महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाये , जानिए शिवरात्रि व्रत कथा की महिमा और महत्व.

महाशिवरात्रि  कब और क्यों मनाई जाती है? जानिए शिवरात्रि व्रत कथा की महिमा और महत्व.

महाशिवरात्रि हिंदू समुदाय के सबसे पावन त्योहारों में से एक है। यह हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है। इस साल महाशिवरात्रि 11 मार्च गुरुवार को है। इसे भगवान शिव और माता शक्ति के मिलन की रात माना जाता है।

क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि?

यह मान्यता समुद्र मंथन से जुड़ी है। भागवत पुराण के अनुसार, समुद्र मंथन के समय हलाहल विष निकला। उसकी ज्वाला तीनों लोकों में फैल गई। सभी देवता, ऋषि-मुनि भगवान शिव के पास मदद के लिए गए। भोलेनाथ ने जन कल्याण के लिए उस विष को पी लिया। इसके बाद से ही उन्हें नीलकंठ कहा जाने लगा। इस बड़ी विपदा के टलने के बाद सभी देवों ने रात भर शिव का गुणगान किया। वह महान रात्रि ही शिवरात्रि के नाम से जानी गई।

महाशिवरात्रि हिंदू समुदाय के सबसे पावन त्योहारों में से एक है। यह हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है। इस साल महाशिवरात्रि 11 मार्च गुरुवार को है। इसे भगवान शिव और माता शक्ति के मिलन की रात माना जाता है। आध्यात्मिक रूप से कहा जाता है कि यह प्रकृति और पुरुष के मिलन की रात है। इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की कृपा का पात्र बनते हैं। महाशिवरात्रि पर शिव मंदिरों में दिनभर जलाभिषेक होता है।

महाशिवरात्रि पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ पहली बार प्रकट हुए थे। उनका उद्भव ज्योतिर्लिंग यानी अग्नि के शिवलिंग के रूप में था। ऐसा शिवलिंग जिसका न तो आदि था और न अंत। बताया जाता है कि इस रहस्य का पता लगाने के लिए ब्रह्माजी हंस के रूप में शिवलिंग के सबसे ऊपरी भाग को देखने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। वह कभी शिवलिंग के सबसे ऊपरी भाग तक पहुंच ही नहीं पाए। दूसरी ओर भगवान विष्णु भी वराह का रूप लेकर शिवलिंग के आधार ढूंढ रहे थे लेकिन वह असफल रहे।

महाशिवरात्रि से जुड़ी एक और कथा है। माना जाता है कि इस दिन ही 64 अलग-अलग जगहों पर शिवलिंग प्रकट हुए थे। हालांकि, इनमें सिर्फ 12 जगह का नाम पता है, जिन्हें 12 ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। महाशिवरात्रि के दिन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में लोग दीपस्तंभ लगाते हैं, ताकि लोग शिवजी के अग्नि वाले अनंत लिंग की महिमा जान सके।

महाशिवरात्रि को पूरी रात शिवभक्त अपने आराध्य का गुणगान करते हैं। मान्यता है कि महाशिवरात्रि को शिवजी के साथ शक्ति की शादी हुई थी। इसी दिन शिवजी ने वैराग्य जीवन छोड़कर गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया था। इसलिए महाशिवरात्रि की रात में शंकरजी की बारात निकाली जाती है। रात में पूजा कर फलाहार किया जाता है। अगले दिन सवेरे जौ, तिल, खीर और बेल पत्र का हवन करके व्रत समाप्त किया जाता है।

शिव पञ्चाक्षरि स्तोत्रम्
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांगरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै न काराय नम: शिवाय ॥1॥

मन्दाकिनी सलिल चन्दन चर्चिताय नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय।
मन्दारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मै म काराय नम: शिवाय ॥2॥

शिवाय गौरी वदनाब्ज वृन्द सूर्याय दक्षाध्वर नाशकाय।
श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै शि काराय नम: शिवाय ॥3॥

वसिष्ठ कुम्भोद्भव गौतमार्य मुनीन्द्रदे वार्चित शेखराय।
चन्द्रार्क वैश्वानरलोचनाय तस्मै व काराय नम: शिवाय ॥4॥

यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै य काराय नम: शिवाय ॥5॥

फल श्रुति

पंचाक्षरमिदं पुण्यं य: पठेत शिव सन्निधौ।
शिवलोकम अवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥6॥

श्री शिव गायत्री मंत्र

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात।

महाशिवरात्रि

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