भगवान विष्णु का वाहन गरुड़ कौन था, जानिए रहस्य

भगवान विष्णु का वाहन गरुड़ परिचय-

गरुड़ (Garuda)भगवान विष्णु जी का वाहन हैं| गरुड़ (Garuda)को विनायक, गरुत्मत्, तार्क्ष्य, वैनतेय, नागान्तक, विष्णुरथ, खगेश्वर, सुपर्ण तथा पन्नगाशन नाम से भी जाना जाता है| गरुड़ (Garuda) हिन्दू धर्म के साथ ही बौद्ध धर्म में भी महत्वपूर्ण पक्षी माना गया है| बौद्ध ग्रंथों के अनुसार गरुड़ को अच्छे पंख वाला (सुपर्ण) कहा गया है| जातक कथाओं में भी गरूड़ के बारे में अनेको कहानियां हैं|

एक पुराण, ध्वज, घंटी और एक व्रत भी गरुड़ (Garuda) जी के नाम से है| महाभारत में भी गरूड़ ध्वज था| घर में रखे मंदिर में गरुड़ घंटी और मंदिर के शिखर पर आज भी गरुड़ ध्वज होता है| गरुण पुराण में, मृत्यु के पहले और बाद की स्थिति के बारे में,विस्तार से बताया गया है| हिन्दू धर्मानुसार जब किसी के घर में किसी की मौत हो जाती है तो गरूड़ पुराण का पाठ रखा जाता है|

गरुड़ (Garuda) भारत का धार्मिक और अमेरिका का राष्ट्रीय पक्षी है| भारत के इतिहास में स्वर्ण युग के रूप में जाना जाने वाले गुप्त शासकों का प्रतीक चिन्ह गरुड़ ही था| कर्नाटक के होयसल शासकों का भी प्रतीक गरुड़ था| गरुड़ इंडोनेशिया, थाईलैंड और मंगोलिया आदि में भी सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में लोकप्रिय है| इंडोनेसिया का राष्ट्रीय प्रतीक गरुड़ है। वहां की राष्ट्रीय एयरलाइन्स का नाम भी गरुड़ है| इंडोनेशिया की सेनाएं संयुक्त राष्ट्र मिशन पर गरुड़ नाम से जाती है| इंडोनेशिया पहले एक हिन्दू राष्ट्र ही था| थाईलैंड का शाही परिवार आज भी प्रतीक के रूप में गरुड़ का प्रयोग करता है| थाईलैंड के कई बौद्ध मंदिर में गरुड़ की मूर्तियां और चित्र बने हैं| मंगोलिया की राजधानी उलनबटोर का प्रतीक गरुड़ है|

विशालकाय पक्षी  (Garuda) गरुड़-

गरुड़ विशालकाय पक्षी माना जाता है|  प्राचीनकाल में गरूड़ की एक ऐसी प्रजाति थी, जो बुद्धिमान मानी जाती थी| और उसका काम संदेश और व्यक्तियों को इधर से उधर ले जाना होता था| कहते हैं कि, यह इतना विशालकाय पक्षी होता था जो कि अपनी चोंच से हाथी को उठाकर उड़ जाता था| गरूढ़ जैसे ही दो पक्षी रामायण काल में भी थे| जिन्हें जटायु और सम्पाती कहा जाता था। ये दोनों भी दंडकारण्य क्षेत्र में  विचरण करते रहते थे|

पक्षियों में गरुड़ को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। यह समझदार और बुद्धिमान होने के साथ-साथ तेज गति से उड़ने की क्षमता रखता है| गिद्ध और गरुड़ में फर्क होता है| गरुड़ के बारे में पुराणों में अनेक कथाएं मिलती है| रामायण में तो गरुड़ का सबसे महत्वपूर्ण पार्ट है| प्राचीन वैष्णव मंदिरों के द्वार पर एक ओर गरूड़, वही दूसरी ओर हनुमानजी की मूर्ति आवेष्‍ठित की जाती रही है|

 गरूड़ (Garuda) का जन्म-

गरूड़ का जन्म सतयुग में हुआ था| लेकिन वे त्रेता और द्वापर में भी देखे गए थे| दक्ष प्रजापति की विनिता या विनता नामक कन्या का विवाह कश्यप ऋषि के साथ हुआ| विनिता ने प्रसव के दौरान दो अंडे दिए| एक से अरुण का और दूसरे से गरुढ़ का जन्म हुआ| अरुण तो सूर्य के रथ के सारथी बन गए| और गरुड़ ने भगवान विष्णु का वाहन होना स्वीकार किया| सम्पाती और जटायु जी इन्हीं अरुण के पुत्र थे|

सतयुग में गरूड़-

पुराणों कथाओं के अनुसार गरूढ़ ने देवताओं से युद्ध करके उनसे अमृत कलश छीन लिया था| दरअसल, ऋषि कश्यप की कई पत्नियां थीं| जिनमें से वनिता और कद्रू दोनों ही बहने थी| जो एक दूसरे से ईर्ष्या रखती थी| दोनों के ही कोई पुत्र नहीं थे| तो पति कश्यप ने दोनों को पुत्र के लिए एक वरदान दे दिया| वनिता ने दो बलशाली पुत्र मांगे जबकि कद्रू ने हजार सर्प पुत्र रूप में मांगे जो कि अंडे के रूप में जन्म लेने वाले थे|

सर्प होने के कारण कद्रू के हजार बेटे अंडे से उत्पन्न हुए और अपनी मां के कहे अनुसार काम करने लगे| दोनों बहनों में शर्त लग गई थी कि जिसके पुत्र बलशाली होंगे हारने वाले को उसकी दासता स्वीकार करनी होगी| इधर सर्प ने जो जन्म ले लिया था, लेकिन वनिता के अंडों से अभी कोई पुत्र नहीं निकला था| इसी जल्दबाजी में वनिता ने एक अंडे को पकने से पहले ही फोड़ दिया| अंडे से अर्धविकसित बच्चा निकला, जिसका ऊपर का शरीर तो इंसानों जैसा था लेकिन नीचे का शरीर अर्धपक्व था| इसका नाम अरुण था|

अरुण ने अपनी मां से कहा कि ‘पिता के कहने के बाद भी आपने धैर्य खो दिया और मेरे शरीर का विस्तार नहीं होने दिया| इसलिए मैं आपको श्राप देता हूं कि,आपको अपना जीवन एक सेवक के तौर पर बिताना होगा| अगर दूसरे अंडे में से निकला उनका पुत्र उन्हें इस श्राप से मुक्त ना करवा सका तो वह आजीवन दासी बनकर रहेंगी|’

भय से विनता ने दूसरा अंडा नहीं फोड़ा और पुत्र के शाप देने के कारण शर्त हार गई और अपनी छोटी बहन की दासी बनकर रहने लगी| बहुत लंबे काल के बाद दूसरा अंडा फूटा और उसमें से विशालकाय गरुड़ निकला जिसका मुख पक्षी की तरह और बाकी शरीर इंसानों की तरह था| हालांकि उनकी पसलियों से जुड़े उनके विशालकाय पंक्ष भी थे| जब गरुड़ को यह पता चला कि उनकी माता तो उनकी ही बहन की दासी है| और क्यों है? यह भी पता चला, तो उन्होंने अपनी मौसी और सर्पों से इस दासत्व से मुक्ति के लिए उन्होंने शर्त पूछी|

सर्पो ने विनता की दासता की मुक्ति के लिए अमृत मंथन ने निकला अमृत मांग| अमृत लेने के लिए गरुड़ स्वर्ग लोक की तरफ तुरंत निकल पड़े| देवताओं ने अमृत की सुरक्षा के लिए तीन चरणों की सुरक्षा कर रखी थी| पहले चरण में आग की बड़े परदे बिछा रखे थे| दूसरे में घातक हथियारों की आपस में घर्षण करती दीवार थी| और अंत में, दो विषैले सर्पो का पहरा| वहां तक भी पहुंचाने से पहले देवताओं से मुकाबला करना था|

गरुड़ सब से भीड़ गए और देवताओं को बिखेर दिया| तब गरुड़ ने कई नदियों का जल मुख में ले पहले चरण की आग को बुझा दिया| अगले पथ में गरुड़ ने अपना रूप इतना छोटा कर लिया कि, कोई भी हथियार उनका कुछ न बिगाड़ सका| और सांपों को अपने दोनों पंजो में पकड़कर उन्होंने अपने मुंह से अमृत कलश उठा लिया और धरती की ओर चल पड़े|

लेकिन तभी रास्ते में भगवान विष्णु प्रकट हुए और गरुड़ के मुंह में अमृत कलश होने के बाद भी उसके प्रति मन में लालच न होने से खुश होकर गरुड़ को वरदान दिया कि वो आजीवन अमर हो जाएंगे| तब गरुड़ ने भी भगवान को एक वरदान मांगने के लिए बोला तो भगवान ने उन्हें अपनी सवारी बनने का वरदान मांगा| इंद्र ने भी गरुड़ को वरदान दिया की वो सांपों को भोजन रूप में खा सकेगा| इस पर गरुड़ ने भी अमृत सकुशल वापसी का वादा किया|

अंत में गरुड़ ने सर्पों को अमृत सौंप दिया और भूमि पर रख कर कहा कि यह रहा अमृत कलश| मैंने यहां इसे लाने का अपना वादा पूरी किया और अब यह आपके सुपूर्द हुआ| लेकिन इसे पीने से पूर्व आप सभी स्नान करें तो अच्छा होगा| जब वे सभी सर्प स्नान करने गए| तभी वहां अचानक से भगवान इंद्र पहुंचे| और अमृत कलश को वापस ले गए| लेकिन कुछ बूंदे भूमि पर गिर गई, जो घांस पर ठहर गई थी| सर्प उन बूंदों पर झपट पड़े, लेकिन उनके हाथ कुछ न लगा| इस तरह गरुड़ की शर्त भी पूरी हो गई और सर्पों को अमृत भी नहीं मिला|

त्रेता युग में गरूड़-

जब रावण के पुत्र मेघनाथ ने श्रीराम से युद्ध करते हुए श्रीराम को नागपाश से बांध दिया था| तब देवर्षि नारद के कहने पर गरूड़ ने नागपाश के समस्त नागों को खाकर श्रीराम को नागपाश के बंधन से मुक्त कर दिया था| भगवान राम के इस तरह नागपाश में बंध जाने पर श्रीराम के भगवान होने पर गरूड़ को संदेह हो गया था|

गरूड़ का संदेह दूर करने के लिए देवर्षि नारद उन्हें ब्रह्माजी के पास भेज देते हैं| ब्रह्माजी उनको शंकरजी के पास भेज देते हैं| भगवान शंकर ने भी गरूड़ को उनका संदेह मिटाने के लिए काकभुशुण्डिजी नाम के एक कौवे के पास भेज दिया| अंत में काकभुशुण्डिजी ने राम के चरित्र की पवित्र कथा सुनाकर(राम चरित मानस के उत्तरकाण्ड में विस्तार से स्पष्ट कथा वर्णन कर) गरूड़ के संदेह को दूर किया|
लोमश ऋषि के शाप के चलते काकभुशुण्डि कौवा  बन गए थे| लोमश ऋषि ने शाप से मु‍क्त होने के लिए उन्हें राम मंत्र और इच्छामृत्यु का वरदान दिया| कौवे के रूप में ही उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन व्यतीत किया| वाल्मीकि से पहले ही काकभुशुण्डि जी ने रामायण गरूड़ को सुना दी थी| इससे पूर्व हनुमानजी ने संपूर्ण रामायण पाठ लिखकर समुद्र में फेंक दी थी।

द्वापर में गरूड़-

भगवान श्रीकृष्ण को विष्णु का अवतार माना जाता है| विष्णु जी ने ही राम के रूप में अवतार लिया| और विष्णु ने ही श्रीकृष्ण के रूप में| श्रीकृष्ण की 8 पत्नियां थीं- रुक्मणि, जाम्बवंती, सत्यभामा, कालिंदी, मित्रबिंदा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा| इसमें से सत्यभामा को अपनी सुंदरता और महारानी होने का घमंड हो चला था| तो दूसरी ओर सुदर्शन चक्र खुद को सबसे शक्तिशाली समझता था| और विष्णु वाहन गरूड़ को भी अपने सबसे तेज उड़ान भरने का घमंड था|

एक दिन श्रीकृष्ण अपनी द्वारिका में रानी सत्यभामा के साथ सिंहासन पर विराजमान थे| और उनके निकट ही गरूड़ और सुदर्शन चक्र भी उनकी सेवा में विराजमान थे| बातों ही बातों में रानी सत्यभामा ने व्यंग्यपूर्ण लहजे में पूछा- हे प्रभु, आपने त्रेतायुग में राम के रूप में अवतार लिया था, सीता आपकी पत्नी थीं| क्या वे मुझसे भी ज्यादा सुंदर थीं?

भगवान सत्यभामा की बातों का जवाब देते उससे पहले ही गरूड़ ने कहा- भगवान क्या दुनिया में मुझसे भी ज्यादा तेज गति से कोई उड़ सकता है? तभी सुदर्शन से भी रहा नहीं गया और वह भी बोल उठा कि भगवान, मैंने बड़े-बड़े युद्धों में आपको विजयश्री दिलवाई है| क्या संसार में मुझसे भी शक्तिशाली कोई है? द्वारकाधीश समझ गए कि तीनों में अभिमान आ गया है| भगवान मंद-मंद मुस्कुराने लगे और सोचने लगे कि, इनका अहंकार कैसे नष्ट किया जाए, तभी उनको एक युक्ति सूझी…

गरूड़ और भक्तों का अहंकार नष्ट या दूर किया-

भगवान मंद-मंद मुस्कुरा रहे थे| वे जान रहे थे कि उनके इन तीनों भक्तों को अहंकार हो गया है| और इनका अहंकार नष्ट होने का समय आ गया है| ऐसा सोचकर उन्होंने गरूड़ से कहा कि हे गरूड़! तुम हनुमान के पास जाओ और कहना कि भगवान राम, माता सीता के साथ उनकी प्रतीक्षा कर रहे हैं| गरूड़ भगवान की आज्ञा लेकर हनुमान को लाने चले गए|
इधर श्रीकृष्ण ने सत्यभामा से कहा कि देवी, आप सीता के रूप में तैयार हो जाएं| और स्वयं द्वारकाधीश ने राम का रूप धारण कर लिया| तब श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र को आज्ञा देते हुए कहा कि तुम महल के प्रवेश द्वार पर पहरा दो और ध्यान रहे कि मेरी आज्ञा के बिना महल में कोई भी प्रवेश न करने पाए| सुदर्शन चक्र ने कहा, जो आज्ञा भगवान और भगवान की आज्ञा पाकर सुदर्शन चक्र महल के प्रवेश द्वार पर तैनात हो गया|

गरूड़ ने हनुमान के पास पहुंचकर कहा कि हे वानरश्रेष्ठ! भगवान राम, माता सीता के साथ द्वारका में आपसे मिलने के लिए पधारे हैं| आपको बुला लाने की आज्ञा है| आप मेरे साथ चलिए| मैं आपको अपनी पीठ पर बैठाकर शीघ्र ही वहां ले जाऊंगा|

हनुमान ने विनयपूर्वक गरूड़ से कहा, आप चलिए बंधु, मैं आता हूं| गरूड़ ने सोचा, पता नहीं यह बूढ़ा वानर कब पहुंचेगा? खैर मुझे क्या कभी भी पहुंचे, मेरा कार्य तो पूरा हो गया| मैं भगवान के पास चलता हूं| यह सोचकर गरूड़ शीघ्रता से द्वारका की ओर उड़ चले|

लेकिन यह क्या? महल में पहुंचकर गरूड़ देखते हैं कि हनुमान तो उनसे पहले ही महल में प्रभु के सामने बैठे हैं| गरूड़ का सिर लज्जा से झुक गया| तभी श्रीराम के रूप में श्रीकृष्ण ने हनुमान से कहा कि पवनपुत्र तुम बिना आज्ञा के महल में कैसे प्रवेश कर गए? क्या तुम्हें किसी ने प्रवेश द्वार पर रोका नहीं?

हनुमान ने हाथ जोड़ते हुए सिर झुकाकर अपने मुंह से सुदर्शन चक्र को निकालकर प्रभु के सामने रख दिया| हनुमान ने कहा कि प्रभु आपसे मिलने से मुझे क्या कोई रोक सकता है? इस चक्र ने रोकने का तनिक प्रयास किया था| इसलिए इसे मुंह में रख मैं आपसे मिलने आ गया| मुझे क्षमा करें| भगवान मंद-मंद मुस्कुराने लगे|

अंत में हनुमान ने हाथ जोड़ते हुए श्रीराम से प्रश्न किया, हे प्रभु! मैं आपको तो पहचानता हूं आप ही श्रीकृष्ण के रूप में मेरे राम हैं, लेकिन आज आपने माता सीता के स्थान पर किस दासी को इतना सम्मान दे दिया कि वह आपके साथ सिंहासन पर विराजमान है|

अब रानी सत्यभामा का अहंकार भंग होने की बारी थी| उन्हें अपनी सुंदरता का अहंकार था, जो पलभर में चूर हो गया था| रानी सत्यभामा, सुदर्शन चक्र व गरूड़ तीनों का गर्व चूर-चूर हो गया था| वे भगवान की लीला समझ रहे थे| तीनों की आंखों से आंसू बहने लगे और वे भगवान के चरणों में झुक गए| भगवान ने अपने भक्तों के अंहकार को अपने भक्त हनुमान द्वारा ही दूर किया| अद्भुत लीला है प्रभु की|

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Garuda introduction of Lord Vishnu

it is the vehicle of Lord Vishnu. Garuda is also known by the names Vinayaka, Garumatta, Tarkshya, Vantayya, Nagantaka, Vishnurth, Khageswar, Suparna, and Pannagashan. Garuda is considered an important bird in Hinduism as well as Buddhism. According to Buddhist texts, Garuda is said to have good wings (suparna). There are many stories about Garuda in Jataka tales too.

There is also a Purana, flag, bell, and a vow, in the name of Garuda ji. Garuda flag was also there in Mahabharata. The Garuda bell in the temple kept in the house and the Garuda flag are still on the top of the temple. In Garuna Purana, the situation before and after death is explained in detail. According to Hindu religion, when someone dies in someone’s home, the text of Garuda Purana is kept.

Garuda is the religion of India and the national bird of America. it was the insignia of the Gupta rulers known as the Golden Age in the history of India. it was also the symbol of the Hoysala rulers of Karnataka. Garuda is also popular as a cultural symbol in Indonesia, Thailand, and Mongolia, etc. Garuda is the national symbol of Indonesia. The name of the national airlines there is also Garuda. Indonesia’s forces go on a UN mission called Garuda. Indonesia was previously a Hindu nation. The royal family of Thailand still uses Garuda as a symbol. Many Buddhist temples in Thailand have Garuda sculptures and paintings. Garuda is the symbol of Ulaanbaatar, the capital of Mongolia.

Albino eagle

Garuda is considered a giant bird. In ancient times, there was such a species of Garuda, which was considered intelligent. And his job was to carry messages and people from here to there. It is said that it used to be such a giant bird that would fly the elephant with its beak. Just like Garuda, there were two birds in the Ramayana period. Those were called Jatayu and Sampati. Both of these also used to roam in Dandakaranya region.

Garuda is considered the best among birds. It has the ability to fly at a high speed along with being intelligent and intelligent. There is a difference between a vulture and an eagle. Numerous stories are found in Puranas about Garuda. Garuda is the most important part in Ramayana. Garuda has been installed at the entrance of ancient Vaishnava temples on one side, Hanumanji statue on the other side.

Birth of Garuda

Garuda was born in Satyuga. But he was also seen in Treta and Dwapara. Daksha Prajapati’s daughter named Vinita or Vinata was married to Kashyapa Rishi. Vinita laid two eggs during delivery. Arun was born from one and Garuda from the other. Arun then became the charioteer of Surya’s chariot. And Garuda accepted to be the vehicle of Lord Vishnu. Sampati and Jatayu were the sons of these same Arun.

Garuda in the golden age

According to mythology, Garuda fought with the gods and snatched the nectar from them. Actually, Rishi Kashyap had many wives. Out of which both Vanita and Kadru were flowing. Who was jealous of each other. They both had no sons. So husband Kashyap gave both of them a boon for the son. Vanita asked for two powerful sons, while Kadru asked for a thousand serpent sons who were about to be born as eggs.

Due to being a snake, thousands of sons of Kadru were born from eggs and started working according to their mother’s instructions. Both sisters were conditioned that the loser whose son was strong would have to accept his servitude. Here the snake took birth, but no son was left out of Vanita’s eggs. In this haste, Vanita broke an egg before it was cooked. Out of the egg emerged a semi-developed child, whose upper body was like humans but the lower body was semi-mature. Its name was Arun.

Arun told his mother that even after the father said, you lost patience and did not let my body expand. That’s why I curse you, you have to spend your life as a servant. If her son, who came out of the second egg, could not get her free from this curse, she would remain a life-long maid.

Out of fear, Vinata did not boil the second egg, and due to the curse of the son, the condition was lost and she became a maid of her younger sister. After a very long time, the second egg burst and a huge eagle came out of it, whose face was like a bird and the rest of the body was like humans. However, he also had giant wings attached to his ribs. When Garuda comes to know that his mother is his sister’s maid. And why? If it is also found out, he asked his maternal aunt and snake to get rid of this slavery.

Serpo demands Amrit churning for the emancipation of Vinata’s nemesis. To get the nectar, Garuda immediately went towards heaven. The gods had protected three steps to protect the nectar. In the first phase, big screens of fire were laid. In the second, there was a wall of friction between deadly weapons. And finally, guard the two poisonous serpo. Before reaching even there, the gods had to be confronted.

Garuda was crowded by all and scattered the gods. Then Garuda took the waters of many rivers and extinguished the fire of the first phase. In the next path, Garuda reduced his form so much that no weapon could spoil him. And holding the snakes in both his paws, he lifted the nectar from his mouth and walked towards the earth.

But then Lord Vishnu appeared on the way and after the nectar urn in Garuda’s mouth.

Garuda introduction of Lord Vishnu

it is the vehicle of Lord Vishnu. it is also known by the names Vinayaka, Garumatta, Tarkshya, Vantayya, Nagantaka, Vishnurth, Khageswar, Suparna, and Pannagashan. Garuda is considered an important bird in Hinduism as well as Buddhism. According to Buddhist texts, Garuda is said to have good wings (suparna). There are many stories about Garuda in Jataka tales too.

There is also a Purana, flag, bell, and a vow, in the name of Garuda ji. Garuda flag was also there in Mahabharata. The Garuda bell in the temple kept in the house and the Garuda flag is still on the top of the temple. In Garuda Purana, the situation before and after death is explained in detail. According to the Hindu religion, when someone dies in someone’s home, the text of Garuda Purana is kept.

Garuda is the religion of India and the national bird of America. this was the insignia of the Gupta rulers known as the Golden Age in the history of India. it was also the symbol of the Hoysala rulers of Karnataka. it is also popular as a cultural symbol in Indonesia, Thailand, and Mongolia, etc. Garuda is the national symbol of Indonesia. The name of the national airlines there is also Garuda. Indonesia’s forces go on a UN mission called Garuda. Indonesia was previously a Hindu nation. The royal family of Thailand still uses Garuda as a symbol. Many Buddhist temples in Thailand have Garuda sculptures and paintings. Garuda is the symbol of Ulaanbaatar, the capital of Mongolia.

Albino eagle

Garuda is considered a giant bird. In ancient times, there was such a species of Garuda, which was considered intelligent. And his job was to carry messages and people from here to there. It is said that it used to be such a giant bird that would fly the elephant with its beak. Just like Garuda, there were two birds in the Ramayana period. Those were called Jatayu and Sampati. Both of these also used to roam in the Dandakaranya region.

Garuda is considered the best among birds. It has the ability to fly at a high speed along with being intelligent and intelligent. There is a difference between a vulture and an eagle. Numerous stories are found in Puranas about Garuda. Garuda is the most important part in Ramayana. Garuda has been installed at the entrance of ancient Vaishnava temples on one side, Hanumanji statue on the other side.

Birth of Garuda

Garuda was born in Satyuga. But he was also seen in Treta and Dwapara. Daksha Prajapati’s daughter named Vinita or Vinata was married to Kashyapa Rishi. Vinita laid two eggs during delivery. Arun was born from one and Garuda from the other. Arun then became the charioteer of Surya’s chariot. And Garuda accepted to be the vehicle of Lord Vishnu. Sampati and Jatayu were the sons of these same Arun.

Garuda in the golden age

According to mythology, Garuda fought with the gods and snatched the nectar from them. Actually, Rishi Kashyap had many wives. Out of which both Vanita and Kadru were flowing. Who was jealous of each other. They both had no sons. So husband Kashyap gave both of them a boon for the son. Vanita asked for two powerful sons, while Kadru asked for a thousand serpent sons who were about to be born as eggs.

Due to being a snake, thousands of sons of Kadru were born from eggs and started working according to their mother’s instructions. Both sisters were conditioned that the loser whose son was strong would have to accept his servitude. Here the snake took birth, but no son was left out of Vanita’s eggs. In this haste, Vanita broke an egg before it was cooked. Out of the egg emerged a semi-developed child, whose upper body was like humans but the lower body was semi-mature. Its name was Arun.

Arun told his mother that even after the father said, you lost patience and did not let my body expand. That’s why I curse you, you have to spend your life as a servant. If her son, who came out of the second egg, could not get her free from this curse, she would remain a life-long maid.

Out of fear, Vinata did not boil the second egg, and due to the curse of the son, the condition was lost and she became a maid of her younger sister. After a very long time, the second egg burst, and a huge eagle came out of it, whose face was like a bird and the rest of the body was like humans. However, he also had giant wings attached to his ribs. When Garuda comes to know that his mother is his sister’s maid. And why? If it is also found out, he asked his maternal aunt and snake to get rid of this slavery.

Serpo demands Amrit churning for the emancipation of Vinata’s nemesis. To get the nectar, Garuda immediately went towards heaven. The gods had protected three steps to protect the nectar. In the first phase, big screens of fire were laid. In the second, there was a wall of friction between deadly weapons. And finally, guard the two poisonous serpo. Before reaching even there, the gods had to be confronted.

Garuda was crowded by all and scattered the gods. Then Garuda took the waters of many rivers and extinguished the fire of the first phase. In the next path, Garuda reduced his form so much that no weapon could spoil him. And holding the snakes in both his paws, he lifted the nectar from his mouth and walked towards the earth.

But then Lord Vishnu appeared on the way and after the nectar urn in Garuda’s mouth….

Zaad too was happy with no greed in his heart and gave a boon to Garuda that he will become immortal for life. Then Garuda also asked God to ask for a boon, then God asked him a boon to be his ride. Indra also gave a boon to Garuda that he would be able to eat snakes as food. On this, Garuda also promised to return to Amrit safely.

In the end, Garuda handed over the nectar to the snakes and placed it on the ground and said that this is the nectar urn. I fulfilled my promise to bring it here and now it is fulfilled by you. But before you drink it, it would be good if you all take a bath. When they all went to bathe the snake. Then suddenly Lord Indra reached there. And Amrit withdrew the Kalash. But a few drops fell on the ground, which had stayed on the grass. The snake snapped on those drops, but he felt nothing. In this way, the condition of Garuda was also fulfilled and the snakes did not get nectar either.

Garuda in Treta Yuga

When Meghnath, the son of Ravana, fought Sri Rama and tied him with Nagpash. At the behest of Devarshi Narada, Garuda ate all the snakes of Nagpash and freed Ram from the bondage of Nagpash. Garuda suspected of being Lord of Lord Ram when Lord Ram was tied in Nagpash like this.

To remove the doubts of Garuda, Devarshi Narada sends him to Brahma. Brahmaji sends them to Shankaraji. Lord Shankar also sent Garuda to a crow named Kakabhusundji to clear his doubts. In the end, Kakabhushundiji dispelled the suspicion of Garuda by narrating the sacred story of Rama’s character (in detail in the Uttarkhand of Ram Charit Manas).
Due to the curse of Lomash Rishi, Kakabhusundi became a crow. Lomash Rishi gave him the blessings of Rama mantra and euthanasia to be free from the curse. He lived his entire life as a crow. Even before Valmiki, Kakabhusundi Ji narrated the Ramayana to Garuda. Earlier, Hanumanji wrote the entire Ramayana text and threw it into the sea.

Garuda in Dwapar-

Lord Krishna is considered an incarnation of Vishnu. Vishnu was incarnated as Rama. And Vishnu as Sri Krishna. Sri Krishna had 8 wives – Rukmani, Jambavanti, Satyabhama, Kalindi, Mitrabinda, Satya, Bhadra, and Lakshmana. Out of this, Satyabhama was proud of her beauty and empress. On the other hand, Sudarshan Chakra considered himself the most powerful. And the Vishnu vehicle Garuda was also proud of its fastest flight.

One day Sri Krishna was seated on the throne with Queen Satyabhama in his Dwarka. And near him also Garuda and Sudarshan Chakra were seated in his service. In many words, Queen Satyabhama asked sarcastically – Lord, you incarnated as Ram in Tretayuga, Sita was your wife. Was she even more beautiful than me?

Even before answering Lord Satyabhama’s words, Garuda said- Lord, can anyone fly faster than me in the world? Then Sudarshan could not stop himself and he also said that God, I have given you Vijayashree in big wars. Is there anyone stronger than me in the world? Dwarkadhish understood that pride has come in all three. God smiled dimly and started thinking about how to destroy his ego, then he thought of a trick …

The ego of three devotees destroyed or removed

God was smiling dimly. He was knowing that all three of his devotees had arrogance. And the time has come to destroy their ego. Thinking this, he told Garuda, “Oh Garuda!” You go to Hanuman and say that Lord Rama is waiting for him with Mother Sita. Garuda went to fetch Hanuman with the permission of God.

Here Sri Krishna told Satyabhama that Goddess, you should dress up as Sita. And Dwarkadhish himself took the form of Rama. Then Shri Krishna gave the order to the Sudarshan Chakra and said that you guard the entrance of the palace and remember that no one should enter the palace without my permission. Sudarshan Chakra said, who got the order of God and God, Sudarshan Chakra was posted at the entrance of the palace.

Garuda reached Hanuman and said O monkey! Lord Rama has come to meet you in Dwarka with Mother Sita. I am commanded to call you. You go with me I will take you there soon by sitting on my back.

Hanuman modestly said to Garuda, you brothers, I come. Garuda thought, do not know when this old monkey will arrive? Well, whatever you reach me, my work is complete. I walk to God. Thinking that Garuda quickly flew towards Dwarka.

But what is this? Garuda, arriving at the palace, sees that Hanuman is already sitting in front of the Lord in the palace. Garuda‘s head bowed with shame. Then Shri Krishna, in the form of Shri Ram, told Hanuman that Pawanputra how did you enter the palace without permission? Did nobody stop you at the entrance?

Hanuman bowed his head with folded hands and took out the Sudarshan Chakra from his mouth and placed it in front of the Lord. Hanuman said that can anyone stop me from meeting God? This cycle made a lot of effort to stop it. So I put it in my mouth and I came to see you. I’m sorry God began to smile dimly.

Finally, Hanuman folded his arm and asked Sri Ram, Lord! I recognize you as my Lord Krishna, but today you have mother Sita

Which maid gave so much respect to this place that she sits on the throne with you.

Now it was the turn of Queen Satyabhama to break her ego. He had an ego of his beauty, which was destroyed in a moment. Rani Satyabhama, Sudarshan Chakra, and Garuda were proud of all three. They were thinking of God. Tears started flowing from the eyes of the three and they bowed down at the feet of God. God removed the ego of his devotees only through his devotee Hanuman. God is amazing.

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