Karwa Chauth Katha 2024 करवा चौथ की पूजा में जरूर पढ़ें ये कथा, नहीं तो अधूरा रह जाएगा व्रत

Karwa Chauth Katha – पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत रखा जा रहा है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव, माता पार्वती और चंद्रदेव की पूजा करती हैं। इस साल करवा चौथ पर शुक्र अस्त होने का प्रभाव है।

इसलिए कहा जा रहा है कि पहली बार करवा चौथ रखने वाली महिलाएं इस बार से शुरुआत न करें। क्योंकि यह शुभ नहीं माना जा जा रहगा है। जानिए करवा चौथ का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और चंद्रोदय का समय। करवा चौथ के दिन महिलाएं स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लेती हैं और दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को चंद्रमा को अर्ध्य देने के बाद ही व्रत खोलती है।

Karwa Chauth Katha (करवा चौथ )2024

हिंदू धर्म में करवा चौथ साल की सबसे बड़ी चतुर्थी और महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है. इस साल करवा चौथ  01 November 2024, दिन गुरुवार को पड़ रहा है. सुहागिन महिलाओं के लिए करवा चौथ व्रत का विशेष महत्व होता है. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं. दिन भर व्रत रहने के बाद रात में चौथ का चांद देखने के बाद छलनी में पति का चेहरा देखकर ही महिलाएं व्रत का पारण करती हैं!

इस साल का करवा चौथ का त्योहार बेहद शुभ संयोग में मनाया जाने वाला है!  व्रत भगवान गणेश और करवा माता को समर्पित है. करवा माता की पूजा और उनकी कथा पढ़े बिना ये व्रत अधूरा माना जाता है. सुखी दांपत्य जीवन और पति की दीर्धायु के लिए सुहागिनें करवा चौथ व्रत में निर्जल व्रत रखती हैं.

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Karwa Chauth Katha (करवा चौथ )2024 Details

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Karwa Chauth Katha (करवा चौथ )2024

Year 2024
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तिथि और मुहूर्त करवा चौथ 2024 (Karwa Chauth Katha)

करवा चौथ 2024 की तारीख 13 अक्टूबर, गुरुवार
चतुर्थी तिथि प्रारंभ 1 November 2024, 01:59 AM
चतुर्थी तिथि समाप्त 1 November 2024, 03:08 AM
करवा चौथ व्रत का समय 04:27 AM से 09:30 PM
करवा चौथ 2024 पूजा मुहूर्त 05:54 PM से 07:03 PM
करवा चौथ 2024 चंद्रोदय का समय 08:41 PM

करवा चौथ 2024 पर बना रखा शुभ संयोग

इस साल करवा चौथ पर काफी शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ सिद्धि योग बन रहा है। इसके साथ ही इस दिन कन्या राशि में शुक्र और बुध ग्रह की युति हो रही है जिसके कारण लक्ष्मी नारायण योग बन रहा है। इसके अलावा बुध और सूर्य की युति होने सेबुधादित्य योग भी बन रहा है। ऐसे में करवा चौथ रखने से सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आएगी। इस साल करवा चौथ पर दुर्लभ संयोग बन रहा है. 13 अक्टूबर करवा चौथ के दिन सिद्धि योग के साथ कृतिका और रोहिणी नक्षत्र भी रहेगा. जिसे ज्योतिष के अनुसार बहुत शुभ माना जा रहा है. साथ ही इस बार करवा चौथ पर चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृष में रहेंगे. चंद्रमा के उच्च राशि में होने और रोहिणी नक्षत्र के संयोग से इस साल का करवा चौथ सुहागिनों के लिए विशेष फलदायी होगा!

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करवा चौथ 2024 पूजा विधि

करवा चौथ के दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करके पूजा घर की सफाई कर लें.
इसके बाद सास द्वारा दी गई सरगी खाकर निर्जला व्रत का संकल्प लें.
शाम के समय एक मिट्टी की वेदी पर सभी देवताओं की स्थापना करें.
इसमें कम से कम 13 करवे जरूर रखें.
धूप, दीप,चन्दन,रोली और सिन्दूर से पूजन थाली सजाएं.
चन्द्रमा निकलने से लगभग एक घंटे पहले पूजा शुरू कर दें.
पूजा के दौरान महिलाए करवा चौथ कथा सुनती हैं.
छलनी के द्वारा चन्द्र दर्शन करने के बाद अर्घ्य दिया जाता है.
इसके बाद महिलाएं जल ग्रहण कर अपना व्रत खोलें.
सास से अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद लें.

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करवा चौथ व्रत की पहली पौराणिक व्रत कथा (Karwa Chauth Katha)

पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। सेठानी समेत उसकी बहुओं और बेटी ने करवा चौथ का व्रत रखा था। usi ratri को साहूकार के लड़के भोजन करने लगे तो उन्होंने अपनी बहन से भोजन के लिए कहा। इस पर बहन ने जवाब दिया- ‘भाई! अभी चांद नहीं निकला है, उसके निकलने पर अर्ग देकर भोजन करूंगी।’

बहन की बात सुनकर भाइयों ने एक काम किया कि नगर से बाहर जा कर अग्नि जला दी और छलनी ले जाकर उसमें से प्रकाश दिखाते हुए उन्‍होंने बहन से कहा- ‘बहन! चांद निकल आया है। अर्घ्‍य देकर भोजन कर लो।’ यह सुनकर उसने अपने भाभियों से कहा, ‘आओ तुम भी चन्द्रमा को अर्घ्‍य दे लो।’ परन्तु वे इस कांड को जानती थीं, उन्होंने कहा- ‘बाई जी! अभी चांद नहीं निकला है, तेरे भाई तेरे से धोखा करते हुए अग्नि का प्रकाश छलनी से दिखा रहे हैं।’

karwa chouth ki katha

भाभियों की बात सुनकर भी उसने कुछ ध्यान न दिया और भाइयों द्वारा दिखाए गए प्रकाश को ही अर्घ्‍य देकर भोजन कर लिया। इस प्रकार व्रत भंग करने से गणेश जी उस पर अप्रसन्न हो गए। इसके बाद उसका पति सख्त बीमार हो गया और जो कुछ घर में था उसकी बीमारी में लग गया। जब उसने अपने किए हुए दोषों का पता लगा तो उसने पश्चाताप किया गणेश जी की प्रार्थना करते हुए विधि विधान से पुनः चतुर्थी का व्रत करना आरम्भ कर दिया।

श्रद्धानुसार सबका आदर करते हुए सबसे आशीर्वाद ग्रहण करने में ही मन को लगा दिया। इस प्रकार उसकी श्रद्धा भक्ति सहित कर्म को देखकर भगवान गणेश उस पर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवन दान दे कर उसे आरोग्य करने के पश्चात धन-संपत्ति से युक्त कर दिया। इस प्रकार जो कोई छल-कपट को त्याग कर श्रद्धा-भक्ति से चतुर्थी का व्रत करेंगे उन्‍हें सभी प्रकार का सुख मिलेगा।

करवा चौथ 2024 पूजन सामग्री

करवा चौथ की पूजा सामग्री में पान, व्रत कथा की पुस्तक, मिट्‌टी या तांबे का टोटवाला करवा और ढक्कन, कलश, चंदन
फूल, हल्दी, चावल, मिठाई, कच्चा दूध, दही, देसी घी, शहद, शक्कर का बूरा, रोली, कुमकुम, मौली, अक्षत
16 श्रृंगार का सामान,  मेहंदी, महावर, सिंदूर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, छलनी, बिछुआ
छलनी, करवा माता की तस्वीर, दीपक, अगरबत्ती, कपूर, गेहूं, बाती (रूई)लकड़ी का आसन,  दक्षिणा के पैसे, हलुआ, आठ पूरियों की अठावरी

करवा चौथ (Karwa Chauth Katha) 2024 पूजा विधि

करवा चौथ के दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करके पूजा घर की सफाई कर लें!
इसके बाद सास द्वारा दी गई सरगी खाकर निर्जला व्रत का संकल्प लें!
शाम के समय एक मिट्टी की वेदी पर सभी देवताओं की स्थापना करें!
इसमें कम से कम 13 करवे जरूर रखें!
धूप, दीप,चन्दन,रोली और सिन्दूर से पूजन थाली सजाएं!
चन्द्रमा निकलने से लगभग एक घंटे पहले पूजा शुरू कर दें!
पूजा के दौरान महिलाए करवा चौथ कथा सुनती हैं!
छलनी के द्वारा चन्द्र दर्शन करने के बाद अर्घ्य दिया जाता है!
इसके बाद महिलाएं जल ग्रहण कर अपना व्रत खोलें!
सास से अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद लें!

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करवा चौथ की थाली में रखें ये चीजें

माता पार्वती और शिवजी की मूर्ति या फोटो, चंदन, सिंदूर, हल्दी, पानी का कलश, दक्षिणा के लिए पैसे, आसन, करवा चौथ व्रत कथा पुस्तक, अगरबत्ती, फूल, घी, बाती, मिठाई, गंगाजल, अक्षत, कुमकुम, दीपक, कपूर, श्रृंगार का सामान (दान के लिए) आदि की आवश्यकता होती है। मिट्टी का करवा, दीपक, सिंदूर, अक्षत, फूल, फल, पानी से भरा कलश, छलनी, तांस की तीलियां और मिठाई जैसी सामग्रियों की आवश्यकता होगी।

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करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय

देश के प्रमख शहरों में करवा चौथ पर चांद के निकलने का समय

करवा चौथ पर चांद निकलने का समय
शहर समय
दिल्ली   8 बजकर 09 मिनट पर
नोएडा   8 बजकर 08 मिनट पर
मुंबई   8 बजकर 48 मिनट पर
जयपुर   8 बजकर 18 मिनट पर
देहरादून   8 बजकर 02 मिनट पर
लखनऊ   7 बजकर 59 मिनट पर
शिमला   8 बजकर 03 मिनट पर
गांधीनगर   8 बजकर 51 मिनट पर
इंदौर   8 बजकर 27 मिनट पर
भोपाल   8 बजकर 21 मिनट पर
अहमदाबाद   8 बजकर 41 मिनट पर
कोलकाता   7 बजकर 37 मिनट पर
पटना   7 बजकर 44 मिनट पर
प्रयागराज   7 बजकर 57 मिनट पर
कानपुर   8 बजकर 02 मिनट पर
चंडीगढ़   8 बजकर 06 मिनट पर
लुधियाना   8 बजकर 10 मिनट पर
जम्मू   8 बजकर 08 मिनट पर
बंगलूरू   8 बजकर 40 मिनट पर
गुरुग्राम   8 बजकर 21 मिनट पर
असम   7 बजकर 11 मिनट पर

निष्कर्ष (Karwa Chauth Katha)

हिन्दू धर्म में करवा चौथ का व्रत सुहागिनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। करवा चौथ के दिन जितना महत्व व्रत और पूजा करने का होता है। उतना ही महत्व करवा चौथ की कथा का भी है। इसलिए इस कथा को बड़े ही एकाग्र होकर सुनना चाहिए। कभी-कभी हम देखते है कि कई महिलाएं ऐसी होती है कि वह एकचित्त होकर नहीं सुनती है। उनका मन और कहीं लगा होता है। जो शास्त्रों के अनुसार गलत माना जाता है।

करवा चौथ व्रत की तैयारियां जोरों-शोरों पर चल रही हैं। आमतौर पर ये व्रत विवाहित महिलाओं द्वारा पति की लंबी उम्र और खुशहाल जीवन के लिए रखा जाता है। लेकिन कई जगह पर ये व्रत अविवाहित कन्याएं भी रखती हैं। इस बार करवा चौथ 13 अक्टूबर को मनाई जाएगी। ये व्रत निर्जला रखा जाता है यानी इस व्रत में अन्न और जल कुछ भी ग्रहण नहीं किया जाता है। साथ ही इस व्रत से जुड़े कुछ जरूरी नियम होते हैं जिनका पालन करना जरूरी माना जाता है। अगर आप पहली बार व्रत रख रही हैं तो हमारे इस ब्लॉग में आपको कुछ रोमांचक तथ्य और जानकारियां प्राप्त होंगी।

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