oxygen level in human body मानव शरीर में ऑक्सीजन का स्तर

oxygen level in human body-ऑक्सीजन या प्राणवायु या जारक (Oxygen) रङ्गहीन, स्वादहीन तथा गन्धरहित गैस है. इसकी खोज, प्राप्ति अथवा प्रारम्भिक अध्ययन में जे॰ प्रीस्टले और सी॰डब्ल्यू॰ शेले ने महत्वपूर्ण कार्य किया है. यह एक रासायनिक तत्त्व है. सन् 1772 ई॰ में कार्ल शीले ने पोटैशियम नाइट्रेट को गर्म करके आक्सीजन गैस तैयार किया, किन्तु उनका यह कार्य सन् 1777 ई॰ में प्रकाशित हुआ. सन् 1774 ई॰ में जोसेफ प्रिस्टले ने मर्क्युरिक-आक्साइड को गर्म करके ऑक्सीजन गैस तैयार किया. एन्टोनी लैवोइजियर ने इस गैस के गुणों का वर्णन किया तथा इसका नाम आक्सीजन रखा, जिसका अर्थ है – ‘अम्ल उत्पादक’

 वायुमण्डल में ऑक्सीजन का स्तर और oxygen level in human body

ऑक्सीजन पृथ्वी के अनेक पदार्थों में रहता है जैसे पानी और वास्तव में अन्य तत्वों की तुलना में इसकी मात्रा सबसे अधिक है. ऑक्सीजन, वायुमण्डल में स्वतन्त्र रूप में मिलता है आयतन के अनुसार उसका लगभग पाँचवाँ भाग है. यौगिक रूप में पानी, खनिज तथा चट्टानों का यह महत्वपूर्ण अंश है. वनस्पति तथा प्राणियों के प्राय: सब शारीरिक पदार्थों का ऑक्सीजन एक आवश्यक तत्व है. वायुमण्डल में इसकी मात्रा लगभग 20.95% होती है. ऑक्सीजन भूपर्पटी पर सर्वाधिक मात्रा (लगभग 46.6%)में पाया जाने वाला तत्त्व है.

 शरीर के लिए ऑक्सीजन, कितनी होनी चाहिए इसकी मात्रा?

The oxygen level in human body, शरीर में ऑक्सीजन का स्तर यह बताता है कि कितना ऑक्सीजन हमारे ख़ून के माध्यम से पूरे शरीर में सर्कुलेट हो रहा है. ऑक्सीजन को पूरे शरीर में कैरी करने का काम रेड ब्लड सेल्स करते हैं, वे फेफड़ों से ऑक्सीजन लेते हैं और उसे शरीर की हर कोशिका तक पहुंचाते हैं. सेल्स को ऊर्जा का उत्पादन करने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है. जब तक शरीर में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य बना रहता है, तब तक हमारा शरीर दुरुस्त रहता है.

oxygen level in human body अर्थात ब्लड ऑक्सीजन लेवल का सामान्य स्तर 75 से 100 मिलीमीटर होता है. वहीं जब ऑक्सीजन का स्तर 60 मिलीमीटर से कम हो जाता है, तब यह ख़तरे का संकेत है. ऐसे व्यक्ति को तुरंत ऑक्सीजन सप्लिमेंट्स की ज़रूरत पड़ सकती है. शरीर में ऑक्सीजन की कमी को हाइपोएक्सेमिया कहा जाता है.

oxygen level in human body

शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को मापने के दो प्रचलित तरीक़े हैं. सबसे आसान है पल्स ऑक्सीमीटर की मदद से इसका स्तर जांचना. लेकिन एक्युरेट रिज़ल्ट के लिए आर्टिरियल बल्ड गैस या एबीजी टेस्ट कराया जाता है. एबीजी में आमतौर पर कलाई के पास से ख़ून का सैम्पल लेकर लैब में टेस्ट किया जाता है. इसका नतीजा एकदम सही आता है. वहीं भले ही पल्स ऑक्सीमीटर आसान हो, पर इसके नतीजे की एक्युरेसी पर बहुत ज़्यादा भरोसा नहीं किया जा सकता. इसमें हाथ की उंगलियों पर एक छोटा-सा डिवाइस लगाया जाता है, जो व्यक्ति के पल्स के आधार पर शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बताता है. घरों में इस्तेमाल के लिए यह एक अच्छा और उपयोगी डिवाइस है.

कैसे पता चलता है कि शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो रहा है? 

जैसा कि हम पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि शरीर को अपनी सभी क्रियाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए 70 से 100 मिलीमीटर ऑक्सीजन स्तर की ज़रूरत होती है. जब उसका स्तर इससे नीचे जाता है, तब शरीर की नियिमत क्रियाएं बाधित होती हैं, जिसका सबसे पहला असर थकान के रूप में दिखाई देने लगता है. सांस लेने में दिक़्क़त होने लगती है. कुछ लोगों की सांस फूलने लगती है. शरीर में रक्त का प्रवाह धीमा पड़ जाता है, जिसकी वजह से बेचैनी और घबराहट बढ़ जाती है. ऐसी स्थिति में दिल की धड़कन असामान्य रूप से बढ़ जाती है. तेज़ सिरदर्द, सीने में दर्द, देखने में समस्या, सिर चकराना, शरीर का लड़खड़ाना जैसे कई दूसरे लक्षण भी ऑक्सीजन की कमी की ओर इशारा करते हैं.

क्या हैं oxygen level in human body की कमी के कारण?

रक्त में ऑक्सीजन का स्तर अचानक कम हो जाना हवा में ऑक्सीजन कम होने के चलते भी हो सकता है. अगर फेफड़े ठीक तरह से काम नहीं करते तो भी यह समस्या हो सकती है. यदि फेफड़ों तक रक्त का सर्कुलेशन ठीक तरह नहीं हो पाता तो भी शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है. जो लोग फ़िज़िकली ऐक्टिव नहीं रहते उनके शरीर में भी ऑक्सीजन का स्तर कम होता है. इसकी कमी का संबंध हमारे खानपान से भी है. आपकी डायट अगर सही नहीं होगी तो आप ख़तरे में पड़ सकते हैं. ख़ासकर अगर आपके खानपान में आयरन की मात्रा कम है तो रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा कम होगी ही. आयरन लाल रक्त कोशिकाओं यानी रेड ब्लड सेल्स का एक प्रमुख घटक है. और फेफड़ों सहित पूरे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह करने में रेड ब्लड सेल्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

शरीर में ऑक्सीजन की कमी किन बीमारियों का है संकेत?

बहरहाल हम अभी की सबसे बड़ी बीमारी यानी कोरोना महामारी के संबंध में बात करें तो शरीर में ऑक्सीजन की कमी यह संकेत देती है कि आपके फेफड़े ठीक तरह से काम नहीं कर रहे हैं. यह तो हम जानते ही हैं कि कोरोना का संक्रमण फेफड़ों को डैमेज कर देता है. जिन लोगों को दमा की समस्या होती है, उनमें भी दमा का अटैक आने पर शरीर का ऑक्सीजन कम हो जाता है.

यदि शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बहुत कम हो जाए तो ब्रेन डैमेज और हार्ट अटैक तक की स्थिति बन जाती है. शुगर के रोगियों में यदि ऑक्सीजन की कमी हो जाए तो उनकी शुगर अचानक बहुत अधिक बढ़ सकती है, जो कि एक जानलेवा स्थिति भी बन सकती है. शुगर बढ़ने का कारण यह है कि ब्लड ग्लूकोज़ का रूपांतरण ऊर्जा में होना रुक जाता है.

ऑक्सीजन का स्तर अचानक से बहुत अधिक घट जाने पर शरीर में थायरॉइड हार्मोन्स का संतुलन गड़बड़ा जाता है. इस स्थिति में थायरॉइड का स्तर या तो बहुत अधिक बढ़ सकता है या बहुत अधिक घट सकता है. इससे हाइपोथायरॉइडिज़्म या हाइपरथायरॉइडिज़्म की समस्या हो सकती है.

ऑक्सीजन का चिकित्सा में उपयोग

चिकित्सा में आक्सीजन कई प्रकार से उपयोगी है. यह उपचार रोगी के रक्त में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाता है. इसके अलावा दूसरा प्रभाव यह होता है कि कई प्रकार के रोगग्रस्त फेफड़ों में रक्त के प्रवाह के प्रतिरोध को कम करता है. इस प्रकार यह हृदय पर काम का बोझ कम करता है.

ऑक्सीजन थेरेपी का उपयोग अन्य रोगों में भी होता है, जैसे- वातस्फीति, निमोनिया, कुछ हृदय विकारों (जैसे congestive heart failure), कुछ ऐसे विकार जिनके कारण फुफ्फुसीय धमनी के दाब में वृद्धि हो जाती है आदि. इसके अलावा ऑक्सीजन थिरैपी का उपयोग उन सभी रोगों में किया जाता है जिनमें गैसीय ऑक्सीजन लेने और उसका उपयोग करने की शरीर की क्षमता को क्षीण हो गयी हो.

ये उपचार पर्याप्त लचीले भी हैं अतः इनका उपयोग चिकित्सालयों में, रोगी के घर में, या पोर्टेबल युक्तियों के रूप में किया जा सकता है. अब प्रायः ऑक्सीजन मास्क प्रचलन में आ गए है किन्तु पहले ऑक्सीजन की कमी कीी पूर्ति लिए प्रायः ‘ऑक्सीजन टेन्ट’ उपयोग में लिए जाते थे.

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