Edge Computing और इसका महत्त्व क्या है?

Edge Computing- विगत कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर एज कंप्यूटिंग (Edge Computing) के माध्यम से लाखों कंप्यूटर या अन्य मशीनों से डेटा को संचालित (Handling), प्रोसेसिंग (Processing) तथा डिलीवर (Deliver) किया जा रहा है। एज कंप्यूटिंग का सर्वाधिक प्रयोग इंटरनेट ऑफ थिंग्स (Internet of Things- IoT), रियल टाइम कंप्यूटिंग (Real Time Computing) आदि के लिये किया जा रहा है।

तेज़ नेटवर्किंग तकनीकी के दौर में Edge Computing का प्रयोग रियल-टाइम एप्लीकेशन (Real-Time Application) के निर्माण तथा उनके संचालन के लिये अत्यावश्यक है। इन एप्लीकेशनों में वीडियो प्रोसेसिंग एवं एनालिटिक्स, स्वचालित कार, रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence- AI) आदि शामिल हैं।

Edge Computing

भूमिका:

  • एज कंप्यूटिंग को समझने के लिये हमें क्लाउड कंप्यूटिंग (Cloud Computing) को समझना आवश्यक है। वर्तमान में हम क्लाउड कंप्यूटिंग के दौर से गुज़र रहे हैं जहाँ अधिकांश व्यक्ति किसी-न-किसी प्रकार से क्लाउड कंप्यूटिंग का प्रयोग करते हैं।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग के तहत जब कोई यूज़र ऑनलाइन कार्यों का संपादन कर रहा होता है तब वह सुदूर स्थित किसी डेटा सेंटर की सूचनाओं को एक्सेस (Access) करता है जिसे क्लाउड कहते हैं। उदाहरण के तौर पर ऑनलाइन वीडियो या फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर, एंटी वायरस एप्लीकेशन, ऑनलाइन फाइल कनवर्टर, ई-कॉमर्स एप्लीकेशन, डेटा बैकअप और रिकवरी आदि क्लाउड कंप्यूटिंग के तहत कार्य करते हैं।
  • ये डेटा सेंटर (क्लाउड) पूरे विश्व में कुछ ही स्थानों पर स्थित हैं जहाँ डेटा को संग्रहीत तथा प्रोसेस किया जाता है। विश्व के अधिकांश डेटा सेंटर गूगल, अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट आदि प्रमुख तकनीकी कंपनियों द्वारा संचालित किये जाते हैं।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग में हमारी सूचनाएँ तथा डेटा किसी स्थानीय हार्डडिस्क (Hard Disk) या मेमोरी कार्ड (Memory Card) आदि में संरक्षित नहीं रहता बल्कि यह ऑनलाइन क्लाउड में संरक्षित रहता है। इस प्रकार के डेटा को एक्सेस करने के लिये हमें केवल इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता होती है।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग के तहत क्लाउड स्टोरेज (Cloud Storage) शामिल होता है जिसमें कोई व्यक्ति अपनी निजी सूचनाएँ व डेटा जैसे- फोटो, वीडियो, म्यूज़िक, डाक्यूमेंट्स आदि सुरक्षित रख सकता है। गूगल ड्राइव (Google Drive), ड्रॉपबॉक्स (Drop Box), आई क्लाउड (iCloud) आदि क्लाउड स्टोरेज की सुविधा प्रदान करने वाले एप्लीकेशन हैं।

इसके अलावा क्लाउड कंप्यूटिंग में कई तरह की समस्याएँ भी हैं जो कि इस प्रकार हैं:

  • लेटेंसी (Latency): दूर स्थित किसी डेटा सेंटर या क्लाउड से वास्तविक समय में संपर्क कर पाने में हुई देरी को लेटेंसी कहते हैं।
  • अपर्याप्त बैंडविड्थ (Bandwidth): उन कंपनियों में जहाँ एक साथ कई डिवाइसेज़ द्वारा किसी क्लाउड स्टोरेज में डेटा प्रेषित किया जाता है, वहाँ निर्धारित बैंडविड्थ पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और इस वजह से उन्हें इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग की मुख्य समस्या हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन (High Speed Internet Connection) पर इसकी निर्भरता है। सुदूर स्थित क्लाउड से डेटा एक्सेस करने के लिये हाई-स्पीड इंटरनेट की उपलब्धता आवश्यक होती है।

Edge Computing क्या है?

  • Edge Computing दो शब्दों से मिलकर बना है जिसमें एज (Edge) अर्थात् किनारा तथा कंप्यूटिंग (Computing) अर्थात् संगणना। क्लाउड कंप्यूटिंग के विपरीत एज कंप्यूटिंग के अंतर्गत संगणना संबंधी कार्यों के लिये डेटा का संग्रह डिवाइसेज़ के निकट ही किया जाता है।
  • दूसरे शब्दों में कहें तो यह एक नई नेटवर्किंग प्रणाली है, जिसके तहत डेटा स्रोत/सर्वर तथा डेटा प्रोसेसिंग को कंप्यूटिंग प्रक्रिया के निकट लाया जाता है ताकि लेटेंसी और बैंडविड्थ की समस्या को कम किया जा सके और किसी एप्लीकेशन की क्षमता में वृद्धि की जा सके।
  • इसके विपरीत क्लाउड कंप्यूटिंग में डेटा का स्रोत मशीन से हज़ारों किलोमीटर दूर स्थित हो सकता है।

Edge Computing

  • Edge Computing के तहत डेटा सर्वर को स्थानीय स्तर पर लगाने से डेटा का संग्रह तथा उसकी प्रोसेसिंग स्थानीय स्तर पर होती है और केवल आवश्यक डेटा को ही सुदूर स्थित क्लाउड पर भेजा जाता है। इससे जहाँ लेटेंसी कम होती है, वहीं बैंडविड्थ पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं पड़ता।
  • Edge Computing को IoT आधारित मशीनों के बढ़ते प्रयोग को देखते हुए विकसित किया गया है। ये मशीनें क्लाउड से डेटा प्राप्त करने या डेटा के प्रेषण हेतु इंटरनेट पर निर्भर होती हैं। इनमें से अधिकांश अपने कार्यान्वयन के दौरान अत्यधिक मात्रा में डेटा उत्पन्न करती हैं।
  • उदाहरण के तौर पर किसी फैक्ट्री में स्थापित कोई डिवाइस या कैमरा जो सुदूर स्थित किसी ऑफिस में डेटा संप्रेषित कर रहा हो, वहाँ एज कंप्यूटिंग उपयोगी हो सकता है। क्योंकि किसी एक डिवाइस से डेटा संप्रेषण करना आसान होता है लेकिन यदि किसी एक समय में कई डिवाइसेज़ एक साथ डेटा संप्रेषित कर रहे हों तो इससे न केवल संप्रेषित डेटा की गुणवत्ता प्रभावित होती है बल्कि लेटेंसी की समस्या भी उत्पन्न होती है और प्रयोग किये गए बैंडविड्थ की कीमत भी अत्यधिक होती है। एज कंप्यूटिंग द्वारा स्थानीय स्तर पर डेटा की प्रोसेसिंग तथा संग्रह से इन समस्याओं को हल किया जा सकता है।
  • इन एज डिवाइसेज़ में विभिन्न मशीनें शामिल हो सकती हैं जैसे- IoT सेंसर, लैपटॉप, स्मार्टफोन, सीसीटीवी कैमरा, इंटरनेट से संचालित माइक्रोवेव ओवन या टोस्टर इत्यादि।

Benefits of Edge Computing 

  • कई कंपनियों के लिये क्लाउड कंप्यूटिंग का प्रयोग महँगा साबित होता है क्योंकि अत्यधिक मात्रा में डेटा संग्रह और बैंडविड्थ के प्रयोग से इसकी लागत बढ़ जाती है। एज कंप्यूटिंग इस मामले में एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
  • Edge Computing का सर्वाधिक लाभ यह है कि यह डेटा की प्रोसेससिंग तथा संग्रह तीव्रता से कर सकता है जिससे यूज़र के लिये आवश्यक रियल-टाइम एप्लीकेशन की दक्षता को बढ़ाया जा सके।
  • उदाहरण के लिये किसी व्यक्ति के चेहरे की पहचान करने वाला स्मार्टफोन क्लाउड कंप्यूटिंग के अंतर्गत फेशियल रिकग्निशन एल्गोरिथम (Facial Recognition Algorithm) हेतु क्लाउड आधारित सेवा का उपयोग करता है जिसमें अधिक समय लगता है। लेकिन एज कंप्यूटिंग के प्रयोग से वह स्मार्टफोन स्वयं में उपस्थित या किसी स्थानीय एज सर्वर के प्रयोग से उस एल्गोरिथम का प्रयोग कर बिना देर किये व्यक्ति की पहचान कर सकता है।
  • Edge Computing के प्रयोग से स्वचालित कारें (Self-Driving Cars), स्वचालित निर्माण प्रणाली (Automated Building System) तथा स्मार्ट सिटी (Smart City) जैसी महत्त्वाकांक्षी परियोजनाओं में मदद मिलेगी।
  • एज कंप्यूटिंग को बढ़ावा देने के लिये कई कंपनियाँ AI की बढ़ती मांग को देखते हुए छोटे चिप के आकार के एज डिवाइसेज़ एवं मॉड्यूल्स (Modules) का निर्माण कर रही हैं जिनका प्रयोग ड्रोन, रोबोट्स या अन्य चिकित्सीय यंत्रों में किया जा सकता है।
  • इनके प्रयोग से इन मशीनों को डेटा प्रोसेसिंग के लिये किसी क्लाउड की आवश्यकता नहीं होगी बल्कि इन एज डिवाइसों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ही डेटा को प्रोसेस तथा उसका संग्रह किया जा सकता है।
  • मोबाइल क्षेत्र में 5G तकनीकी आने के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे एज कंप्यूटिंग के क्षेत्र में तीव्र प्रगति होगी तथा ऑटोमेशन (Automation), AI, रियल-टाइम प्रोसेसिंग के लिये अनुकूल माहौल मिलेगा।

एज कंप्यूटिंग में निहित संभावित चुनौतियाँ:

  • डेटा सुरक्षा के दृष्टिकोण से Edge Computing की विश्वसनीयता पर संदेह व्यक्त किया जा रहा है। विभिन्न मशीनों में अलग-अलग डेटा संग्रह के कारण यह एक केंद्रीकृत अथवा क्लाउड आधारित प्रणाली की तुलना में कम सुरक्षित माना जा रहा है। जैसे वर्तमान में क्लाउड कंप्यूटिंग में डेटा सुरक्षा की ज़िम्मेदारी मुख्य रूप से गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल, अमेज़न आदि उन कंपनियों की है जिनकी विश्वसनीयता अधिक है।
  • इसके अलावा अलग-अलग डिवाइसेज़ में डेटा प्रोसेसिंग के लिये आवश्यक उर्जा, विद्युत और नेटवर्क कनेक्टिविटी की आवश्यकता आदि इसके समक्ष मुख्य चुनौतियाँ हैं।
  • जहाँ एक सामान्य पर्सनल कंप्यूटर में हम सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल करते हैं, वहीं Edge Computing में हम केवल उपयोग करते हैं। इसका तात्पर्य है कि Edge Computing में डेटा का नियंत्रण यूज़र के पास न होकर एज डिवाइस के पास होता है जो कि इसकी गोपनीयता तथा सुरक्षा के लिये संदेहास्पद हो सकता है।

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