सिखाइ।
बानर तनु धरि धरि महि हरि पद सेवहु जाइ॥187॥
भावार्थ:-देवताओं को यही सिखाकर कि वानरों का शरीर धर-धरकर तुम लोग पृथ्वी पर जाकर भगवान के चरणों की सेवा करो, ब्रह्माजी अपने लोक को चले गए॥187॥
चौपाई :
* गए देव सब निज निज धामा। भूमि सहित मन कहुँ बिश्रामा॥
जो कछु आयसु ब्रह्माँ दीन्हा। हरषे देव बिलंब न कीन्हा॥1॥
भावार्थ:-सब देवता अपने-अपने लोक को गए। पृथ्वी सहित सबके मन को शांति मिली। ब्रह्माजी ने जो कुछ आज्ञा दी, उससे देवता बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने (वैसा करने में) देर नहीं की॥1॥
*बनचर देह धरी छिति माहीं। अतुलित बल प्रताप तिन्ह पाहीं॥
गिरि तरु नख आयुध सब बीरा। हरि मारग चितवहिं मतिधीरा॥2॥
भावार्थ:-पृथ्वी पर उन्होंने वानरदेह धारण की। उनमें अपार बल और प्रताप था। सभी शूरवीर थे, पर्वत, वृक्ष और नख ही उनके शस्त्र थे। वे धीर बुद्धि वाले (वानर रूप देवता) भगवान के आने की राह देखने लगे॥2॥

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God bless

Doha:
* Jan Sanjay Sur Bhumi Sunee Bane along with Saneh.
Gagagira Gambhir Bhai Harni Sok Suspicion ॥186॥

Meaningfulness: – After knowing the fear of Gods and the earth and fearing the earth and hearing their affectionate words, there was a severe air which defeated mourning and doubt. 6186॥

Bunk:
* Jani Siddhi Muni Siddha Suresa. You will live like a male.
Manuj Avtara with Anshan. Lehun Dinkar Bans Udara ॥1॥
Bhaarthar: O monks, masters of Siddhas, and gods! do not fear. For you, I will take the form of a human being and will incarnate a human being with parts in a generous (holy) sun dynasty. ॥1॥

* Kasyapa Aditi Mahatap Kinha. Tinh kahoon main east dar dinha
Te Dasaratha Kausalya Rupa. Kosalpuri Revealed Male Bhupa ॥2॥

Meaning: – Kashyap and Aditi had done a lot of penance. I have already given them a groom. He has appeared in the form of Dasharatha and Kausalya as the king of men in Sri Ayodhyapuri. ॥2॥
* Go home to the house at night. Raghukul Tilak so, Chariu Bhai
Narada Bachan Truth should do everything. Incarnation with Param Sakti ॥3॥

Bhartarth: – After going to his house, I will incarnate as the best four brothers in Raghukul. I will make all the words of Narada true and will incarnate with my power ॥3॥
* Harihun gross land burnt. Nirbhay Hohu Dev Samudai॥
Gagan Brahmbani Suni Kana. Immediately join the heart ॥4॥

Meaning: – I will take all the weight of the earth. Oh, Goddess! You become fearless. The deity immediately returned after hearing the voice of Brahma (God) in the sky by ear. His heart became cold ॥4॥
* Then Brahma Dharnihi Samuzhava. Abhay Bhai Bharos Jiyon Aava ॥5॥
Bhaarthar: – Then Brahma explained the earth. She too became fearless and got confidence in her life.

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Doha:
* Nij Lokhi Biranchi Gay Devanh Ihai Teach.
Banar Tanudharri Dhar Mahi Hari Pad Se Vahiu ॥187॥
Meaning: – By teaching the Gods that you go to earth and serve the feet of God by keeping the body of apes, Brahma went to his world.

Bunk:
* Gaya Dev Sub Nij Nij Dham. Tell the mind with the land, Bishrama
Which tortoise Ayusu Brahma Dinha. Harshe Dev Bilamb Na Kinha ॥1॥
Meaning: All the gods went to their respective worlds. Everyone, including Earth, got peace of mind. The Gods were very pleased with what Brahma commanded and he did not delay (in doing so) ॥1॥.

* Bancher body is not the same. Unmatched force
Giriru Nakh Ordnance Sub Bira Hari Marag Chitwahin Matidheera ॥2॥

Meaning: – On the earth, he wore a monkey. He had immense strength and great enthusiasm. All were knights, mountains, trees, and nails were their weapons. Those with patient intellect (monkey form) started to see the way for the coming of God ॥2॥

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