कर्ण-दुर्योधन के मित्रता की कथा ~ महाभारत Friendship Of Karna & Duryodhana Story Mahabharat |

Friendship Of Karna & Duryodhana Story Mahabharat | कर्ण-दुर्योधन के मित्रता की कथा ~ महाभारत

कर्ण और दुर्योधन की मित्रता का उल्लेख महाभारत में मिलता है। कर्ण दुर्योधन के आश्रय में रहता था। गुरु द्रोणाचार्य ने अपने शिष्यों की शिक्षा पूर्ण होने पर हस्तिनापुर में एक रंगभूमि का आयोजन करवाया। ( कर्ण-दुर्योधन की मित्रता की कथा )

धार्मिक कहानियाँ social media बड़ी सोच motivational success story

महाभारत की सम्पूर्ण कथा! Complete Mahabharata Story In Hindi

Quora क्या है और इसका इस्तेमाल कैसे करें? हिंदी जानकारी

friend अच्छा मित्र कौन ? जानिए विस्तार से |

best Motivational Quote of all time प्रेरणादायक विचार

champion के निर्णय कुछ ऐसे होते है | जो उसे success बनाते है |

श्रीरामचरितमानस बालकाण्ड भावार्थ सहित पढ़े |

blood donate रक्तदान महादान या सबसे बड़ा दान है | जानिए कैसे ?

कैसे बने champion ( चैम्पियन ) दौलत के खेल में

friendship क्यो जरूरी ? जानिए विस्तार पूर्वक |

success define सफलता की परिभाषा जानिए ?

सम्पूर्ण Durga Saptashati

Google search engine क्या है ? जानिए विस्तार पूर्वक

इस तरीके से प्रचार promotion करोगे तो कामयाबी चूमेगी आपके क़दम

Quality of life “आदते” आपके जीवन की quality तय करती है |

सफलता (success) की राह

माँ तुझे बार – बार सादर प्रणाम | happy mothers day

फेसबुक (Facebook) क्या है ?जानिए |

अमीरों के रास्ते

parents ही बच्चो को काबिल बनाये कैसे?

history of cricket में पहला टॉस, पहला रन और पहला शतक, किसने, कब, कहाँ बनाया था?

भगवान विष्णु के 24 अवतार कौन से हैं, जानिए | Lord Vishnu avatars

friends अधिक हो या न हो friendship मित्रता लाजवाब होनी चाहिए |

जानिए,आप महत्वपूर्ण बन रहे है,अथवा महत्वहीन |

success rules सफलता आन्तरिक नियमो से मिलती है |

decision making निर्णय लेने की क्षमता के अद्भभुद फायदें |

भगवान विष्णु का वाहन गरुड़ कौन था, जानिए रहस्य

blood donation camp लोगो को नया जीवन दान देते है | कैसे ?

वैचारिक जहर से बचो विकास करो|

habits of successful people. आदते आपका भविष्य तय करती है |

business standard को सफल बनाने के 10 Golden tips

कैसे हुआ जन्म और मृत्यु से परे भगवान शिव का अवतरण

26 November विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं |

सौभाग्यशाली कैसे बने ?

असफलता से बचने के Five point.

success formula आपको पहुंचाएगा सफलता के शिखर पर |

रंगभूमि में अर्जुन विशेष धनुर्विद्या युक्त शिष्य प्रमाणित हुआ। तभी कर्ण रंगभूमी में आया और अर्जुन द्वारा किये गए करतबों को पार करके उसे द्वंद्वयुद्ध के लिए ललकारा। तब कृपाचार्य ने कर्ण के द्वंद्वयुद्ध को अस्वीकृत कर दिया और उससे उसके वंश और साम्राज्य के विषय में पूछा, क्योंकि द्वंद्वयुद्ध के नियमों के अनुसार केवल एक राजकुमार ही अर्जुन को, जो हस्तिनापुर का राजकुमार था, द्वंद्वयुद्ध के लिए ललकार सकता था। तब कौरवों मे सबसे ज्येष्ठ दुर्योधन ने कर्ण को अंगराज घोषित किया, जिससे वह अर्जुन से द्वंदयुद्ध के योग्य हो जाए। ( कर्ण-दुर्योधन की मित्रता की कथा )

जब कर्ण ने दुर्योधन से पूछा कि वह उससे इसके बदले में क्या चाहता है, तब दुर्योधन ने कहा कि वह केवल यही चाहता है कि कर्ण उसका मित्र बन जाए। ( कर्ण-दुर्योधन की मित्रता की कथा )

महाभारत की सम्पूर्ण कथा पढ़ें :

हर जानकारी अपनी भाषा हिंदी में सरल शब्दों में प्राप्त करने के लिए  हमारे फेसबुक पेज को लाइक करे जहाँ आपको सही बात पूरी जानकारी के साथ प्रदान की जाती है | हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहाँ क्लिक करें |


Friendship of Karna & Duryodhana Story Mahabharat | The story of the friendship of Karna-Duryodhana ~ Mahabharata

The friendship of Karna and Duryodhana is mentioned in the Mahabharata. Karna lived in the shelter of Duryodhana. Guru Dronacharya organized a Rangbhoomi in Hastinapur on completion of the education of his disciples.

In Rangbhoomi, Arjuna became a disciple with special archery. Then Karna came to Rangbhoomi and crossed the tricks done by Arjuna and challenged him to a duel. Kripacharya then disapproved of Karna’s duel and asked him about his dynasty and empire, because according to the rules of the duel, only a prince could dare Arjuna, the prince of Hastinapur, for a duel. Then Duryodhana, the eldest of the Kauravas, declared Karna as Angaraja, making him eligible for a duel with Arjuna.

When Karna asks Duryodhana what he wants from him in return, Duryodhana says that he only wants Karna to be his friend.

Read the complete story of Mahabharata:

Complete story of Mahabharata! Complete Mahabharata Story In Hindi

After this incident, some of the main relations of the Mahabharata were established, such as strong friendship between Duryodhana and Karna, intense rivalry between Karna and Arjuna, and disharmony between the Pandavas and Karna. Karna was a loyal and true friend of Duryodhana. Although he later participated in Dutikrida to appease Duryodhana, he was against it from the beginning.

Karna did not like Shakuni and always recommended Duryodhana to use his fighting skills and muscle to defeat his enemies and not devious tricks. When Duryodhana’s attempt to kill the Pandavas at the Lakshgriha fails, Karna scolds Duryodhana for his cowardice and says that all the tricks of the cowards fail. He explains to his friend Duryodhana that he should act like a warrior and get whatever he wants, by his valor.

Karna also assisted Duryodhana in marrying the princess of Chitrangad. Duryodhana was rejected by the princess at Swayamvara and then Duryodhana took him by force. Then the other kings present there followed him, but Karna single-handedly defeated them all. The defeated kings were Jarasandha, Shishupala, Dantavakra, Salva, and Rukmi etc. Jarsandha gave Karna a portion of Magadha as a compliment to Karna. Bhima later defeated Jarasandha with the help of Sri Krishna, but long before that Karna defeated him alone. Karna had revealed the weakness of Jarasandha that his death can only be done by splitting his torso into two pieces.


1 thought on “कर्ण-दुर्योधन के मित्रता की कथा ~ महाभारत Friendship Of Karna & Duryodhana Story Mahabharat |”

Leave a Comment

%d bloggers like this: