द्रौपदी स्वयंवर ~ महाभारत The Swayamvara Of Draupadi Story From Mahabharata In Hindi |

The Swayamvara Of Draupadi Story From Mahabharata In Hindi | द्रौपदी स्वयंवर ~ महाभारत

लाक्षागृह से जीवित बच निकलने के पश्चात पाण्डव अपनी माता कुन्ती सहित वहाँ से एकचक्रा नगरी में जाकर मुनि के वेष में एक ब्राह्मण के घर में निवास करने लगे। यहीं पर भीम ने बक नामक राक्षस का वध किया। (द्रौपदी स्वयंवर)
पाण्डवों को एकचक्रा नगरी में रहते कुछ काल व्यतीत हो गया तो एक दिन उनके यहाँ भ्रमण करता हुआ एक ब्राह्मण आया। पाण्डवों ने उसका यथोचित सत्कार करके पूछा- “देव! आपका आगमन कहाँ से हो रहा है?”
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ब्राह्मण ने उत्तर दिया- “मैं महाराज द्रुपद की नगरी पांचाल से आ रहा हूँ। वहाँ पर द्रुपद की कन्या द्रौपदी के स्वयंवर के लिये अनेक देशों के राजा-महाराजा पधारे हुये हैं।” उस ब्राह्मण के प्रस्थान करने के पश्चात पाण्डवों से भेंट करने वेदव्यास आ पहुँचे। वेदव्यास ने पाण्डवों को आदेश दिया कि तुम लोग पांचाल चले जाओ। वहाँ द्रुपद कन्या पांचाली का स्वयंवर होने जा रहा है। वह कन्या तुम लोगों के सर्वथा योग्य है, क्योंकि पूर्वजन्म में उसने भगवान शंकर की तपस्या की थी और उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने उसे अगले जन्म में पाँच उत्तम पति प्राप्त होने का वरदान दिया था। वह देविस्वरूपा बालिका सब भाँति से तुम लोगों के योग्य ही है। तुम लोग वहाँ जाकर उसे प्राप्त करो।” इतना कहकर वेद व्यास वहाँ से चले गये। (द्रौपदी स्वयंवर)
महाभारत की सम्पूर्ण कथा पढ़ें :
पांचाल जाते हुए मार्ग में पाण्डवों की भेंट धौम्य नामक ब्राह्मण से हुई और वे उसके साथ ब्राह्मणों का वेश धर कर द्रुौपदी के स्वयंवर में पहुँचे। स्वयंवर सभा में अनेक देशों के राजा-महाराजा एवं राजकुमार पधारे हुये थे। एक ओर श्रीकृष्ण अपने बड़े भाई बलराम तथा गणमान्य यदुवंशियों के साथ विराजमान थे। वहाँ वे ब्राह्मणों की पंक्ति में जाकर बैठ गये। (द्रौपदी स्वयंवर)
कुछ ही देर में राजकुमारी द्रौपदी हाथ में वरमाला लिये अपने भाई धृष्टद्युम्न के साथ उस सभा में पहुँचीं। धृष्टद्युम्न ने सभा को सम्बोधित करते हुये कहा- “हे विभिन्न देश से पधारे राजा-महाराजाओं एवं अन्य गणमान्य जनों! इस मण्डप में स्तम्भ के ऊपर बने हुए उस घूमते हुये यंत्र पर ध्यान दीजिये। उस यन्त्र में एक मछली लटकी हुई है तथा यंत्र के साथ घूम रही है। आपको स्तम्भ के नीचे रखे हुए तैलपात्र में मछली के प्रतिबिम्ब को देखते हुए बाण चलाकर मछली के नेत्र को लक्ष्य बनाना है। मछली के नेत्र का सफल भेदन करने वाले से मेरी बहन द्रौपदी का विवाह होगा।” (द्रौपदी स्वयंवर)
एक के बाद एक सभी राजा-महाराजा एवं राजकुमारों ने मछली पर निशाना साधने का प्रयास किया, किन्तु सफलता हाथ न लगी और वे कान्तिहीन होकर अपने स्थान में लौट आये। (द्रौपदी स्वयंवर)
इन असफल लोगों में जरासंध, शल्य, शिशुपाल तथा दुर्योधन, दुःशासन आदि कौरव भी सम्मिलित थे। कौरवों के असफल होने पर दुर्योधन के परम मित्र कर्ण ने मछली को निशाना बनाने के लिये धनुष उठाया, किन्तु उन्हें देखकर द्रौपदी बोल उठीं- “यह सूतपुत्र है, इसलिये मैं इसका वरण नहीं कर सकती।” (द्रौपदी स्वयंवर)
द्रौपदी के वचनों को सुनकर कर्ण ने लज्जित होकर धनुष बाण रख दिया। उसके पश्चात ब्राह्मणों की पंक्ति से उठकर अर्जुन ने निशाना लगाने के लिये धनुष उठा लिया। एक ब्राह्मण को राजकुमारी के स्वयंवर के लिये उद्यत देख वहाँ उपस्थित जनों को अत्यन्त आश्चर्य हुआ, किन्तु ब्राह्मणों के क्षत्रियों से अधिक श्रेष्ठ होने के कारण से उन्हें कोई रोक न सका। (द्रौपदी स्वयंवर)
अर्जुन ने तैलपात्र में मछली के प्रतिबिम्ब को देखते हुए एक ही बाण से मछली के नेत्र को भेद दिया। द्रौपदी ने आगे बढ़कर अर्जुन के गले में वरमाला डाल दी। एक ब्राह्मण के गले में द्रौपदी को वरमाला डालते देख समस्त क्षत्रिय राजा-महाराजा एवं राजकुमारों ने क्रोधित होकर अर्जुन पर आक्रमण कर दिया। अर्जुन की सहायता के लिये शेष पाण्डव भी आ गये और पाण्डवों तथा क्षत्रिय राजाओं में घमासान युद्ध होने लगा। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को पहले ही पहचान लिया था, इसलिये उन्होंने बीच-बचाव करके युद्ध को शान्त करा दिया। दुर्योधन ने भी अनुमान लगा लिया कि निशाना लगाने वाला अर्जुन ही रहा होगा और उसका साथ देने वाले शेष पाण्डव रहे होंगे। वारणावत के लाक्षागृह से पाण्डवों के बच निकलने पर उसे अत्यन्त आश्चर्य होने लगा।
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The Swayamvara Of Draupadi Story From Mahabharata In Hindi | Draupadi Swayamvara ~ Mahabharata

After escaping alive from Lakshagriha, the Pandavas, along with their mother Kunti, went to Ekachakra town from there and started living in a Brahmin’s house under the guise of Muni. It is here that Bhima killed a demon named Buck.

When the Pandavas had spent some time living in the city of Ekchakra, one day a Brahmin came to visit them. The Pandavas treated him appropriately and asked- “Dev! Where are you coming from?”

The Brahmin replied – “I am coming from Panchal, the city of Maharaja Drupada. There have been King-Maharaja of many countries for Draupadi’s daughter, Draupadi’s daughter.” After the departure of that Brahmin, Ved Vyas arrived to meet the Pandavas. Ved Vyas ordered the Pandavas that you people go to Panchal. There Drupada is going to be the swayamvara of the girl Panchali. That girl is absolutely worthy of you, because the previous birth. I did penance of Lord Shankar and pleased with his penance, Shiva gave him the boon of having five good husbands in the next life. That devaswaroopa girl is worthy of you all the way. You go there and get her . ” After saying this, Ved Vyas left from there.

Read the complete story of Mahabharata:

Complete story of Mahabharata! Complete Mahabharata Story In Hindi

On the way to Panchal, the Pandavas met a Brahmin named Dhaumya and disguised as a Brahmin with him and reached the Swayamvara of Draupadi. In the Swayamvara Sabha, kings and emperors of many countries were present. On one hand, Shri Krishna was seated with his elder brother Balarama and distinguished Yaduvanshis. There he went and sat in the row of Brahmins.

Shortly after, Princess Draupadi arrived at the meeting with her brother Dhritadhyumna with a garland in her hand. Addressing the gathering, Dhrishtadyum said – “O kings and emperors and other dignitaries who have come from different countries! In this pavilion, pay attention to the rotating machine made above the pillar. A fish is hanging in that machine and the machine Moving along. You have to aim the eye of the fish by moving the arrow while looking at the image of the fish in the oilplate placed under the column. My sister Draupadi will be married to a successful piercing of the fish eye. ”

One after the other, all the kings and princes tried to target the fish, but success did not materialize and they returned to their places without any trouble.

These unsuccessful people included Jarasandha, Shalya, Shishupala and Duryodhana, Kauravas etc. When the Kauravas failed, Karna, the best friend of Duryodhana, raised the bow to target the fish, but Draupadi said looking at them – “This is a thread, so I cannot recite it.”

Hearing Draupadi’s words, Karna was ashamed and put a bow arrow. After that Arjuna rose from the line of Brahmins and lifted the bow to aim. Seeing a Brahmin eager for the princess’s swayamvara, the people present there were very surprised, but due to the Brahmins being superior to the Kshatriyas, no one could stop them.

Seeing the image of the fish in the oil tank, Arjuna pierced the eye of the fish with a single arrow. Draupadi went ahead and put varmala on Arjun’s neck. Seeing Draupadi putting a garland on the neck of a Brahmin, all the Kshatriya kings-Maharajas and princes got angry and attacked Arjuna. The remaining Pandavas also came to Arjuna’s help and a fierce battle ensued between the Pandavas and the Kshatriya kings. Sri Krishna had already recognized Arjuna, so he intervened to calm the war. Duryodhana also guessed that the target Arjun must have been the one and the remaining Pandavas supporting him. He was very surprised when Pandavas escaped from Lakshagraha of Varanavat.

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