world war 3 क्या तीसरा विश्वयुद्ध होगा ? नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी क्या है?

world war 3– कब होगा तीसरा विश्‍व युद्ध? कौन मचाएगा तबाही? कौन बनेगा महान शांतिदूत? जीत किसकी होगी? जानिए विस्तार पूर्वक

अनुसार तीसरा विश्व युद्ध कब होगा, कौन उसे शुरू करेगा, कब तक चलेगा और कौन होगा विजेता, इस संबंध में उन्होंने अपनी भविष्यवाणी की किताब सेंचुरी में उल्लेख किया है। महान भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस की 950 भविष्यवाणियों में से 18 भविष्यवाणियों का केंद्र तीसरा विश्वयुद्ध है। उन्होंने कहा था कि 2009 से 2013 तक दुनिया में बड़ी क्रांतियां होंगी। 2013 से 2025 के मध्य महान बदलाव के दौरान विश्व युद्ध होगा। उनका कहना था कि यह अवधि मुसीबतों, निराशा और बुराई से भरी होगी, साथ ही इन सबके बीच आशा और उम्मीद की किरणें भी होंगी।

world war 3

हालांकि कुछ विद्वानों का मानना है कि उनकी भविष्यवाणियां मनघड़ंत है, क्योंकि संसार में युद्ध, तूफान, बाढ़, प्राकृतिक आपदाएं, आसमानी आफत इन सभी का होना सदियों से जारी है और आगे भी जारी रहेगा।

कौन करेगा world war 3 की शुरुआत ?

नास्‍त्रेदमस की मानें तो ईश्‍वर विरोधी (एंटी क्राइस्ट) इस युद्ध की शुरुआत करेगा। इस्लामिक कट्टरपंथी, कम्यूनिष्टों को एंटी क्राइस्ट माना जाता है। रशिया और चीन जैसे देशों को ईश्‍वर विरोधी माना जाता है। इससे पहले नेपोलियन और हिटलर को भी एंटी क्राइस्ट माना जाता था।

क्यों होगा यह युद्ध ?

”धर्म बांटेगा लोगों को। काले और सफेद तथा दोनों के बीच लाल और पीले अपने-अपने अधिकारों के लिए भिड़ेंगे। रक्तपात, महामारी, बीमारियां, अकाल, सूखा, युद्ध और भूख से मानवता बेहाल होगी।” (vi-10). इस वक्त दुनिया में कट्टरता अपने चरम पर है। नास्त्रेदमस की मानें तो इस कट्टरता के कारण ही दुनिया तीसरे युद्ध को झेलेगी।

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कब होगा और कब तक चलेगा world war 3 ?

‘एक पनडुब्बी में तमाम हथियार और दस्तावेज लेकर वह व्यक्ति इटली के तट पहुंचेगा। और युद्ध शुरू करेगा। उसका काफिला बहुत दूर से इतालवी तट तक आएगा।’ (11-5)- नास्त्रेदमस। नास्त्रेदमस के अनुसार तीसरे महायुद्ध की स्थिति सन् 2012 से 2025 के मध्य उत्पन्न हो सकती है।

कब तक चलेगा world war 3 : 27 साल तक तीसरा विश्वयुद्ध चलेगा और दुनिया लगभग समाप्त हो जाएगी।

’27 अक्टूबर 2025 को मेष के प्रभाव में तीसरी किस्म की जलवायु आएगी, एशिया का राजा मिस्र का भी सम्राट बनेगा। युद्ध, मौतें, नुकसान और ईसाइयों की शर्म के हालात बनेंगे। -(3/77 सेंचुरी)।
आगे वे लिखते हैं- एक देश में जनक्रांति से नया नेता सत्ता संभालेगा (यह मिस्र में हो चुका है)। नया पोप दूसरे देश में बैठेगा (यह भी हो चुका है।) मंगोल (चीन) चर्च के खिलाफ युद्ध छेड़ेगा। (चीन का अमेरिका के खिलाफ छद्मयुद्ध तो जारी है ही)। नया धर्म (इस्लाम) चर्च के खिलाफ भारी मारकाट करते हुए इटली और फ्रांस तक जा पहुंचेगा तब तृतीय युद्ध शुरू होगा।
कहां शुरु होगा युद्ध : नास्त्रेदमस के अनुसार 21वीं शताब्दी में तीसरा विश्वयुद्ध होगा जो मेसोपोटामिया की पवित्र भूमि से छिड़ेगा। भविष्यवाणी के अनुसार ईश्वर के विरोधी ही world war 3 छेड़ेंगे और ईसाई धर्म को मानने वाले देश आंदोलन से हैरान होंगे। मिडिल ईस्ट दुनिया की जंग का मैदान बन जाएगा जहां दुनिया भर की ताकतें अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेंगी।
युद्ध के दौरान गिरेगी धरती पर उल्कापिंड: नास्त्रेदमस के अनुसार जब विश्‍व युद्ध चल रहा होगा तब हिंद महासागर में गिरेगी बड़ी सी उल्का। नास्त्रेदमस अनुसार जब world war 3 चल रहा होगा तब एक ओर जहां चीन दुनिया में तबाही मचा रहा होगा तो दूसरी ओर आसमान से भयानक आफत आएगी।
‘एक मील व्यास का एक गोलाकार पर्वत अं‍तरिक्ष से गिरेगा और महान देशों को समुद्री पानी में डुबो देगा। यह घटना तब होगी, जब शांति को हटाकर युद्ध, महामारी और बाढ़ का दबदबा होगा। इस उल्का द्वारा कई प्राचीन अस्तित्व वाले महान राष्ट्र डूब जाएंगे।’ (I-69)
समीक्षक और व्याख्याकार इस उल्का के गिरने का केंद्र हिन्द महासागर को मानते हैं। ऐसे में मालद्वीप, बुनेई, न्यूगिनी, फिली‍पींस, कंबोडिया, थाईलैंड, बर्मा, श्रीलंका, बांग्लादेश, भारत, पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका के तटवर्ती राष्ट्र तथा अरब सागर से लगे राष्ट्र डूब से प्रभावित होंगे। हालांकि कुछ लोगों का यह भी मानना है कि आसमान से आफत‍ गिरने का तात्पर्य कोई अंतरिक्ष स्टेशन भी हो सकता है।
चीन करेगा रासायनिक हमला : नास्त्रेदमस अनुसार चीन और अरब का गठजोड़ विश्व में तबाही लाएगा। नास्त्रेदमस ने अपनी एक भविष्यवाणी में कहा है कि जब तृतीय युद्ध चल रहा होगा उस दौरान चीन के रासायनिक हमले से एशिया में तबाही और मौत का मंजर होगा, ऐसा जो आज तक कभी नहीं हुआ।- (vi-51)
चीन की फौजें जब फ्रांस में घुसेगी तब जम कर आणविक और कीटाणु अस्त्रों का प्रयोग होगा। इसके बाद ये फौजें पूर्वी यूरोप के भीतर तक घुस जाएगी। वहां से दक्षिण स्पेन पर अरब फौजों की मदद से हमला किया जाएगा। (।।-29, ।।-96, v।-80, v।।।।-51, v-55, ।।।-20, ।-73, v।।।-94, v।-88)
फ्रांस की हार होगी, स्विट्जरलैंड का खजाना लूटा जाएगा : ईरानवासी एक अरब मुखिया दक्षणि पूर्वी स्पेन पर काबू पा लेगा। शनि और मंगल सिंह राशि में होंगे तब स्पेन हाथ से जाता रहेगा। फ्रांसीसी हार ही जाएंगे। फिर पूर्वी हमलावर यूरोप पर भारी बमबारी करेगा। इटली को ही ये लोग प्रमुख अड्डा बनाएंगे। यूरोप कीटाणु हमले का शिकार होगा। (।।।-64, v-14, ।v-48)…फिर होगा स्विट्जरलैंड पर हमला। वहां के बैंकों का खजाना लूटा जाएगा। स्विस सेना कुछ न कर पाएगी। (v-85, ।-x-44, ।।-83).
‘एशिया का महान व्यक्ति समुद्र और जमीन पर विशाल सेना लेकर नीले, हरे और सलीबों को वह मौत के घाट उतार देगा।’ (सैंचुरी-6-80)। इसी सैंचुरी का 24 और 25वां छंद भी भयानक युद्ध का वर्णन करता है।
‘लाल के विरुद्ध संप्रदाय इकट्ठा होंगे तथा आग, पानी, लोहा व रस्सी को शांति नष्ट कर देगी। षड्यंत्रकारी मौत के घाट उतार दिए जाएंगे, बचेगा फिर भी जो दुनिया में तबाही लाएगा।’ (सैंचुरी-9-51)।
चीन करेगा अमेरिका पर हमला : यूरोप के बाद अमेरिका को निशाना बनाया जाएगा। एक प्रमुख चीन जनरल का पोता हमले की कमांड संभालेगा। पहला हमला जबरदस्त होगा। अमेरिका में अफरातफरी फैल जाएगी। नए शहर का आसमान आग से भर जाएगा। यह आग तेजी से उपर उठेगी। (।v-99, ।।-95, ।v-97)
महान शायरन : नास्त्रेदमस लिखते हैं कि एक महान व्यक्ति भारत में जन्म लेगा, जो पूर्व के सभी राष्ट्रों पर हावी होगा। उससे भयभीत होकर उसे सत्ता में आने से रोकने के लिए एक महाशक्ति और दो पड़ोसी देश षड्‍यंत्र करेंगे, पर वह सभी के षड्‍यंत्रों को विफल करता हुआ प्रचंड बहुमत से सत्तासीन हो जाएगा।
‘पांच नदियों के प्रख्‍यात द्वीप राष्ट्र में एक महान राजनेता का उदय होगा। इस राजनेता का नाम ‘वरण’ या ‘शरण’ होगा। वह एक शत्रु के उन्माद को हवा के जरिए समाप्त करेगा और इस कार्रवाई में 6 लोग मारे जाएंगे।’ (सेंचुरी v-27) ‘शीघ्र ही पूरी दुनिया का मुखिया होगा महान ‘शायरन’ जिसे पहले सभी प्यार करेंगे और बाद में वह भयंकर व भयभीत करने वाला होगा। ख्याति आसमान चूमेगी और वह विजेता के रूप में सम्मान पाएगा।’ (v-70)

Third world war

Third world war
‘पैगंबर के कुल नाम के अंतिम अक्षर से पहले के नाम वाले सोमवार को अपना अवकाश दिवस घोषित करेगा। अपनी सनक में वह अनुचित कार्य भी करेगा। जनता को करों से आजाद कराएगा।’ (1-28)
पैगंबर तो एक ही हैं मुहम्मद। उनके कुल का नाम हाशमी था। हाशमी के अंतिम अक्षर के पहले ‘श’ यानी जिस नेता के प्रादुर्भाव की बात कही जा रही है। उसका नाम ‘श’ से शुरू होना चाहिए। यदि हम कुल का नाम न मानें तो मुहम्मद के अंतिम अक्षर के नाम के पहले ‘म’ आता है।
कई लोग इस भविष्यवाणी को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एयरस्ट्राइक से जोड़कर देखते हैं।
world war 3 के अंत में क्या होगा ?- ‘अंतिम दौर में दुनिया शनि की विलंबत वापसी से नुकसान उठाएगी। साम्राज्य एक काले राष्ट्र के हाथों चला जाएगा।- (।।।।-92)। अंतिम अरब टुकड़ी बगावत करके अपने कमांडर से समर्पण करा देगी। तीसरा विश्व युद्ध खत्म हो जाएगा।- (।-70)
अंतत: परमात्मा का हाथ रक्तपिपासु एलस Alus तक पहुंच जाएगा। वह खुद को समुद्र में भी नहीं बचा पाएगा। दो नदियों के बीच में खुद को सु‍रक्षित करके भी छिप नहीं पाएगा। सुरक्षित छिपकर भी वह काले और क्रुद्ध व्यक्ति से भयभित होगा। जो उसे उसकी करतूतों की सजा देगा। ( v।-33)
‘एशिया में वह होगा, जो यूरोप में नहीं हो सकता। एक विद्वान शांतिदूत सभी राष्ट्रों पर हावी होगा।’ (x-75)
world war 3 निष्कर्ष : नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी की पुस्तक को पढ़कर ऐसा लगता है कि यह युद्ध 21वीं सदी में होगा। इस युद्ध में चीन और इस्लामिक राष्ट्र का गठबंधन होगा तो दूसरी ओर अमेरिका और उसके मित्र राष्ट्रों का गठबंधन होगा। इस बीच भारत और रशिया जैसे देशों की भूमिका अपने अपने हितों को साथने में रहेगी। परंतु यह भी इन भविष्यवाणी में निकलकर आता है कि भारत की भूमिका इन सब के बीच शांति स्थापित करने के लिए भी होगी। इस संपूर्ण युद्ध में तीन नाम उभरकर आते हैं। एलस, शायरन और पैगंबर ने नाम कुलनाम के अक्षर वाला व्यक्ति। इस युद्ध में अरब और यूरोपीय देशों के बुरे हाल होंगे। इस युद्ध के कारण दुनिया की आधी आबादी समाप्त हो जाएगी।
सोर्स : अशोक कुमार शर्मा की पुस्तक नास्त्रेदमस की संपूर्ण भविष्यवाणियां (डायमंड पाकेट बुक्स)
विश्व युद्ध III या तृतीय विश्व युद्धद्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) का काल्पनिक उत्तरवर्ती है, जिसका स्वरुप लगभग परमाणविक एवं विनाशकारी है।इस युद्ध की पूर्वानुमात परिकल्पना सैन्य एवं नागरिक अधिकारियों द्वारा की गयी है तथा कई देशों की कल्पित कथाओं में इसकी चर्चा की गयी है। ये अवधारणाएँ विशुद्ध पारंपरिक परिदृश्यों से लेकर परमाणविक शस्त्रों के सीमित उपयोग या सम्पूर्ण ग्रह के विनाश तक विस्तारित हैं।

नोट: badisoch.in इस तरह की किसी भविष्‍यवाणी, अनुमान आदि की न तो पुष्‍ट‍ि करता है और न ही इसे बढ़ावा देता है, पाठक और व्‍यूअर्स इस बारे में अपने स्‍वयं विवेक से निष्‍कर्ष निकालें। इस तरह की खबर के लिए badisoch.in जिम्‍मेदार नहीं है।
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