Emotional भावनात्मक परिपक्वता पर अनमोल वचन

ज्ञान हम सब के पास हैं, लेकिन उस ज्ञान का प्रयोग कितना और कहा करना हैं, ये एक बुद्धिमान व्यक्ति ही समझ सकता हैं। आज हम आपके लिए Emotional अथवा भावनात्मक परिपक्वता पर अनमोल उद्धरण लेकर आये हैं, अर्थात Emotional 25+ भावनात्मक परिपक्वता पर अनमोल वचन जो आपको जरुर पसंद आएंगे –

Emotional

Emotional परिपक्वता पर अनमोल वचन

Best Emotional quotes जो भावनात्मक परिपक्वता पर अनमोल वचन है, इस प्रकार है..

  1. क्रोधो वैवस्वतो राजा , तृष्णा वैतरणी नदी| विद्या कामदुधा धेनुः , संतोषं नन्दनं वनम ॥
  2. क्रोध यमराज है , तॄष्णा (इच्छा) वैतरणी नदी के समान है| विद्या कामधेनु है, और सन्तोष नन्दन वन है||
  3. चिन्ता चिता के पास ले जाती है|
  4.  आत्महत्या , एक अस्थायी समस्या का स्थायी समाधान है|
  5.  मन के हारे हार है मन के जीते जीत|
  6. हमे सीमित मात्रा में निराशा को स्वीकार करना चाहिये , लेकिन असीमित आशा को नहीं छोडना चाहिये|— मार्टिन लुथर किंग
  7. अगर आपने को धनवान अनुभव करना चाहते है तो वे सब चीजें गिन डालो जो तुम्हारे पास हैं और जिनको पैसे से नहीं खरीदा जा सकता|
  8.  हँसते हुए जो समय आप व्यतीत करते हैं, वह ईश्वर के साथ व्यतीत किया समय है|
  9.  सम्पूर्णता (परफ़ेक्शन) के नाम पर घबराइए नहीं | आप उसे कभी भी नहीं पा सकते|-– सल्वाडोर डाली
  10. सम्पूर्णता की आकांक्षा एक पागल्पन है|

champion (चैम्पियन) लोगो की सोच

  1. जो मनुष्य अपने क्रोध को अपने वश में कर लेता है, वह दूसरों के क्रोध से (फलस्वरूप) स्वयमेव बच जाता है|-– सुकरात
  2. जब क्रोध में हों तो दस बार सोच कर बोलिए , ज्यादा क्रोध में हों तो हजार बार सोचकर|.—जेफरसन
  3. यदि आप जानना चाहते हैं कि ईश्वर रुपए-पैसे के बारे में क्या सोचता होगा, तो बस आप ऐसे लोगों को देखें, जिन्हें ईश्वर ने खूब दिया है|.-– डोरोथी पार्कर
  4. जो भी प्रतिभा आपके पास है उसका इस्तेमाल करें. जंगल में नीरवता होती यदि सबसे अच्छा गीत सुनाने वाली चिड़िया को ही चहचहाने की अनुमति होती|.-– हेनरी वान डायक
  5.  जन्म के बाद मृत्यु, उत्थान के बाद पतन, संयोग के बाद वियोग, संचय के बाद क्षय निश्चित है| ज्ञानी इन बातों का ज्ञान कर हर्ष और शोक के वशीभूत नहीं होते|– महाभारत
  6. क्रोध सदैव मूर्खता से प्रारंभ होता है और पश्चाताप पर समाप्त|
  7. ज्ञानी पुरुषों का क्रोध भीतर ही, शांति से निवास करता है, बाहर नहीं|– खलील जिब्रान
  8. क्रोध एक किस्म का क्षणिक पागलपन है|
  9. आक्रामकता सिर्फ एक मुखौटा है, जिसके पीछे मनुष्य अपनी कमजोरियों को, अपने से और संसार से छिपाकर चलता है|
  10. असली और स्थाई शक्ति सहनशीलता में है| त्वरित और कठोर प्रतिक्रिया सिर्फ कमजोर लोग करते हैं और इसमें वे अपनी मनुष्यता को खो देते हैं|-फ्रांत्स काफ्का
  11.  गोधन, गजधन, बाजिधन और रतनधन खान| जब आवै सन्तोष धन सब धन धूरि समान||—-सन्त कबीर

आलोचना को ignore करो यह असफल बनाती है |

  1. संतोषं परमं सुखम्| (सन्तोष सबसे बडा सुख है)
  2. यदि आवश्यकता आविष्कार की जननी ( माता ) है , तो असन्तोष विकास का जनक ( पिता ) है|
  3. न बन ब्याधि बिपत्ति में , रहिमन मरे न रोय| जो रक्षक जननी-जठर , सो हरि गये कि सोय||:
  4. सुख दुख इस संसार में , सब काहू को होय| ज्ञानी काटै ज्ञान से , मूरख काटै रोय||— कबीरदास
  5. क्रोध ऐसी आंधी है, जो विवेक को नष्ट कर देती है| –अज्ञात
  6.  यदि असंतोष की भावना को लगन व धैर्य से रचनात्मक शक्ति में न बदला जाये तो वह खतरनाक भी हो सकती है|— इंदिरा गांधी
  7.   क्रोध , एक कमजोर आदमी द्वारा शक्ति की नकल है|
  8.   हे भगवान ! मुझे धैर्य दो, और ये काम अभी करो|

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