COVID -19 एक पलक के कारणे,युं ना कलंक लगाय।

COVID -19 *एक पलक के कारणे,युं ना कलंक लगाय।”* अर्थात आज के परिपेक्ष्य में इस कोरोना महामारी की vaccine  इजाद करने में कई देश लगे हुए है और सफलता के कगार पर भी है लेकिन अभी पूर्णतया सफलता प्राप्त नहीं की है | लेकिन धैर्य और जरुरी नियमो का पालन करेंगे तो covid -19 की vaccine भी जल्दी ही ईजाद होगी और लोगो का जीवन इससे बचाया जा सकेगा | इस प्रेरणादायक कहानी से इसे समझ सकते है कुछ इस प्रकार – 

एक राजा को राज करते काफी समय हो गया था | बाल भी सफ़ेद होने लगे थे | एक दिन उसने अपने दरबार में उत्सव रखा और अपने मित्र देश के राजाओं को भी सादर आमन्त्रित किया व अपने गुरुदेव को भी बुलाया | उत्सव को रोचक बनाने के लिए राज्य की सुप्रसिद्ध नर्तकी को भी बुलाया गया |
राजा ने कुछ स्वर्ण मुद्रायें अपने गुरु जी को भी दी, ताकि नर्तकी के अच्छे गीत व नृत्य पर वे भी उसे पुरस्कृत कर सकें | सारी रात नृत्य चलता रहा | ब्रह्म मुहूर्त की बेला आई, नर्तकी ने देखा कि मेरा तबले वाला ऊँघ रहा है और तबले वाले को सावधान करना ज़रूरी है, वरना राजा का क्या भरोसा दंड दे दे |
तो उसको जगाने के लिए नर्तकी ने एक दोहा पढ़ा –

*”घणी गई थोड़ी रही,या में पल पल जाय।*
*एक पलक के कारणे,युं ना कलंक लगाय।”*

friend अच्छा मित्र कौन ? जानिए विस्तार से |

अब इस दोहे का अलग-अलग व्यक्तियों ने अपने अनुरुप अर्थ निकाला |
तबले वाला सतर्क होकर बजाने लगा |

जब यह दोहा *गुरु जी* ने सुना, तो गुरुजी ने सारी मोहरें उस नर्तकी को अर्पण कर दी |
दोहा सुनते ही राजकुमारी ने भी अपना नौलखा हार नर्तकी को भेंट कर दिया |
दोहा सुनते ही युवराज ने भी अपना मुकुट उतारकर नर्तकी को समर्पित कर दिया  |
राजा बहुत ही अचम्भित हो गया सोचने लगा रात भर से नृत्य चल रहा है पर यह क्या!
अचानक एक दोहे से सब अपनी मूल्यवान वस्तु बहुत ही ख़ुश हो कर नर्तकी को समर्पित कर रहें हैं ?

राजा सिंहासन से उठा और नर्तकी को बोला *एक दोहे* द्वारा एक नीच या सामान्य नर्तकी होकर तुमने सबको लूट लिया |

जब यह बात राजा के गुरु ने सुनी तो गुरु के नेत्रों में आँसू आ गए और गुरुजी कहने लगे – “राजा ! इसको नीच नर्तकी मत कह, ये अब मेरी गुरु बन गयी है, क्योंकि इसके दोहे ने मेरी आँखें खोल दी हैं। दोहे से यह कह रही है कि मैं सारी उम्र जंगलों में भक्ति करता रहा और आखिरी समय में नर्तकी का मुज़रा देखकर अपनी साधना नष्ट करने यहाँ चला आया हूँ, भाई ! मैं तो चला ।” यह कहकर गुरुजी तो अपना कमण्डल उठाकर जंगल की ओर चल पड़े |

राजा की लड़की ने कहा – “पिता जी ! मैं जवान हो गयी हूँ | आप आँखें बन्द किए बैठे हैं, मेरा विवाह नहीं कर रहे थे | आज रात मैं आपके महावत के साथ भागकर अपना जीवन बर्बाद करने वाली थी | लेकिन इस नर्तकी के दोहे ने मुझे सुमति दी, कि जल्दबाज़ी न कर, हो सकता है तेरा विवाह कल हो जाए, क्यों अपने पिता को कलंकित करने पर तुली है ?”

युवराज ने कहा – महाराज ! आप वृद्ध हो चले हैं, फिर भी मुझे राज नहीं दे रहे थे | मैं आज रात ही आपके सिपाहियों से मिलकर आपको मारने वाला था | लेकिन इस दोहे ने समझाया कि पगले ! आज नहीं तो कल आखिर राज तो तुम्हें ही मिलना है, क्यों अपने पिता के खून का कलंक अपने सिर पर लेता है! थोड़ा धैर्य रख |”

जब ये सब बातें राजा ने सुनी तो राजा को भी आत्म ज्ञान हो गया | राजा के मन में वैराग्य आ गया | राजा ने तुरन्त फैंसला लिया -“क्यों न मैं अभी युवराज का राजतिलक कर दूँ।” फिर क्या था, उसी समय राजा ने युवराज का राजतिलक किया और अपनी पुत्री को कहा – “पुत्री ! दरबार में एक से एक राजकुमार आये हुए हैं | तुम अपनी इच्छा से किसी भी राजकुमार के गले में वरमाला डालकर पति रुप में चुन सकती हो |”

राजकुमारी ने ऐसा ही किया और राजा सब त्याग कर जंगल में गुरु की शरण में चला गया |

यह सब देखकर नर्तकी ने सोचा -“मेरे एक दोहे से इतने लोग सुधर गए, लेकिन मैं क्यूँ नहीं सुधर पायी ?”
उसी समय नर्तकी में भी वैराग्य आ गया । उसने उसी समय निर्णय लिया कि आज से मैं अपना नृत्य बन्द करती हूँ |
“हे प्रभु ! मेरे पापों से मुझे क्षमा करना। बस, आज से मैं सिर्फ तेरा नाम सुमिरन करुँगी  ”
संक्रमण काल काफ़ी निकल चुका है, बस ! थोड़ा ही बचा है |
—- आज हम इस दोहे को covid -19 अर्थात कोरोना को लेकर अपनी समीक्षा करके देखे , तो हमने पिछले 22 मार्च से जो संयम बरता, परेशानियां झेली, ऐसा न हो कि अंतिम क्षण में एक छोटी सी भूल, हमारी covid -19 के प्रति लापरवाही, हमारे साथ पूरे समाज/गाँव/शहर/राज्य को न ले बैठे |
आओ हम सब मिलकर कोरोना से संघर्ष करें | 
घणीगई _थोड़ी रही, _या _में _पल_पल _जाय |
एक _पलक _रे _कारणे, _युं _ना _कलंक _लगाय |”
घर पर रहें, सुरक्षित रहें , मास्क जरुर लगाए व सावधानियों का विशेष ध्यान रखें | 

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COVID-19 * Because of an eyelid, do not blur. “* That is, in today’s context, many countries are engaged in the vaccine of this corona epidemic and are on the verge of success but have not yet achieved complete success. But if you obey the patience and the necessary rules, then the vaccine of covid-19 will also be developed soon and the life of the people will be saved from it. With this inspiring story, you can understand it in this way –

It had been a long time while ruling a king. The hair was also becoming white. One day he held a celebration in his court and invited the kings of his friendly country and also invited his Gurudev. The famous dancer of the state was also called to make the festival interesting.
The king also gave some gold coins to his guru, so that he could also reward the dancer on good songs and dances. The dance continued all night. Bala of the Brahma Muhurta came, the dancer saw that my tabla is rising and it is necessary to caution the tabla, otherwise the king’s trust should be punished.
So to wake her up, the dancer read a couplet –

* “It was a little dense, or I should have a moment.”
* Blink because of an eyelid.

Now this couplet has been interpreted differently by different people.
The tabla started playing alert and alert.

When Guru * heard this couplet, Guruji offered all the pieces to that dancer.
On hearing the couplet, the princess also presented her gourd necklace to the dancer.
On hearing the crown, the crown prince also removed his crown and dedicated it to the dancer.
The king was very surprised and started thinking that what is the dance going on all night!
Suddenly, with a couplets, everyone is very happy, dedicating themselves to the dancer?

The king got up from the throne and said to the dancer * You robbed everyone by being a lowly or ordinary dancer by a couple of couches *.

When the Guru’s King heard this, the Guru’s eyes welled up and Guruji started saying, “King, don’t call it a lowly dancer, it has now become my Guru, because its couplet has opened my eyes. It is saying that I have been doing devotion in the forests all my life and seeing the dancer’s last time I have come here to destroy my practice, brother! I have left. ” Saying this, Guruji picked up his mantle and walked towards the forest.

The king’s girl said – “Father! I am young. You are closing your eyes, not marrying me. Tonight I was going to waste my life by running away with your Mahavat. But this dancer’s couplets Told me, don’t be rushed, maybe you get married tomorrow, why are you trying to tarnish your father? ”

The Crown Prince said – Your Majesty! You have grown old, yet were not giving me the secret. I was going to meet your soldiers tonight and kill you. But this couple explained that Pagle! If not today then tomorrow you have to meet the secret, why take the stigma of your father’s blood on your head! Be patient. ”

When the king heard all these things, the king also became self-knowledge. The king’s mind got restless. The king immediately took the decision – “Why don’t I crown the crown prince now.” What then was the king crowned the crown prince at the same time and said to his daughter – “Daughter! One prince has come to the court. You can choose any prince as a husband by putting a garland on the neck of any prince.” ”

The princess did the same and the king renounced all and went to the Guru’s shelter in the forest.

Seeing all this, the dancer thought – “So many people have improved with my couplets, but why have I not been able to improve?”
At the same time, the dancer also got disinterest. He decided at the same time that from today onwards I stop my dance.
“Lord! Forgive me of my sins. Enough, from today onwards I will only listen to your name”
The transition period is over, that’s all! Only a few are left.
—- Today we looked at this couplet by reviewing it with covid-19 i.e. Corona, so we have faced the same restraint, troubles since last March 22, lest a small mistake at the last moment, our covid-19 Negligence towards us, do not take the whole society / village / city / state with us.
Let’s all fight together Corona.
Ghanigai is a little bit, _ or _ in _
“_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ |
Stay at home, stay safe and take special care of precautions.


 

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