Chhoti Diwali 2022 Date, Shubh Muhurat, Puja Vidhi, and Significance on Naraka Chaturdashi

Chhoti Diwali – नरक चतुर्दशी या छोटी दीपवली के दिन रूप चौदस का भी त्योहार मनाया जाता है। आज के दिन प्रातःकाल तिल का तेल लगा कर स्नान करने से भगवान कृष्ण रूप और सौन्दर्य प्रदान करते हैं। इस दिन भगवान कृष्ण, हनुमान जी, यमराज और मां काली के पूजन का विधान है। इस दिन हनुमान जयंति का भी पूजन किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार दिवाली का पावन पर्व कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इस बार दिवाली 24 अक्टूबर 2022 को है। अमावस्या तिथि की शुरुआत 24 अक्टूबर 2022 शाम 5 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 25 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 18 मिनट पर होगी। यहां आप पूजा का शुभ मुहूर्त व प्रदोष काल से संबंधित संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

भारत में दीवाली का पर्व बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। दीवाली के एक दिन पहले छोटी दीवाली मनाई जाती है. पंचांग के मुताबिक़, छोटी दीवाली का पर्व कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस बार छोटी दीवाली 23 अक्टूबर को मनाई जायेगी। छोटी दिवाली से जुड़ी एक कथा के मुताबिक, श्रीकृष्ण और उनकी पत्नी सत्यभामा ने नरकासुर का वध किया था। और उसकी कैद से लगभग 16 हज़ार महिलाओं को मुक्ति दिलाई थी। इसी उपलक्ष्य में यह दीवाली मनाई जाती है।

Chhoti Diwali 2022

पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। नरक चतुर्दशी दिवाली के एक दिन पहले और धनतेरस के एक दिन बाद मनाई जाती है। लेकिन इस बार नरक चतुर्दशी और दीवाली एक ही दिन मनाई जाएगी। इसे छोटी दिवाली, रूप चौदस, नरक चौदस, रूप चतुर्दशी अथवा नरका पूजा के नामों से भी जाना जाता है। इस दिन मृत्यु के देवता यमराज और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विधान है। रूप चौदस के दिन संध्या के समय दीपक जलाए जाते हैं और चारों ओर रोशनी की जाती है। नरक चतुर्दशी का पूजन अकाल मृत्यु से मुक्ति और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए किया जाता है। एक पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने कार्तिक माह को कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन नरकासुर का वध करके देवताओं और ऋषियों को उसके आतंक से मुक्ति दिलवाई थी।

दीपावली का पर्व एक नहीं बल्कि पूरे पांच दिनों तक चलता है। इस महोत्सव की शुरुआत धनतेरस के दिन से होती है और इसके दूसरे दिन नरक चतुर्दशी पड़ती है। नरक चतुर्दशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है और इसे छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। दिवाली के ठीक एक दिन पहले कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी कहा जाता है। इस दिन लोग घरों के कुछ विशेष स्थानों पर दीप प्रज्वलित करते हैं। मान्यता है कि इस दिन मुख्य द्वार के पास दीया जरूर जलाना चाहिए जिससे घर की सुख समृद्धि बनी रहे।

Chhoti Diwali

Chhoti Diwali Date 2022 Details

Festival Chhoti Diwali
Date 23,24 October 2022
Shubh Muhurt Start 23 अक्टूबर को शाम 06 बजकर 03 मिनट
Shubh Muhurt Finish 24 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 27 मिनट पर होगा।
Category Festival
Official Website Click Here

Chhoti Diwali 2022: Shubh Muharat

कार्तिक चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ : 23 अक्टूबर, 2022 को 06:04 PM बजे
कार्तिक चतुर्दशी तिथि समाप्त : 24 अक्टूबर, 2022 को 05:28 PM बजे
छोटी दीवाली रविवार 23 अक्टूबर के दिन मनाई जायेगी।

कब है नरक चतुर्दशी? क्या है मुहूर्त?

दीपों और रोशनी का त्योहार दीपावली यानी की दिवाली पांच दिनों का त्योहार होता है। जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और ये पर्व भईया दूज पर खत्म होता है। इस बार दिवाली की तिथियों को लेकर लोगों के अंदर थोड़ा कन्फ्यूजन हो गया है लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि छोटी दिवाली यानी कि नरक चतुर्दशी कब है? तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। इस बार धनतेरस 23 अक्टूबर है लेकिन इस दिन शाम 6 बजकर 3 मिनट से चतुर्दशी लग जाएगी इसलिए लोगो को थोड़ा भ्रम हो गया है, इसलिए जो लोग चतुर्दशी की पूजा शाम को करना चाहें वो इसी दिन कर सकते हैं, ये गलत नहीं होगा, तो वहीं दूसरी ओर चतुर्दशी 24 अक्टूबर, शाम 5 बजकर 27 मिनट तक रहेगी और उदया तिथि 24 अक्टूबर को ही है इसलिए नरक चतुर्दशी सोमवार को ही है।

छोटी दिवाली की शुभ तिथि

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 23 तारीख को शाम 06:04 मिनट से शुरू होकर 24 अक्टूबर शाम 05: 28 मिनट पर खत्म होगी। उदया तिथि के मुताबिक, छोटी दिवाली 24 अक्तूबर को भी मनाई जा सकती है। हालांकि, कुछ लोग 23 को भी यह त्योहार मनाएंगे।

छोटी और बड़ी दिवाली एक दिन

बता दें इस बार विशेष संयोग बन रहा है, नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली एक ही दिन मनाई जाएगी। सालों बाद ऐसा संयोग देखने को मिल रहा है। वहीं धनतेरस भी दिवाली से ठीक एक दिन पहले मनाया जाएगा। यही कारण है कि, छोटी और बड़ी दिवाली एक साथ मनाई जा रही है। नरक चतुर्दशी को रूप चौदस और छोटी दीवाली के नाम से भी जानते है। इस दिन भगवान यमराज की पूजा अर्चना करने का विधान है. नरक चतुर्थी के दिन भगवान यमराज को दीप-दान किया जाता है। दीप-दान करने से व्यक्ति को सुख और अच्छे स्वास्थ्य की मनोकामना का फल मिलता है। इस बार नरक चतुर्दशी 24 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

नर्क चतुर्दशी को छोटी दिवाली क्यों कहते हैं ?

हिंदू मान्यता के मुताबिक, इस दिन भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध किया था। नरकासुर के बंदी गृह में 16 हजार से ज्यादा महिलाएं कैद थीं, जिन्हें भगवान कृष्ण ने आजाद कराया था। तब से छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी के तौर पर मनाया जाता है।

अंग्रेजी कैलेण्डर के अनुसार नरक चतुर्दशी के दिन अभ्यंग स्नान लक्ष्मी पूजा से एक दिन पहले या उसी दिन हो सकता है। जब सूर्योदय से पहले चतुर्दशी तिथि और सूर्योदय के बाद अमावस्या तिथि प्रचलित हो तब नरक चतुर्दशी और लक्ष्मी पूजा एक ही दिन हो जाते हैं इसलिए इसे छोटी दिवाली भी कहते हैं।

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Chhoti Diwali 2022 पूजा विधि

  • नरक चतुर्दशी के दिन प्रातः जल्दी उठें और स्नान आदि कर्म से निवृत होकर साफ वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद घर के पूजा स्थल को अच्छी तरह से साफ़ करें और सभी देवी देवताओं को स्नान कराएं।
  • घर के मंदिर में दीपक जलाएं और प्रदोष काल के समय घर के मुख्य द्वार या आंगन में दीपक जलाएं।
  • एक दीपक यमदेव के नाम का जलाएं और मुख्य द्वार के बाहर रखें।
  • इस दिन कुछ लोग व्रत भी रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा माता लक्ष्मी समेत करते हैं।

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Chhoti Diwali Significance 2022

नरक चतुर्दशी, जिसे छोटी दिवाली के रूप में भी जाना जाता है।, एक हिंदू त्योहार है जो पांच दिवसीय दिवाली समारोह के दूसरे दिन आता है। यह कार्तिक के हिंदू महीने में कृष्ण पक्ष के चौदहवें दिन पड़ता है। मान्यता है। कि इसी दिन भगवान कृष्ण और सत्यभामा ने नकासुर का वध किया था। हिंदू धर्म में दिवाली से एक दिन पूर्व छोटी दिवाली मनाने की परंपरा रही है। छोटी दिवाली को धन की देवी मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। इनके अलावा छोटी दिवाली पर मृत्यु के देवता यमराज की भी पूजा का विशेष महत्व होता है।

उस युद्ध में सत्यभामा ने नरकासुर को परास्त करके उसका वध किया और सभी कन्याओं को छुड़वा लिया। इसील‍िए इस दिन को नरक चतुर्दशी भी कहते है। छोटी दिवाली भी इसी दिन मनाई जाती है। देश भर में दीपावली की धूम देखने को मिल रही है। बाजार सज गए हैं। लोगों ने त्योहार के पहले से ही खरीदारी और बाकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। दिवाली के पांच दिवसीय त्योहार की शुरुआत धनतेरस के पर्व से होती है। धनतेरस के बाद छोटी दिवाली, दिवाली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज के बाद इस त्योहार का समापन हो जाता है। इस बार छोटी दिवाली, दिवाली की तिथियों को लेकर कन्फ्यूजन बना हुआ है।

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निष्कर्ष (Naraka Chaturdashi)

नरक चतुर्दशी को यम चतुर्दशी, रोप चौदस, रूप चतुर्दशी और छोटी दिवाली के नाम से जाना जा सकता है। इस दिन यमराज की पूजा करने से दीर्घायु की प्राप्ति होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन पुराने दीए जलाने की परंपरा है। बता दें कि इस दिन यम के नाम का दीपक दक्षिण दिशा में जलाया जाता है। अगर आपके पास पुराना दीपक नहीं है, तो नया दीपक जला सकते हैं। इस दिन सरसों के तेल का दीपक ही जलाया जाता है। और भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है।

आपको बता दें कि छोटी दिवाली का खास महत्व है। इस दिन 6 देवी देवताओं- श्रीकृष्ण, मां काली, यमदेव, हनुमान जी, शिवजी और गणेश जी की पूजा होती है। माना जाता है कि इन सभी की पूजा करने से इंसान को हर तरह के सुख की प्राप्ति होती है और उसे सारे कष्टों से मुक्ति मिलती है। इस दिन लोग अपने घर के द्वार पर तेल का दीपक का जलाते हैं।

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