बारात का अयोध्या लौटना और अयोध्या में आनंद

बारात का अयोध्या लौटना और अयोध्या में आनंद * चली बरात निसान बजाई। मुदित छोट बड़ सब समुदाई॥ रामहि निरखि ग्राम नर नारी। पाइ नयन फलु होहिं सुखारी॥4॥ भावार्थ:-डंका बजाकर बारात चली। छोटे-बड़े सभी समुदाय प्रसन्न हैं। (रास्ते के) गाँव के स्त्री-पुरुष श्री रामचन्द्रजी को देखकर नेत्रों का फल पाकर सुखी होते हैं॥4॥ दोहा : … Read more

श्रीकृष्ण की पूजा श्रावण मास में क्यों होती है , जानिए 4 रोचक बातें

श्रीकृष्ण की पूजा श्रावण मास में क्यों होती है – हिन्दू कैलेंडर अनुसार श्रावण और भाद्रपद ‘वर्षा ऋतु’ के मास हैं। इस माह में वर्षा नया जीवन लेकर आती है। इस माह से ही चातुर्मास लगता है। खासकर यह संपूर्ण माह भगवान शिव का माह माना जाता है लेकिन इस मास का संबंध श्रीकृष्ण से … Read more

why mahashivratri celebrate Hindi : क्यों मनाते हैं महाशिवरात्रि और क्या है इसका महत्व?

why mahashivratri celebrate- महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव के लिए रखा जाता है। यूं तो हर महीने में शिवरात्रि आती है, लेकिन फाल्गुन मास में आने वाली महाशिवरात्रि का खास महत्व होता है। इस मौके पर श्रद्धालु शिव मंदिरों में रुद्राभिषेक करते हैं। बहुत से लोग शिवरात्रि का व्रत करते हैं और रात्रि जागरण भी … Read more

श्री राम-लक्ष्मण को देखकर जनकजी की प्रेम मुग्धता

श्री राम-लक्ष्मण को देखकर जनकजी की प्रेम मुग्धता दोहा : * प्रेम मगन मनु जानि नृपु करि बिबेकु धरि धीर। बोलेउ मुनि पद नाइ सिरु गदगद गिरा गभीर॥215॥ भावार्थ:-मन को प्रेम में मग्न जान राजा जनक ने विवेक का आश्रय लेकर धीरज धारण किया और मुनि के चरणों में सिर नवाकर गद्‍गद्‍ (प्रेमभरी) गंभीर वाणी … Read more

Tulsi Plant Vastu: तुलसी का पौधा कब और कैसे लगाए ?

Tulsi Plant Vastu: तुलसी पौधा औषधीय गुणों से भरपूर होने के साथ ही लोगों की आस्था का भी प्रतीक है। हिंदू धर्म के लोग तुलसी की पूजा करते हैं इसलिए लगभग हर घर में ये पौधा देखने को मिल ही जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस पौधे को लगाने की सही दशा क्या … Read more

राम का दंडकवन प्रवेश, जटायु मिलन, पंचवटी निवास और श्री राम-लक्ष्मण संवाद

राम का दंडकवन प्रवेश, जटायु मिलन, पंचवटी निवास और श्री राम-लक्ष्मण संवाद * है प्रभु परम मनोहर ठाऊँ। पावन पंचबटी तेहि नाऊँ॥ दंडक बन पुनीत प्रभु करहू। उग्र साप मुनिबर कर हरहू॥8॥ भावार्थ : हे प्रभो! एक परम मनोहर और पवित्र स्थान है, उसका नाम पंचवटी है। हे प्रभो! आप दण्डक वन को (जहाँ पंचवटी है) … Read more