दान का फल और महत्व क्या है ? जानिए विस्तार पूर्वक

दोस्तो ऐसा हिन्दू धर्म मे माना गया है  की इन्सानो के द्वारा किया गया कोई भी दान का फल उसे ज़रूर मिलता है | श्री मदभागवत गीता मे लिखा है दूसरों की निःस्वार्थ भाव से गई सेवा सदैव आपके जीवन मे फलदायी सिद्ध होती है  इसी सच्ची सेवा भावना के बदले मे दूसरों के मुंह से निकली हुई दुआ प्रार्थना आशीर्वाद आपके लिए स्वर्ग के दरवाजे तक खोल देती है | हिन्दू पुराणों (dharmik kahaniyon) मे कर्मो के बारे में विस्तार से बताया गया है कि इंसान अपनी पूरी ज़िंदगी मे जो भी धर्म कर्म करता है तो उसका फल उसको इस जन्म मे और अगले जन्म मे भी मिलता है अच्छे कर्मो का अच्छा फल बुरे कर्मो का बुरा फल | 

एक बार ऐसे ही  नारद मुनि के मन मे धर्म कर्म से  मिलने वाले परिणामो को लेकर मन मे अलग अलग प्रकार विचार आने लगे |तब वह अपने यह विचार लेकर ब्रम्हा जी के पास जाते है | नारद जी ब्रम्हा जी के सामने अपने विचार प्रकट करते हुए बोलते है – इंसान के द्वारा किए गए दान का फल उसे धरती पर और मरने के बाद किस रूप मे मिलता है ?

तब ब्रम्हा जी , नारद जी के इन सवालो का उत्तर देते हुए बोलते है की -नारद ! जब इंसान बिना किसी लालच भाव से हमेशा के लिए  किसी को कुछ देकर उसकी सहायता  करता है तो इसे दान कहा जाता है | यह दान कई प्रकार के होते है कई रूप मे होते है |

‘दिल से और बिना किसी लोभ के किया गया छोटे से छोटा दान भी उतना ही  पुण्य माना जाता है जितना बड़ी से बड़ी वस्तु का दान’ |

रही बात  इन दान के फल की तो उसका फल(दान का फल) उसे मरने से  पहले और मरने के बाद दोनों अवस्थाओ मे मिलता है |

सबसे पहले यह जान  लो की मरने के बाद कैसे  दान का फल  मिलता है ?

मरने के बाद इंसान की आत्मा को यमलोक के दूत  जिस रास्ते से यमलोक ले जाते है , वह रास्ता बेहद कठिन होता है उस रास्ते पर आत्मा को ठिठुरा देने वाली सर्द हवाए चलती है अब इस मौके पर यदि उस इंसान ने किसी को कोई गरम कपड़े दान दिये होंगे तो उसे भी यहाँ  उसे  इन ठंड हवाओ को झेलने के लिए वैसी ही मदद मिलेगी |

ठीक इसी प्रकार यदि इस इंसान ने किसी भूखे को खाना खिला कर या फिर किसी फकीर को अन्न दान किया होगा तो इसे यहाँ भी भोजन मिल जाएगा | इस प्रकार इन्सान द्वारा किया गया दान उसे मरने के बाद भी मदद के रूप मे रास्ते मे मिलता है |

श्री मदभागवत गीता मे लिखा है इसी प्रकार दूसरों की निःस्वार्थ भाव से गई सेवा सदैव आपके जीवन मे फलदायी सिद्ध होती है  इसी सच्ची सेवा भावना के बदले मे दूसरों के मुंह से निकली हुई दुआ प्रार्थना आशीर्वाद आपके लिए स्वर्ग के दरवाजे तक खोल देती है |

दूसरी तरफ ब्रम्हा जी नारद को इसी पर(दान पर) एक कहानी सुनाते  है –

बहुत समय पहले की बात है की  भगवान शिव की नागरी कही जाने वाली काशी मे एक राजा राज करता था | राजा बड़ा ही धार्मिक स्वभाव का था |

उसे आध्यात्मिक ज्ञान मे बहुत रुचि थी | एक दिन राजा के मन मे सवाल आया की किसी भी इंसान मरने से  तुरंत पहले और बाद मे उसके शरीर के साथ क्या होता है ? क्या सच मे शरीर मे कोई आत्मा होती है ? यदि हाँ तो वो आत्मा कहा जाती है ? क्या होता है आत्मा के साथ ?

अब राजा अपने इन सवालो को अगले दिन अपने दरबार मे उपस्थित सभी लोगो के सामने रखता है | राजा का यह सवाल सुनते ही राज दरबार मे उपस्थित राजा के सभी मंत्री और विद्वान निरुत्तर हो जाते है यानि कोई भी राजा के सवालो सही जवाब नहीं दे पाता |

काफी देर सोच विचार करने के बाद राजा दरबार मे यह ऐलान करते है की मेरे सारे राज्य में यह ढिंढोरा पिटवा दिया जाए कि जो आदमी कब्र में मुरदे के समान लेटकर रात भर कब्र में मरने के बाद होने वाली सभी क्रियाओं के बारे बताएगा, उसे पांच सौ सोने की मोहरें भेंट दी जाएंगी। राजा के आदेशानुसार सारे राज्य में  ढिंढोरा पिटवा दिया गया।

उसी राज्य मे एक बहुत ही कंजूस और लालची इंसान रहता था जो धन के लिए कुछ भी कर सकता था |  ढिंडोरा पीट रहे लोगो  की आवाज़ और बाते जब इस लालची और कंजूस आदमी के कानो मे घुसी तो तुरंत भागता हुआ धन की लालच मे  राजा के पास पहुँच जाता है और बोलता  मैं रात भर  कब्र मे लेटने को तैयार हु |

फिर राजा ने अपने नौकरो को आदेश दिया इस आदमी के लिए अर्थी सजाई जाए | फिर अर्थी  सजाई जाती है | अब सब लोग उस आदमी को लेकर जाया  जाता है |

रास्ते मे एक भिखारी (यह भिखारी उसी कब्र मे लेटने वाले आदमी का दोस्त होता है) उस आदमी का पीछा करने लगता है उस उस आदमी के पास आता है और बोलता है की तुम तो अब मर जाओगे तुम्हारे  पास जो भी धन है मुझे दे दो  अब उस धन का क्या होगा |

बार बार यही बोल कर वह भिखारी आदमी का दिमाग खाए जा रहा था कंजूस के बार बार मना करने पर भी भिखारी  ने उस कंजूस आदमी का पीछा नहीं छोड़ा और बारबार  पैसा मांगने की रट लगाए जा रहा था ।

आखिर कंजूस जब एकदम परेशान हो गया तो उसने कब्रिस्तान में पड़े बादाम के छिलकों के एक ढेर में से मुट्ठी भर छिलके उठाए और उस फकीर को दे दिए। भिखारी वहाँ से चला गया |

दान का प्रभाव या फल

बाद में कंजूस को एक कब्र में एक मुर्दे के साथ  लिटा दिया गया और ऊपर से पूरी कब्र बंद कर दी गई। कब्र मे बस एक छोटा से छेद सिर की तरफ इस आशा के साथ कर दिया गया कि यह इससे सांस लेता रहे और अगली सुबह राजा को मरने के बाद का पूरा हाल सुनाए। सभी लोग कंजूस को उस कब्र में लिटाकर चले गए।

रात होने पर एक सांप कब्र पर आया और छेद देखकर उसमें घुसने का प्रयत्न करने लगा। कब्र मे इस प्रकार की हलचल को देख कंजूस समझ गया की यह तो साप है कंजूस घबरा जाता है |

इधर साप जैसे ही कब्र मे घुसने की कोशिश करता है तो उस कब्र मे बादाम के काफी सारे छिलके साप के रास्ते का एक रुकावट बन कर फस जाते है |

साप अब आगे नहीं बढ़  पाता यानि कब्र के अंदर नहीं घुस पाता | साप  प्रयत्न के बाद जब वापिस चला जाता है तो कंजूस आदमी राहत की सास लेता है |

तभी कंजूस आदमी  यह सोचता है की साप अंदर क्यो नहीं आ सका ? कंजूस आदमी  अपना हाथ से टटोलता है, तो उसे  बादाम के बहुत सारे छिलके फसे हुए मिलते है | उसी समय कंजूस आदमी  का दिमाग चकरा जाता है  इसी छिलको की वजह से आज मेरी जान  बची है शायद यह मेरे उस दान का परिणाम है जो मैंने उस भिखारी को दिये थे|  अब कंजूस आदमी समझ जाता है की दान की वजह से मै बच गया जान है तो जहान है  |

अब सुबह होते ही राजा के सभी नौकर बड़ी जिज्ञासा के साथ कब्रिस्तान आए और जल्दी ही कब्र को खोदकर कंजूस को निकाला। मरने के बाद क्या होता है, यह हाल सुनाने के लिए कंजूस को राजा के पास चलने को कहा। कंजूस ने राजा के नौकरों की बात को अनसुना कर दिया और तुरंत भाग कर फले अपने घर गया और अपना सारा धन निकाल कर सभी गाव के लोगो और भिखारियों मे बाट  देता है | भिखारी की इस हरकत और दयालुता को देख कर सब लोग हैरान थे |

इसके बाद  अंत में कंजूस को राज दरबार में पूरा हाल सुनाने के लिए राजा के सामने पेश किया गया। कंजूस ने बीती रात, सांप व बादाम के छिलकों के संघर्ष की पूरी कहानी कह सुनाई और कहा, ”महाराज, मरने के बाद सबसे ज्यादा दान ही काम आता है, अतः दान करना ही सब धर्मों से श्रेष्ठ है।“

यहाँ हम आपके लिए ऐसी motivational stories लेकर आते है ,जिसे पढ़ने से आपके जीवन मे न सिर्फ एक सकारात्मक बदलाव आता है बल्कि आप अपनी ज़िंदगी मे वो सब कुछ हासिल कर पाते हो जिनकी आपने कल्पना की थी  – जिन कामयाबी की उचाइयों को छूने के सपने आपने अपनी खुली आखों से देखे थे |

यहाँ हम आपके लिए moral stories भी लेकर आते है हर कहानी मे एक सीख जरूर छुपी होती है  जिनसे आपको  बहुत कुछ सीखने को मिलता  है जो आपकी ज़िंदगी मे बहुत काम  आती है |

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Friends, it is believed in Hinduism that any donation made by human beings is definitely a result. Shri Madbhagwat has written in the Gita that the service is done by the selfless spirit of others always proves to be fruitful in your life, in exchange for this true service spirit, the blessing of prayer from the mouth of others opens blessings for you to the door of heaven. In Hindu Puranas (dharmik kahaniyon), it has been explained in detail that whatever religion a person does in his whole life, he gets the fruits of it in this life and also in the next life, the good result of good deeds is the good result of bad deeds. Bad fruit |

Once, in the mind of Narada Muni, different thoughts started coming in the mind regarding the results of religious work. Then he goes to Brahma Ji with his thoughts. Narada Ji expresses his thoughts in front of Bramha Ji – in what form does he get the fruits of human donation on earth and after death?

Then Brahma Ji, answering these questions of Narada Ji, says that – Narada! When a person helps someone by giving them something forever without any greed, it is called charity. These donations are in many forms.

‘The smallest donation made from the heart and without any greed is considered as much as the charity of the greatest thing’.

It is a matter of the fruit of these donations (fruit of charity) that they get both before death and after death.

First of all, know how to get the fruit of charity after death?

After death, the path by which the emissary of Yamlok takes the human soul to Yamlok is very difficult, on that path, the cold winds that blow the soul are stifling, now on this occasion, if that person donated any warm clothes to someone If given, he too will get the same help to withstand these cold winds here.

In the same way, if this person had fed food to a hungry person or donated food to a fakir, it would get food here too. In this way, the donation made by the human being is found on the way as to help even after his death.

Shri Madbhagwat has written in the Gita. Similarly, the service done by others selflessly will always prove to be fruitful in your life. In exchange for this true service spirit, the blessing of prayer from the mouth of others opens blessings for you to the doors of heaven.

On the other hand, Bramha Ji tells Narada a story on this (on charity) –

It was a long time ago that a king used to rule in Kashi called Nagari of Lord Shiva. The king was very religious in nature.

He was very interested in spiritual knowledge. One day a question came in the mind of the king, what happens to his body immediately before and after his death? Is there a soul in the body? If yes, that soul is called? What happens to the soul?

Now the king puts these questions in front of all the people present in his court the next day. On hearing this question of the king, all the ministers and scholars of the king present in the court are silent, that is, no one can give the right answer to the king’s questions.

After pondering for a long time, the king proclaims in the court that in all my kingdom, it should be proclaimed that the man who lies like a dead person in the tomb will tell about all the actions that take place after he dies in the tomb overnight. Hundred gold pieces will be presented. On the orders of the king, the whole state was beaten up.

In the same state lived a very stingy and greedy person who could do anything for money. When the voice and the words of the people who are beating Dhindora entered into the ears of this greedy and stingy man, immediately fleeing to the king in the greed of money and saying, I am ready to lie in the tomb overnight.

Then the king ordered his servants to be decorated for this man. Then the chestnut is decorated. Now everyone is taken with that man.

On the way, a beggar (this beggar is a friend of a man lying in the same grave) starts chasing that man, comes to that man, and says that you will die now, give me whatever money you have. What will happen to that money now?

He was eating the mind of a beggar by saying the same thing again and again, even after the stingy refusal of the stingy beggar, the beggar did not give up the sting of the stingy man and was repeatedly being asked to ask for money.

When the miser became very upset, he picked up a handful of peeled almonds from the cemetery and gave them to the fakir. The beggar left from there.

The miser was later laid in a tomb with a corpse and the entire tomb was closed from above. Just a small hole in the tomb was placed on the head with the hope that it would breathe through it and tell the king the next morning the whole situation after his death. All the people went to bed with the miser in that tomb.

At night, a snake came to the tomb and looking at the hole, tried to enter it. Seeing this kind of movement in the tomb, the miser understood that this is a snake, the miser gets nervous.

Here, as soon as the snake tries to enter the grave, many peels of almonds get trapped in that grave as an obstacle in the path of the snake.

The snake is no longer able to move, that is, it cannot enter inside the grave. When the snake goes back after trying, the stingy man takes a sap of relies Then on the stingy man thinks that why the snake could not come inside? The stingy man fumbles with his hand, so he finds lots of almond peels stuck. At the same time, the miserly man’s mind gets shocked because of this skin, today my life is saved, perhaps it is the result of my donation which I gave to that beggar. Now the stingy person understands that because of charity, I have survived, I have life.

Now in the morning, all the servants of the king came to the cemetery with great curiosity and soon dug out the tomb and took out the miser. To tell what happens after death, the miser is asked to walk to the king. The miser ignored the king’s servants and immediately ran away and went to his house and took out all his money and distributed it to all the villagers and beggars. Everybody was surprised to see this act and kindness of a beggar.

After this, the miser was finally presented to the king to narrate the whole situation in the court of the court. Scrooge told the whole story of the struggle of snakes and almond peels last night and said, “Maharaj, after death, the highest donation comes, so it is better than all religions.”

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19 thoughts on “दान का फल और महत्व क्या है ? जानिए विस्तार पूर्वक”

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