दिवाली क्यों मनाते हैं ? जानिए इस पर्व से जुड़ी 5 रोचक कथाएं

क्यों मनाते हैं दिवाली? जानिए इस पर्व से जुड़ी 5 रोचक कथाएं

दिवाली

दीपावली मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाएं व मान्यताएं हैं। इसी अनुसार देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे मनाने के तरीकों में भी विभिन्नता पाई जाती हैं। 

दीपावली मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाएं व मान्यताएं हैं। इसी अनुसार देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे मनाने के तरीकों में भी विभिन्नता पाई जाती हैं। आइए जानते हैं आखिर दिवाली क्यों मनाई जाती है-

1- भगवान राम अयोध्या लौटे थे
माना जाता है कि जब भगवान राम रावण को हराकर और चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे तो नगरवासियों ने पूरे अयोध्या को रोशनी से सजा दिया और यहां से ही भारतवर्ष में दिवाली के त्योहार का चलन शुरू होना माना जाता है।

2- हिरण्यकश्यप का वध
एक पौराणिक कथा के अनुसार विष्णु ने नरसिंह रूप धारणकर हिरण्यकश्यप का वध किया था। दैत्यराज की मृत्यु पर प्रजा ने घी के दीये जलाकर दिवाली मनाई थी।

3- कृष्ण ने नरकासुर का वध किया
कृष्ण ने अत्याचारी नरकासुर का वध दीपावली के एक दिन पहले चतुर्दशी को किया था। इसी खुशी में अगले दिन अमावस्या को गोकुलवासियों ने दीप जलाकर खुशियां मनाई थीं।

4- शक्ति ने धारण किया महाकाली का रूप  
राक्षसों का वध करने के बाद भी जब महाकाली का क्रोध कम नहीं हुआ तब भगवान शिव स्वयं उनके चरणों में लेट गए। भगवान शिव के शरीर स्पर्श

मात्र से ही देवी महाकाली का क्रोध समाप्त हो गया। इसी की याद में उनके शांत रूप लक्ष्मी की पूजा की शुरुआत हुई। इसी रात इनके रौद्ररूप काली की पूजा का भी विधान है।

5- प्रकट हुए लक्ष्मी, धन्वंतरि व कुबेर 
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार दीपावली के दिन ही माता लक्ष्मी दूध के सागर, जिसे केसर सागर के नाम से जाना जाता है, से उत्पन्न हुई थीं। साथ ही समुद्र मन्थन से आरोग्यदेव धन्वंतरि और भगवान कुबेर भी प्रकट हुए थे।

जो भी कथा हो, ये बात निश्चित है कि दीपक आनंद प्रकट करने के लिए जलाए जाते हैं… खुशियां बांटने का काम करते हैं।
भारतीय संस्कृति में दीपक को सत्य और ज्ञान का द्योतक माना जाता है, क्योंकि वो स्वयं जलता है, पर दूसरों को प्रकाश देता है। दीपक की इसी विशेषता के कारण धार्मिक पुस्तकों में उसे ब्रह्मा स्वरूप माना जाता है।
ये भी कहा जाता है कि ‘दीपदान’ से शारीरिक एवं आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। जहां सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंच सकता है, वहां दीपक का प्रकाश पहुंच जाता है। दीपक को सूर्य का भाग ‘सूर्यांश संभवो दीप:’ कहा जाता है।
धार्मिक पुस्तक ‘स्कंद पुराण’ के अनुसार दीपक का जन्म यज्ञ से हुआ है। यज्ञ देवताओं और मनुष्य के मध्य संवाद साधने का माध्यम है। यज्ञ की अग्नि से जन्मे दीपक पूजा का महत्वपूर्ण भाग है।

क्यों मनाई जाती है छोटी दिवाली अथवा नरक चतुर्दशी? जानिए महत्व |

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क्यों मनाई जाती है छोटी दिवाली अथवा नरक चतुर्दशी? जानिए महत्व |


Why do you celebrate Diwali? Know 5 interesting stories related to this festival

There are many mythological stories and beliefs behind celebrating Deepawali. Accordingly, there are variations in ways of celebrating it in different parts of the country.

There are many mythological stories and beliefs behind celebrating Deepawali. Accordingly, there are variations in ways of celebrating it in different parts of the country. Let’s know why Diwali is celebrated.

1- Lord Ram returned to Ayodhya
It is believed that when Lord Rama returned to Ayodhya after defeating Ravana and completing fourteen years of exile, the townspeople decorated the whole of Ayodhya with lights and it is from here that the festival of Diwali in India is believed to have begun.

2- Slaughter of Hiranyakashyap
According to a legend, Vishnu killed Hiranyakashipu in the form of Narasimha. On the death of the demon king, the people celebrated Diwali by lighting ghee lamps.

3- Krishna killed Narakasura
Krishna killed the tyrannical Narakasura on Chaturdashi a day before Deepawali. In the same joy, on the next day, Gokul residents celebrated the happiness by lighting a lamp on Amavasya.

4- Shakti took the form of Mahakali
Even after slaying the demons, when Lord Shiva’s anger did not subside, Lord Shiva himself lay at his feet. Lord Shiva’s body touch

Goddess Mahakali’s anger ended with just that. The worship of Lakshmi, his quiet form began in memory of this. On the same night, there is also a law for worshiping Kali, his rage.

5- Lakshmi, Dhanvantari and Kubera appeared
According to mythological texts, on the day of Diwali, Mata Lakshmi was born from the ocean of milk, known as Saffron Sea. Also, Arogyadev Dhanvantari and Lord Kubera also appeared from the Samudra Manthan.

Whatever the story, it is certain that the lamps are lit to reveal joy… the act of sharing happiness.

In Indian culture, Deepak is considered a symbol of truth and knowledge, because he burns himself, but gives light to others. Due to this feature of Deepak, it is considered as Brahma form in religious books.

It is also said that ‘Deepdan’ gives physical and spiritual strength. Where the sunlight cannot reach, the light of the lamp reaches. The lamp is called ‘Suryansh Sambhav Deep:’.

According to the religious book ‘Skanda Purana’, Deepak is born with a yagna. Yajna is a medium for communicating between gods and humans. The fire-born lamp is an important part of worship.

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