Shri Krishna Puja in Shravan 2023 श्रीकृष्ण की पूजा श्रावण मास में क्यों होती है , जानिए 4 रोचक बातें

Shri Krishna Puja in Shravan – आषाढ़ मास की देवशयनी एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ हो चुके हैं. चातुर्मास के चार माह में श्रावण, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक माह आएंगे. सावन की शुरुआत 4 जुलाई 2023 से हो रही है. सावन में भगवान शिव की आराधना पूरे भक्ति भाव से की जाती है. इस माह से शिव जी के साथ भगवान श्रीकृष्ण का भी खास संबंध है. इस दौरान भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना के साथ कान्हा की भी आराधना की जाए तो दोगुना फल प्राप्त होता है. आइए जानते हैं सावन से भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी खास बातें.

Shri Krishna Puja in Shravan 2023

सावन की शुरुआत 4 जुलाई 2023 से हो रही है. इस माह से शिव जी के साथ भगवान श्रीकृष्ण का भी खास संबंध है. जानते हैं सावन में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी खास बातें.

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आओ जानते हैं 4 रोचक बातें श्रीकृष्ण की पूजा श्रावण मास में क्यों होती है

हिन्दू कैलेंडर अनुसार श्रावण और भाद्रपद ‘वर्षा ऋतु’ के मास हैं। इस माह में वर्षा नया जीवन लेकर आती है। इस माह से ही चातुर्मास लगता है। खासकर यह संपूर्ण माह भगवान शिव का माह माना जाता है लेकिन इस मास का संबंध श्रीकृष्ण से भी है। आओ जानते हैं 4 रोचक बातें।

1. एक माह तक होती है श्रीकृष्ण पूजा : 

श्रावण कृष्ण पक्ष की अष्टमी से भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी अर्थात श्रीकृष्ण जन्माष्टमी तक एक महीने तक श्रीकृष्ण आराधना की जाती है। कहते हैं कि जो इस दौरान कृष्ण आराधना करता है उसे मोक्ष प्राप्त होता है। कहते हैं कि इस मास में भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न रहते हैं और मनचाहे वर देते हैं।

2. कृष्ण मंदिरों में सावन उत्सव :

जिस तरह शिव के शिवालयों को श्रावण मास में अच्छे से सजाकर भगवान शिव की पूजा आराधना की जाती है उसी तरह दुनियाभर के कृष्ण मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और आराधाना धूमधाम से की जाती है। यह संपूर्ण माह कृष्ण की लीलाओं से जुड़ा हुआ माह माना जाता है।

3. द्वारिकाधीश की पूजा :

मान्यता है कि इस श्रावण मास में द्वारकाधीश की उपासना करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। उपासक को आरोग्य का वरदान मिलता है और समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

4. ब्रज मंडल में सावन उत्सव : श्रीकृष्ण की पूजा

*ब्रज मंडल में धूम :

श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा, गोकुल, बरसाना और वृंदावन में सावन उत्सव का आयोजन होता है। ब्रज मंहल के इस सावन उत्सव को कृष्ण जन्माअष्टमी तक विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है। जैसे इन उत्सवों में हिंडोले में झूला, घटाएं, रासलीला और गौरांगलीला का आयोजन होता हैं।

*हिंडोला :

यहां श्रावण मास के कृष्णपक्ष से मंदिर में दो चांदी के और एक सोने का हिंडोला डाला जाता है। इन हिंडोलों में भगवान कृष्ण को झुलाया जाता है। इस माह में अधिकतर जगह पर श्रीकृष्ण के बाल रूप की पूजा की जाती है। इसमें हिंडोला सजाने और बालमुकुंद को झूला झूलाने की परंपरा है।

*हरियाली तीज :

 ब्रज मंडल में खासकर वृंदावन में हरियाली तीज की धूम होती है। यहां के प्राचीन राधावल्लभ मंदिर में हरियाली तीज से रक्षाबंधन तक चांदी, केले, फूल व पत्ती आदि के हिंडोले डाले जाते हैं तथा पवित्रा एकादशी पर ठाकुरजी पवित्रा धारण करते हैं। हरियाली तीज से पंचमी तक ठाकुरजी स्वर्ण हिंडोले में और उसके बाद पूर्णिमा तक चांदी, जड़ाऊ, फूलपत्ती आदि के हिंडोले में झूलते हैं।

*कृष्‍ण के साथ बलराम भी झूलते हैं : 

ब्रज मंडल के अन्य मंदिरों में जहां हिंडोले में कृष्ण झूलते हैं वहीं ब्रज में एक ऐसा मंदिर है, जहां पूरे श्रावण मास में हिंडोले में कृष्ण के साथ बलराम भी झूलते हैं। दाऊजी मंदिर बल्देव एवं गिरिराज मुखारबिन्द मंदिर जतीपुरा में हिंडोले में ठाकुरजी की प्रतिमा के प्रतिबिम्ब को झुलाया जाता है।

*घटा उत्सव : 

सावन मास में ब्रजमंडल में सावन उत्सव के अलावा घटा महोत्सव का भी आयोजन होता है जिसमें विभिन्न रंग की आकर्षक घटा में कान्हा की लीलाओं का प्रस्तुतीकरण होता है। मंदिरों की कालीघटा देखने के लिए लाखों लोग इन मंदिरों में आते हैं।

*रासलीला : 

इस माह को प्रेम और नव जीवन का माह भी कहा जाता है। मोर के पांव में नृत्य बंध जाता है। संपूर्ण सृष्टि नृत्य करने लगती हैं। वसंत के बाद श्रीकृष्ण इसी माह में रास रचाते हैं। ब्रजमंडल में श्रावण मास में मनायी जाने वाली रासलीला कम आकर्षक नहीं होती है। वृन्दावन का प्रमुख आकर्षण विश्वप्रसिद्ध रासाचार्यो द्वारा रासलीला प्रस्तुत की जाती है। जिनमें कृष्ण लीलाओं का जीवन्त प्रस्तुतीकरण होता है।

सावन में श्रीकृष्ण से जुड़ी खास बातें:

  • धर्म ग्रंथों के अनुसार श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी से भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी यानी की एक महीने तक श्रीकृष्ण की पूजा का विधान है. मान्यता है कि भोदों की कृष्ण जन्माष्टमी तक कान्हा की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.
  • भगवान विष्णु के 8वें और सबसे लोकप्रिय अवतार भगवान श्रीकृष्ण को माना जाता है. चातुर्मास को तप औऱ साधना का प्रतीक माना जाता है. ऐसे में सावन से लेकर भादो के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तक भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए हरे राम हरे कृष्ण हरे मंत्र का जाप करना चाहिए.
  • श्रीकृष्ण के इस मंत्र में जातक को मन को नियंत्रित करने की क्षमता है. सावन में कान्हा के इस मंत्र जाप से मनासिक तौर पर शांति मिलती है. जीवन मरण के च्रक से मुक्ति दिलाने में ये मंत्र बहुत फलयादी साबित होता है.
  • सावन में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा द्वारकाधीश के रूप में की जाती है.  मान्यता के अनुसार मथुरा में जन्में भगवान कृष्ण ने बसने के लिए द्वारका नगरी को चुना था. सावन में इनकी आराधना से  आरोग्य का वरदान मिलात है.
  • ग्रंथों के अनुसार वसंत के बाद श्रीकृष्ण इसी माह में रास रचाते हैं. विशेष तौर पर भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा, गोकुल, बरसाना और वृंदावन में सावन उत्सव को कृष्म जन्माअष्टमी तक धूमधाम से मनाया जाता है.

सावन में श्रीकृष्ण को राशि अनुसार मंत्र जाप से करें प्रसन्न

  • मेष राशि – ऊॅं विश्वरूपाय नम:
  • वृषभ राशि – ऊॅं उपेन्द्र नम:
  • मिथुन राशि – ऊॅं अनंताय नम:
  • कर्क राशि – ऊॅं दयानिधि नम:
  • सिंह राशि – ऊॅं ज्योतिरादित्याय नम:
  • कन्या राशि – ऊॅं अनिरुद्धाय नम:
  • तुला राशि – ऊॅं हिरण्यगर्भाय नम:
  • वृश्चिक राशि – ऊॅं अच्युताय नम:
  • धनु राशि – ऊॅं जगतगुरवे नम:
  • मकर राशि – ऊॅं अजयाय नम:
  • कुंभ राशि – ऊॅं अनादिय नम:
  • मीन राशि – ऊॅं जगन्नाथाय नम:

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