महाभारत की सम्पूर्ण कथा! Complete Mahabharata Story In Hindi

महाभारत

 Complete Mahabharata Story In Hindi | सम्पूर्ण महाभारत की कथा! “महाभारत” भारत का अनुपम, धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक और दार्शनिक ग्रंथ है | यह हिन्दू धर्म के मुख्यतम ग्रंथों में से एक है | यह विश्व का सबसे लंबा साहित्यिक ग्रंथ है, हालाँकि इसे साहित्य की सबसे अनुपम कृतियों में से एक माना जाता है, किन्तु … Read more

पाण्डवों का हिमालय गमन ~ महाभारत Pandavas Himalayan

पाण्डवों का हिमालय गमन

पाण्डवों का हिमालय गमन ~ महाभारत धर्मराज युधिष्ठिर के शासनकाल में हस्तिनापुर की प्रजा सुखी तथा समृद्ध थी। कहीं भी किसी प्रकार का शोक व भय आदि नहीं था। कुछ समय बाद श्रीकृष्ण से मिलने के लिये अर्जुन द्वारिकापुरी गये। जब उन्हें गए कई महीने व्यतीत हो गये, तब धर्मराज युधिष्ठिर को विशेष चिन्ता हुई। … Read more

परीक्षित के जन्म की कथा ~ महाभारत Story of Parikshit’s birth

परीक्षित

परीक्षित के जन्म की कथा ~ महाभारत द्रौपदी को जब समाचार मिला कि उसके पाँचों पुत्रों की हत्या अश्वत्थामा ने कर दी है, तब उसने आमरण अनशन कर लिया और कहा कि वह अनशन तभी तोड़ेगी, जब अश्वत्थामा के मस्तक पर सदैव बनी रहने वाली मणि उसे प्राप्त होगी। अर्जुन अश्वत्थामा को पकड़ने के लिए … Read more

भीम और दुर्योधन का संग्राम तथा दुर्योधन के वध की कथा ~ महाभारत

भीम और दुर्योधन

भीम और दुर्योधन का संग्राम तथा दुर्योधन के वध की कथा ~ महाभारत महाभारत का युद्ध अपने अंत की ओर बढ़ रहा था। कौरवों की ओर से अश्वत्थामा, कृतवर्मा, कृपाचार्य तथा दुर्योधन के अतिरिक्त कोई भी अन्य महारथी जीवित नहीं बचा। अब दुर्योधन को युद्ध से पूर्व दिये गए विदुर के उपदेश याद आने लगे। … Read more

कर्ण और अर्जुन का संग्राम कर्ण वध ~ महाभारत

कर्ण और अर्जुन

कर्ण और अर्जुन का संग्राम और कर्ण वध ~ महाभारत द्रोणाचार्य की मृत्यु के बाद दुर्योधन पुन: शोक से आतुर हो उठा। अब द्रोणाचार्य के बाद कर्ण उसकी सेना का कर्णधार हुआ। पाण्डव सेना का आधिपत्य अर्जुन को मिला। कर्ण और अर्जुन में भाँति-भाँति के अस्त्र-शस्त्रों की मार-काट से युक्त महाभयानक युद्ध हुआ, जो देवासुर-संग्राम … Read more

जयद्रथ, घटोत्कच तथा गुरु द्रोण के वध की कथा ~ महाभारत

जयद्रथ, घटोत्कच तथा गुरु द्रोण के

जयद्रथ, घटोत्कच तथा गुरु द्रोण के वध की कथा ~ महाभारत अर्जुन की प्रतिज्ञा सुनकर जयद्रथ काँपने लगा। द्रोणाचार्य ने उसे आश्वासन दिया कि वे ऐसा व्यूह बनाएँगे कि अर्जुन जयद्रथ को न देख सकेगा। वे स्वयं अर्जुन से लड़ते रहेंगे तथा व्यूह के द्वार पर स्वयं रहेंगे। अगले दिन युद्ध शुरू हुआ। अर्जुन की … Read more