क्यों मनाई जाती है छोटी दिवाली अथवा नरक चतुर्दशी? जानिए महत्व |

क्यों मनाई जाती है छोटी दिवाली अथवा नरक चतुर्दशी ?

कथा 1: भगवान कृष्ण ने किया था नरकासुर का वध
छोटी दिवाली अथवा नरक चतुर्दशी का त्योहार मनाने के पीछे कई सारी कथाएं हैं और इन्हीं कथाओं में से एक कथा भगवान कृष्ण और नरकासुर की है
हमारे पुराणों के मुताबिक नरकासुर धरती माता का पुत्र हुआ करता था और उसने धरती पर आंतक मचा रखा था. भगवान इंद्र ने भगवान विष्णु से इस दानव से लोगों की रक्षा करने की गुहार की थी और भगवान विष्णु ने इंद्र देव को वादा किया था कि वो कृष्ण का अवतार लेकर इसका वध करेंगे.
वहीं जब विष्णु भगवान ने धरती पर कृष्ण जी के रुप में अवतार लिया था, तो उन्होंने अपना वादा पूरा करते हुए इसका वध कर दिया था और इसकी कैद से हजारों महिलाओं को रिहा करवाया था. वहीं इन महिलाओं को समाज में सम्मान दिलवाने के लिए कृष्ण जी ने इन सबसे नरक चतुर्दशी के दिन विवाह कर लिया था, जिसके बाद लोगों ने इस दिन अपने घरों में दीए जलाए थे.
कथा 2: कृष्ण जी की पत्नी के हाथों हुई थी नरकासुर की हत्या
ऊपर बताई गई कथा के अलावा नरकासुर के वध से एक और कथा जुड़ी हुई  है और कहा जाता है कि नराकसुर को  ब्रह्मा जी से वरदान मिला था, कि उसका वध केवल एक महिला के हाथों ही हो सकता है. जिसके कारण इसका वध कृष्ण जी ने अपनी पत्नी सत्यभामा के हाथों से करवाया था.

कथा 3: मां काली ने मारा था नरकासुर को
एक और कथा के अनुसार इस दानव का वध मां काली के हाथों किया गया था और इसलिए इस दिन को काली चौदस के रुप में पश्चिम बंगाल के लोगों द्वारा मनाया जाता है.

कथा 4: स्वर्ग में मिलती है जगह
मान्यता के अनुसार रतिदेव नामक एक राजा हुआ करता था, जो कि काफी पुण्य  का कार्य किया करता था. वहीं एक दिन इस राजा को नर्क में ले जाने के लिए यमराज इनके पास आए. वहीं यमराज द्वारा नर्क में ले जाने की बात जब रंतिदेव को पता चली, तो वो हैरान हो गए और राजा ने यमराज से कहा, कि उन्होंने कभी भी कोई गलत कार्य नहीं किया है, तो फिर उन्हें नर्क में क्यों भेजा जा रहा है.

वहीं रंतिदेव राजा के इस प्रश्न के उत्तर में यमराज ने उनसे कहा, कि एक बार उन्हें अपने घर से एक भूखे पुजारी को खाली पेट भेज दिया था, जिसके कारण वो नर्क में जाएंगे. हालांकि रंतिदेव ने यमराज जी से एक और जिंदगी मांगने की गुहार लगाई और यमराज ने इनकी ये गुहार मान ली और उन्हें जीवन दान दे दिया. जीवनदान मिलने के बाद महाराज साधु संत से मिले और उनसे नर्क ना जाने से जुड़ा हुआ उपाय मांगा. वहीं सांधू संत ने महाराजा को नरक चतुर्दशी के दिन उपवास रखने और भूखे पुजारी को खाना खिलाने की सलाह दी थी, ताकि वो नर्क में जाने से बच सकें.

क्यों कहा जाता है इसे नरक चतुर्दशी ?

भगवान ने जिस दिन नरकासुर का वध किया था उस दिन चतुर्दशी तिथी थी और इसलिए इस दिन को ‘नरक चौदस’ कहा जाता है. वहीं यह  दीपावली के एक दिन पहले आती है तो इसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है.


क्यों मनाई जाती है छोटी दिवाली अथवा नरक चतुर्दशी ? जानें क्या है इस दिन दीपक जलाने का महत्व

दिवाली के त्योहार से एक दिन पहले छोटी दिवाली मनाई जाती है. छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है. इस दिन घरों में यमराज की पूजा की जाती है. छोटी दिवाली पर शाम के वक्त घर में दीपक लेकर घूमने के बाद उसे बाहर कहीं रख दिया जाता है. इसे यम का दीपक कहते हैं. इस दिन कुल 12 दीपक जलाए जाते हैं. ऐसा कहते हैं कि यमराज के लिए तेल का दीपक जलाने से अकाल मृत्यु भी टल जाती है.

छोटी दिवाली सौन्दर्य प्राप्ति और आयु प्राप्ति का दिन भी माना जाता है. इस दिन आयु के देवता यमराज और सौन्दर्य के प्रतीक शुक्र की उपासना की जाती है. इस दिन विष्णु अवतार भगवान श्री कृष्ण जी की उपासना भी की जाती है, क्योंकि इसी दिन उन्होंने नरकासुर का वध किया था. कहीं कहीं पर ये भी माना जाता है की आज के दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था. जीवन में आयु या स्वास्थ्य की अगर समस्या हो तो इस दिन के प्रयोगों से दूर हो जाती है.

 

इस दिन स्नान करना क्यों है शुभ ?

-छोटी दिवाली अथवा नरक चतुर्दशी प्रातःकाल या सायंकाल चन्द्रमा की रौशनी में जल से स्नान करना चाहिए

– इस दिन विशेष चीज़ का उबटन लगाकर स्नान करना चाहिए

– जल गर्म न हो, ताजा या शीतल जल होना चाहिए

– ऐसा करने से न केवल अद्भुत सौन्दर्य और रूप की प्राप्ति होती है, बल्कि स्वास्थ्य की तमाम समस्याएं भी दूर होती हैं

– इस दिन स्नान करने के बाद दीपदान भी अवश्य करना चाहिए

उबटन लगाकर स्नान करने से लाभ

– चन्दन का उबटन लगाकर स्नान करने से प्रेम में सफलता प्राप्त होती है

– चिरौंजी का उबटन लगाकर स्नान करने से लम्बे समय तक आकर्षण बना रहता है

– त्वचा और मन को शुद्ध करने के लिए हल्दी का उबटन लगाकर स्नान करना चाहिए

– सरसों का उबटन लगाकर स्नान करने से त्वचा खूब चमकदार हो जाती है , और आलस्य दूर होता है

– बेसन का उबटन लगाकर स्नान करने से तेज बढ़ता है और व्यक्ति खूब एकाग्र हो जाता है

 

छोटी दिवाली अथवा नरक चतुर्दशी पर दीर्घायु के लिए कैसे जलाएं दीपक ?

– नरक चतुर्दशी पर मुख्य दीपक लम्बी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए जलता है

– इसको यमदेवता के लिए दीपदान कहते हैं

– घर के मुख्य द्वार के बाएं ओर अनाज की ढेरी रक्खें

– इस पर सरसों के तेल का एक मुखी दीपक जलाएं

– दीपक का मुख दक्षिण दिशा ओर होना चाहिए

– अब वहां पुष्प और जल चढ़ाकर लम्बी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें

दिवाली क्यों मनाते हैं ? जानिए इस पर्व से जुड़ी 5 रोचक कथाएं

हर जानकारी अपनी भाषा हिंदी में सरल शब्दों में प्राप्त करने के लिए  हमारे फेसबुक पेज को लाइक करे जहाँ आपको सही बात पूरी जानकारी के साथ प्रदान की जाती है | हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहाँ क्लिक करें |


Why is little Diwali celebrated? Or hell chaturdashi

Hell chaturdashi (why hell chaturdashi is celebrated)
STORY 1: Lord Krishna killed Narakasura
There are many stories behind celebrating the festival of Narak Chaturdashi and one of the stories is of Lord Krishna and Narakasura.
According to our Puranas, Narakasura used to be the son of Mother Earth and he had created a panic on the earth. Lord Indra appealed to Lord Vishnu to protect the people from this demon and Lord Vishnu promised Indra Dev that he would kill him by taking Krishna incarnation.
When Lord Vishnu incarnated as Krishna ji on earth, he fulfilled his promise and killed it and released thousands of women from its captivity. At the same time, to get these women respected in the society, Krishna ji got married on these most hellish Chaturdashi, after which people burnt lamps in their homes on this day.
STORY 2: Narakasura was murdered by Krishna ji’s wife
Apart from the legend mentioned above, there is another legend associated with the slaughter of Narakasura and it is said that Narakasura had received a boon from Brahma, that he could only be slaughtered by a woman. Due to this, Krishna was slaughtered by his wife Satyabhama.

STORY 3: Mother Kali killed Narakasura
According to another legend, this demon was slaughtered at the hands of mother Kali and hence this day is celebrated by the people of West Bengal as Kali Chaudas.

STORY 4: A place is found in heaven
According to belief, there used to be a king named Ratidev, who had done a lot of virtue. One day, Yamraj came to him to take this king to hell. At the same time, when Rathidev came to know about Yamraj taking him to hell, he was surprised and the king told Yamraj that he had never done any wrongdoing, then why was he being sent to hell.

At the same time, in response to this question of Rantidev Raja, Yamraj told him that once he was sent empty-handed from his house to a hungry priest, due to which he would go to hell. However, Ratidev pleaded with Yamraj to ask for another life and Yamraj accepted his request and donated his life. After receiving his life, Maharaja met the sage and asked for a solution related to not going to hell. At the same time, the Sandhu saint had advised the Maharaja to fast on the day of Narak Chaturdashi and feed the hungry priest so that he could avoid going to hell.

Why is it said that this is Narak Chaturdashi?
Chaturdashi Tithi was the day the Lord killed Narakasura and hence this day is called ‘Hell Chaudas’. There it comes a day before Deepawali, then it is also called Chhoti Deepawali.

Why is it said that this is Narak Chaturdashi?

Chaturdashi Tithi was the day the Lord killed Narakasura and hence this day is called ‘Hell Chaudas’. There it comes a day before Deepawali, then it is also called Chhoti Deepawali.

Why is little Diwali celebrated? Know what is the importance of lighting a lamp on this day

Short Diwali is celebrated one day before the festival of Diwali. Chhoti Diwali is also called Naraka Chaturdashi. On this day, Yamraj is worshiped in homes. In the short Diwali, in the evening, the lamp is kept somewhere outside after walking with the lamp in the house. This is called the lamp of Yama. A total of 12 lamps are lit on this day. It is said that by lighting an oil lamp for Yamraj, premature death is also averted.

Chhoti Diwali is also considered a day of beauty and age. On this day, Lord Yama, the god of age, and Venus, the symbol of beauty, are worshiped. Lord Vishnu incarnation is also worshiped on this day because he killed Narakasura on this day. It is also believed that Hanuman ji was born on this day. If there is a problem of age or health in life, then this day’s experiments are overcome.

 

Why is bathing on this day auspicious?

– On this day in the morning or evening, one should bathe in the moonlight with water.

– On this day special things should be applied after bathing

– Water should not be hot, fresh, or cold water

– By doing this, not only you get amazing beauty and form, but all health problems are also overcome.

– After bathing on this day, one should also donate a lamp

Taking a bath with a boil is beneficial

– Taking a bath by applying sandal paste gives success in love

– Taking a bath of chironji with a boil keeps the attraction for a long time.

– To cleanse the skin and mind, turmeric should be applied with a bath

– Taking a bath with mustard paste makes the skin very shiny, and removes diarrhea

– Bathing with the paste of gram flour rises fast and the person becomes very concentrated.

How to burn Kailu on Narak Chaturdashi?

– On Narak Chaturdashi, the main lamp burns for long life and good health

– It is called Deepdan for Yamdevata.

– Place a pile of grains on the left side of the main door of the house

– Burn a lamp of mustard oil on it

– The head of the lamp should be towards south

– Now pray for flooding and water there for good age and good health

 

blood donate रक्तदान महादान या सबसे बड़ा दान है | जानिए कैसे ?

 

 

 

3 thoughts on “क्यों मनाई जाती है छोटी दिवाली अथवा नरक चतुर्दशी? जानिए महत्व |”

Leave a Comment

%d bloggers like this: