When Friendship Day Celebration : फ्रेंडशिप डे कब होता है 2023 | Friendship Day Kab Hota Hai 2023

When Friendship Day Celebration – फ्रेंडशिप डे की शुरुआत 1935 में अमेरिका से हुई थी। अगस्त के पहले रविवार को अमेरिकी सरकार ने एक व्यक्ति को मार दिया था और जिसकी याद और गम में एक दोस्त ने आत्महत्या कर ली। उसी दिन से सरकार ने अगस्त के पहले रविवार को फ्रेंडशिप डे के रूप में मनाने का निर्णय लिया। तब से इस दिन को हम दोस्तों के लिए मनाते आ रहे हैं।

When Friendship Day Celebration in India

हर साल अगस्त के महीने के पहले रविवार को भारत में इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है दोस्ती के खूबसूरत रिश्ते को सम्मान देने के लिए, इस दिन की शुरुआत हुई थी

हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण और सुदाम की मित्रता की मिसाल दी जाती है. दोनों के बीच मित्रता के साथ स्नेह का अटूट बंधन था. इसी प्रकार एक आम इंसान के जीवन में दोस्त एक बेहद ही खास स्थान रखता है. आधुनिक युग में दोस्त ही ऐसा इंसान है, जो सुख-दुख में काम आता है. दूसरी नजर से देखा जाए तो सगे भाई के बाद किसी को महत्वता दी जाती है तो वह हैं दोस्त. जिसे हम अपने सभी प्रकार के सुख-दुख और जीवन में आने वाली परेशानियों को निसंकोच साझा कर सकते हैं. इन्हीं खास लोगों के लिए साल में एक बार एक दिन ऐसा आता है, जिसे सभी दोस्त मिलकर साथ में मनाते है, जिसे हम फ्रेंडशिप डे के नाम से जानते है. यह दिन सभी दोस्तों के लिए एक अहम दिन होता है, जिसमे दोस्ती को एक नई परिभाषा और पहचान मिलती है. भारत के साथ ही दुनिया के अन्य देशों में अलग अलग दिन फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है. चलिए अब पोस्ट के जरिए जानते है की भारत में फ्रेंडशिप डे कब होता है 2023 – India Mein Friendship Day Kab Hota Hai 2023

When Friendship Day Celebration

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Friendship Day Best Quotes

  • सच्ची दोस्ती से ज्यादा कीमती चीज इस दुनिया में कुछ भी नहीं है।
  • दोस्ती में दोस्त, दोस्त का खुदा होता है, महसूस तब होता है जब वो जुदा होता है।
  • दोस्ती कभी खास लोगों से नहीं होती, जिनसे हो जाती है वो ही लोग खास बन जाते हैं।
  • दोस्ती: एक प्यार सा दिल जो कभी नफरत नहीं करता, एक प्यारी सी मुस्कान जो कभी फीकी नहीं पड़ती, एक एहसास जो कभी दुख नहीं देता, और एक रिश्ता जो कभी खत्म नहीं होता।
  • दोस्ती शीशे की तरह नाजुक होती है, एक बार टूटने पर जोड़ी जा सकती है लेकिन दरारें हमेशा मौजूद रहती है।
  • चाँद की दोस्ती रात से सुबह तक, सूरज की दोस्ती सुबह से शाम तक, पर हमारी दोस्ती पहली मुलाकात से आखरी सांस तक।
  • प्रेमी और दोस्त में क्या फर्क है? प्रेमी कहता है, तुम्हें कुछ हुआ तो मैं जिंदा नहीं रहूँगा, और दोस्त कहता है, जब तक मैं जिंदा हूँ, तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगा। दूरियाँ लाख हो, कोई फरमाइश नहीं होती, दोस्ती मे दूरियों की गुंजाइश नहीं होती।
  • जिंदगी हमें बहुत खूबसूरत दोस्त देती है लेकिन अच्छे दोस्त हमें खूबसूरत जिंदगी देते हैं।
  • सच्चे दोस्त हमें कभी गिरने नहीं देते, ना किसी के कदमों में, ना किसी की नजरों में।
  • गलती पर साथ छोड़ने वाले तो बहुत मिलते हैं लेकिन गलती होने पर समझाकर साथ निभाने वाले बहुत काम होते हैं।
  • मैं कहूँ और आप सुनो वो अच्छी दोस्ती, आप कहो ओर मैं सुनूँ वो उससे भी अच्छी दोस्ती, पर मैं कुछ भी ना कहूँ और आप समझ जाओ तो वो है सच्ची दोस्ती।
  • दोस्त बनाने का सबसे अच्छा तरीका है, खुद किसी के दोस्त बन जाओ।

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Heart Touching Story for friendship

रमेश और सुरेश बचपन से साथ में ही बड़े हुए। इन्होंने अपने सभी काम साथ में रहकर किये। साथ में ही स्कूल गये, एक क्लास में पढ़े, एक साथ ही कॉलेज जाते। इतना करते हुए उनकी पढाई पूरी हो गई और उनकी नौकरी करने का समय आ गया।

फिर दोनों ने आर्मी में जाने का निर्णय लिया और आर्मी के लिए आवेदन किया। दोनों का आर्मी में नम्बर लग गया और उनको ज्वाइन करने के लिए कहा गया। उन्होंने ज्वाइन किया तब भी उनको एक ही ग्रुप मिला और दोनों ने आर्मी की नौकरी करना शुरू हो गये।

When Friendship Day Celebration अच्छा मित्र कौन ? जानिए विस्तार से ।

एक बार वहां पर युद्ध का माहौल बन गया और युद्ध होना शुरू हो गया। रात का समय था चारों दिशाओं से गोलियों की बारिश हो रही थी। इस युद्ध में रमेश और सुरेश भी शामिल थे।

तभी काली रात में एक तरफ से जोर-जोर से आवाज आने लगी। रमेश कहां हो, मेरी मदद करो, मैं मुश्किल में हूं, मुझे मदद की जरूरत है? रमेश ने तुरंत ही सुरेश की आवाज को पहचान लिया और उसने रमेश की मदद करने की सोची। उसने अपने कैप्टन से सुरेश की मदद करने जाने के लिए इजाजत मांगी।

कैप्टन ने तुरंत मना कर दिया कि तुम वहां नहीं जाओगे। हमारी सेना के पहले ही काफी सैनिक मारे जा चुके हैं और मैं और सैनिकों को कम होने नहीं दूंगा। इतना सुनने के बाद रमेश शांत बैठ गया। फिर वहीं सुरेश की आवाजे सुनाई देती और रमेश अपने कैप्टन से इजाजत मांगता और इजाजत नहीं दी जाती।
फिर अंत में रमेश ने कैप्टन से कहा कि सुरेश मेरा बचपन का दोस्त है और हम दोनों साथ में खेले है और साथ में ही बड़े हुए है। आज उसको मेरी जरूरत है और मैं यहां पर शांति से बैठा हूं। मुझे जाने दो। मुझे उसके पास जाना है और उसे बचाना है।
कैप्टन ने इतना सुनने के बाद रमेश को सुरेश के पास जाने की इजाजत दे दी। फिर रमेश उन गोलियों की बारिश में अपनी जान की चिंता किये बिना ही सुरेश के पास पहुंच गया और फिर वहां से सुरेश को घसीट कर सुरक्षित स्थान पर ले आया। वहां पर सभी सैनिक और कैप्टन मौजूद थे। जब वहां पर रमेश सुरेश को लेकर पहुंचा तो सुरेश की जान निकल चुकी थी।
फिर कैप्टन ने रमेश को जोर से चिल्लाते हुए कहा मैंने मना किया था ना कि वो मर चुका है। वहां पर जाकर अपनी जान जोखिम में मत डालो। तभी रमेश ने कहा जब मैं सुरेश के पास पहुँचा तो वो जिन्दा था और मेरा ही इंतजार कर रहा था। सुरेश ने मुझे ये भी कहा कि मुझे पूरा भरोसा और विश्वास था कि तुम जरूर मुझे बचाने आओगे और तुम आ गये।
इस Heart Touching Story को पढ़कर आपको ये तो महसूस हो ही गया होगा कि, रिश्ते कितनी मुश्किल से बनते है और एक बार बन जाए तो उसे किसी भी हालत में निभाना चाहिए, चाहे उसके लिए अपनी जान ही क्यों नहीं देनी पड़े।

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