what is Software Engineering in Hindi – सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग से जुड़ी पूरी जानकारी

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software engineering

software engineering- Software engineering का अर्थ एक ऐसी इंजीनियरिंग से है जिसमें कंप्यूटर सिस्टम तथा किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के लिए सॉफ्टवेयर का निर्माण किया जाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो “सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग एक प्रक्रिया है जिसमें user की जरूरतों को analyze किया जाता है और इन जरूरतों के आधार पर software को बनाया जाता है।

Software Engineering क्या हैं?

Software engineering एक प्रकार का computer engineering कोर्स होता है जो दो शब्दों software और engineering से मिलकर बना है। दूसरे शब्दों में कहें तो सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग IT की एक branch है जिसमें विभिन्न प्रकार की software designing, deployment, Maintaining, testing, programing आदि के बारे में सिखाया जाता है। इसमें कई प्रकार की programming languages का use होता है जिसमें HTML, JAVA, PHP, C/C++, Python शामिल हैं। एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने के लिए आपको इन सभी programing languages की knowledge होना बहुत जरूरी है।

Software engineer वह होता है जो user की requirement के अनुसार विभिन्न programing languages में coding करके एक software develop करता है। उसकी testing करके उसे maintain करता है। Software engineer बनने के लिए इन सब programming languages की जानकारी होना बहुत जरूरी है। Programming languages को सीखना बहुत मुश्किल नहीं होता है। Software engineer बनने के लिए languages सीखना बेहद important है क्योंकि इसके बिना software engineer नहीं बना जा सकता है।

Software Engineering की Importance

नीचे आपके लिए software engineering in Hindi में उसकी importance बताई जा रही है।

  • बड़े softwares को manage और उसके रख-रखाव करने के लिए।
  • बेहतर और ज्यादा scalability के लिए।
  • Cost management करने के लिए, इसके लिए सही process को follow करना बहुत ज़रूरी होता है।
    Software का dynamic nature हमेशा बदलता रहता है और उसमें समय के अनुसार update करने की आवश्यकता होती है।
  • बेहतर और advanced quality management के लिए।

Software Engineering के लाभ

नीचे आपके लिए Software engineering in Hindi में लाभ इस प्रकार हैं।

  1. यह बड़े software की complexities को कम करता है। बड़ा software हमेशा थोड़ा complicated और challenge भरा होता है। Software engineering के द्वारा बड़े projects की complexities को कम किया जा सकता है। जिससे छोटी problems को आसानी से solve किया जा सकता है।
  2. Software की मदद से projects को handle करना आसान होता है। बड़े projects को पूरा करने में बहुत समय लगता है और इसके लिए बहुत planning करनी पड़ती है। अगर हम software engineering के methods को follow करते हैं तो बड़े projects को आसानी से संभाला जा सकता है।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर कैसे बनें: Step by Step Guide 

सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने के लिए नीचे step by step guide दी गई है जो आपके सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने के सपने को पूरा करेगी ।

स्कूल स्तर से शुरू करें

सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने की शुरुआत स्कूली स्तर से ही की जाती है। 10वीं बोर्ड के बाद science stream के लिए opt करना पड़ता है। आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विज्ञान विषयों में पढ़ाए जाने वाले सभी बुनियादी विषयों पर आपकी अच्छी पकड़ हो, क्योंकि स्कूल के बाद इस क्षेत्र में higher education की डिग्री हासिल करने के योग्य होने के लिए यह आवश्यक है। साथ ही, आपको विज्ञान विषयों में अच्छे अंकों की आवश्यकता होगी ताकि आप अपनी आगे की पढ़ाई के लिए सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में से एक में अध्ययन करने की न्यूनतम आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।

Bachelor’s Degree प्राप्त करें

सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम इस क्षेत्र या संबंधित क्षेत्र में स्नातक की डिग्री प्राप्त करना है। चूंकि सभी विश्वविद्यालय सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में bachelor’s degree प्रदान नहीं करते हैं, इसलिए computer science में स्नातक के लिए जाना एक अच्छा विचार है, क्योंकि यह computer science के तहत एक विशेष क्षेत्र है। Computer science में bachelor’s 4 साल की अवधि का होता है और इसमें उन सभी आवश्यक विषयों को शामिल किया जाएगा जो आपको एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने के लिए मास्टर करने की आवश्यकता है।

आप संबंधित क्षेत्र में डिप्लोमा करके भी एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन सकते हैं, bachelor’s degree प्राप्त करना एक अच्छा विचार है क्योंकि शीर्ष कंपनियां अक्सर कम से कम स्नातक की डिग्री रखने वाले उम्मीदवारों को काम पर रखना पसंद करती हैं।

Internship

Internship में अपनी skills को practice में लाने में मदद कर सकती है। जब आप अपनी undergraduate degree प्राप्त कर रहे हों या इसे पूरा करने के बाद भी internship के अधिक से अधिक अवसरों का लाभ उठाना सुनिश्चित करें। ये internship आपको एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर द्वारा किए जाने वाले विभिन्न कार्यों की बहुत आवश्यक समझ प्रदान करेगी और आपके भविष्य के प्रयासों में सफलता प्राप्त करने में आपकी सहायता करेगी।

Skills को Update करें

कंप्यूटर विज्ञान में bachelor’s degree आपको एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने के योग्य बनाती है, आपको न केवल अन्य उम्मीदवारों पर लाभ प्राप्त करने के लिए, बल्कि विभिन्न नौकरी पदों के लिए खुद को तैयार करने के लिए अपने कौशल को उन्नत करने की आवश्यकता है। विभिन्न प्रोग्रामिंग भाषाओं जैसे कि Python, C++, Java आदि को सीखना आपको दूसरों पर प्रतिस्पर्धा में बढ़त दिला सकता है।

अपनी skills को विकसित करने का एक और तरीका है कि आप नए सॉफ्टवेयर बनाने में अपना हाथ आजमाएं – इससे आप अपने ज्ञान को व्यावहारिक उपयोग में ला सकेंगे। इसके अलावा, आप आगे नौकरी के अवसरों को खोलने के लिए सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में master’s का विकल्प भी चुन सकते हैं।

Job के लिए Apply करें

सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने की दिशा में अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण कदम नौकरियों के लिए आवेदन शुरू करना है। सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग नौकरी के लिए आदर्श उम्मीदवार के रूप में माने जाने के लिए आपको अपने सभी skills और experience को उजागर करते हुए एक आदर्श फिर से शुरू करना होगा। शुरू में आपको एक छोटी कंपनी में नौकरी करनी पड़ सकती है, लेकिन जैसे-जैसे आप अनुभव और अपने कौशल का निर्माण करते रहेंगे, आप जल्द ही अपनी सपनों की कंपनी में एक पद पाने के लिए उठ सकते हैं।

Skills Required

तेजी से बदलते उद्योग में बने रहने और दूसरों पर बढ़त हासिल करने के लिए, software engineers को अपनी techniques और soft skills को तेज करना चाहिए। निम्नलिखित कुछ soft skills हैं जो आपके करियर को बढ़ा सकते हैं।

  • Problem solving
  • Multitasking
  • Good communication skills
  • Active listener
  • Management
  • Attention to details

12th के बाद सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग कोर्स

Software engineering कोर्सेस् में एडमिशन लेने के लिए आपको बारहवीं क्लास साइंस स्ट्रीम से पास करना होगा जिसमें आपके फिजिक्स(Physics), केमेस्ट्री(Chemistry), मैथ्स (Maths)और कंप्यूटर साइंस(Computer Science) होनी चाहिए। Software engineering in Hindi में जानिए 12th के बाद आगे के courses के बारे में।

  1. CS Diploma
  2. IT  
  3. BCA
  4. B.Tech  
  5. M.Tech  
  6. ME 
  7. B.Sc 
  8. MSc
  9. PhD 

सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग मे कौन कौन से Subjects होते हैं?

Software engineering एक प्रोफारेशनल डिग्री कोर्स है  जिसमें कई तरह के विषय पढ़ाए जाते हैं तो आइए जानते हैं कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग मे किस किस विषय को पढ़ाया जाता है और इसमे  कितने सब्जेक्ट होते हैं-

Software Development Approaches

  • Introduction
    Evolving roll of software
  • Software Characteristics
  • Software Applications

software engineering define –

  1. Definitions of software engineering
  2. The serial and linear Development Model
  3. Iterative Development model
  4. The incremental development model
  5. The parallel or concurrent development model
  6. Hacking
  7. Software Reliability

यह भी पढे- software के प्रकार और परिभाषा क्या है ? जानिए

Introduction

  1. Software Reliability Metrics
  2. Programming for Reliability
  3. Fault Avoidance
  4. Fault Tolerance
  5. Software Reuse
  6. Software Design Principles

Massachusetts Institute of Technology (MIT)

Stanford University
Cambridge University
ETH Zurich – Swiss Federal Institute of Technology
The University of California, Berkeley (UCB)
Oxford University
Imperial College London
Nanyang Technological University
करियर के विकल्प
आइए इस क्षेत्र में नौकरी के कुछ अवसरों पर एक नज़र डालें। स्नातकों के पास नौकरी के ढेर सारे अवसर हैं, खासकर क्योंकि यह हर दिन नए और बेहतर सॉफ्टवेयर और ऐप्स की आवश्यकता के कारण तेजी से बढ़ता हुआ उद्योग है। यहां कुछ नौकरी के पद दिए गए हैं जिन्हें आप चुन सकते हैं:

Software engineer
Software Architect
Software expert
Chief technical officer
Software trainee developer
Cyber security manager
Software developer
Sales manager
Video game designer
Programmer

software engineering salary

Software engineers in Hindi में salaries इस प्रकार हैं।

एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की सैलरी कंपनियों पर निर्भर करती है कि आपको किन-किन technology और computer languages की knowledge है।
एक software engineer की शुरुआती salary कम से कम 20-40 हजार रुपए प्रति महीना होती है, Delhi और Bangalore में एक सॉफ्टवेयर इंजीनीयर को 45 से 50 हजार रुपए प्रति महीना मिलते हैं।
उसके बाद एक एक्सपर्ट सॉफ्टवेयर इंजीनियर को 70-80 लाख रुपए प्रतिवर्ष सैलरी मिलती है।
अगर आप किसी multinational कंपनी जैसे Google में कम कर रहे हैं तो आप की सैलरी 1 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष तक भी हो सकती है।

software engineering waterfall model

waterfall model in hindi:-

सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के लिए waterfall model (वॉटरफॉल मॉडल) SDLC(सिस्टम डेवलपमेंट लाइफ साइकिल) का एक प्रसिद्ध और अच्छा version है। waterfall model (वॉटरफॉल मॉडल) linear तथा sequential मॉडल है इसका अर्थ यह है कि एक डेवलपमेंट phase तब तक शुरू नही हो सकता जब तक कि उसका पिछला वाला phase पूरा नही हो जाता है। हम वॉटरफॉल मॉडल में phases को overlap नही कर सकते है।

“हम वॉटरफॉल को निम्न तरीके से imagine कर सकते है:-
एक बार जब पानी चट्टान के किनारे के ऊपर से प्रवाहित होने लगता है और पहाड़ के नीचे की ओर गिरने लगता है और यह पानी ऊपर की ओर वापस नही जा सकता है।”

इसी प्रकार waterfall model भी कार्य करता है, एक बार डेवलपमेंट का एक phase पूरा हो जाता है तो हम अगले phase में चले जाते है लेकिन वापस पिछले phase में नही जा सकते है।

वॉटरफॉल मॉडल में, एक phase का आउटपुट दूसरे phase के लिए इनपुट की तरह कार्य करता है।

वॉटरफॉल मॉडल में निम्नलिखित 5 phases होते है  (waterfall phases in hindi):-

software engineering waterfall model
software engineering waterfall model

1:-Requirement phase:- requirement phase वॉटरफॉल मॉडल का सबसे पहला phase है। इस फेज में सिस्टम की requirements को एकत्रित तथा documented किया जाता है। यह फेज बहुत crucial होता है क्योंकि इसी फेज पर अगले phase आधारित होते हैं।

2:-Design phase:- design phase इस तथ्य पर आधारित होता है कि सॉफ्टवेयर का निर्माण किस प्रकार होगा। डिज़ाइन फेज का मुख्य उद्देश्य सॉफ्टवेयर सिस्टम का blueprint तैयार करना है जिससे कि आने वाले phases पर किसी प्रकार की कोई दिक्कत का सामना ना करना पड़े और requirement phase में जो भी requirements है उनका solution निकाल लिया जाएँ।

3:-Implementation phase:- इस फेज में हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर तथा एप्लीकेशन प्रोग्राम्स को install किया जाता है तथा डेटाबेस डिज़ाइन को implement किया जाता है। इससे पहले की डेटाबेस डिज़ाइन को implement किया जाएं सॉफ्टवेयर को टेस्टिंग,कोडिंग, तथा debugging प्रोसेस से होकर गुजरना पड़ता है। वॉटरफॉल में यह सबसे लम्बे समय तक चलने वाला phase है।

4:-verification phase:- इस फेज में सॉफ्टवेयर को verify किया जाता है और यह evaluate किया जाता है कि हमने सही product बनाया है। इस फेज में विभिन्न प्रकार की टेस्टिंग की जाती है तथा सॉफ्टवेयर के हर area में check किया जाता है।

माना अगर हमने सॉफ्टवेयर को अच्छी तरह verify नही किया और इसमें कोई defect रह जाता है तो इसका इस्तेमाल कोई नही करेगा इसलिए verification अत्यंत महत्वपूर्ण है।

verification का एक advantage यह है कि इससे सॉफ्टवेयर के fail होने का risk कम हो जाती है।

5:-Maintenance phase:- यह वॉटरफॉल का सबसे अंतिम phase है। जब सिस्टम बनके तैयार हो जाता है तथा यूजर उसका प्रयोग करना शुरू कर देते है तब जो problems उसमें आती है उनको time-to-time हल करना पड़ता है। तैयार सॉफ्टवेयर को समय अनुसार उसका ख्याल रखना तथा उसे maintain रखना ही maintenance कहलाता है। SDLC में तीन प्रकार के maintenance होते है:-
1. corrective maintenance
2. adaptive maintenance
3. perfective maintenance.

इसे भी पढ़ें:- Software Developer और Software Engineer में क्या अंतर है?

some software engineering mcq

software engineering क्या है?

Software engineering का अर्थ एक ऐसी engineering से है जिसमें computer system तथा किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक device के लिए software का निर्माण किया जाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो “Software engineering एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें user की जरूरतों को analyze किया जाता है और इन जरूरतों के आधार पर software को बनाया जाता है।

software engineering define -

1 Definitions of software engineering 2 The serial and linear Development Model 3 Iterative Development model 4 The incremental development model 5 The parallel or concurrent development model 6 Hacking 7 Software Reliability

software engineering salary

एक software engineer की शुरुआती salary कम से कम 20-40 हजार रुपए प्रति महीना होती है, Delhi और Bangalore में एक सॉफ्टवेयर इंजीनीयर को 45 से 50 हजार रुपए प्रति महीना मिलते हैं। उसके बाद एक एक्सपर्ट सॉफ्टवेयर इंजीनियर को 70-80 लाख रुपए प्रतिवर्ष सैलरी मिलती है। अगर आप किसी multinational कंपनी जैसे Google में कम कर रहे हैं तो आप की सैलरी 1 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष तक भी हो सकती है।

What is software engineering waterfall model?

सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के लिए waterfall model (वॉटरफॉल मॉडल) SDLC(सिस्टम डेवलपमेंट लाइफ साइकिल) का एक प्रसिद्ध और अच्छा version है। waterfall model (वॉटरफॉल मॉडल) linear तथा sequential मॉडल है इसका अर्थ यह है कि एक डेवलपमेंट phase तब तक शुरू नही हो सकता जब तक कि उसका पिछला वाला phase पूरा नही हो जाता है। हम वॉटरफॉल मॉडल में phases को overlap नही कर सकते है।

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