War Against Fear | डर के साथ दो- दो हाथ | कैसे ?

War Against Fear – जीवन-पथ पर स्तुति और निंदा सदा साथ-साथ चलते है. अर्थात जिनकी स्तुति अथवा प्रशंसा होगी ,उसकी कुछ लोग निंदा भी करेंगे.लेकिन मायने यह बात नहीं रखती की लोग निंदा क्यों करते है ? क्योंकि कुछ लोग तो भगवान की स्तुति भी सहन या स्वीकार नहीं करते.इसलिए हर प्रकार के डर के साथ दो- दो हाथ  करो . अर्थात  War Against Fear. किसी ने कहा है ,जो जिन्दा है उसकी निंदा भी संभव है.अक्सर लोग शमसान में कहा करते है की यह आदमी अच्छा था. अक्सर यह देखा जाना चाहिए की उचित क्या है ?और अनुचित क्या है ? यह नहीं देखना चाहिए ,कि प्रशंसा होगी अथवा निंदा होगी ..

वही यदि पुरुषार्थी अथवा कर्म में विश्वास करने वाले लोगो से अक्सर यही सुना जाता है ,कि हाँ यह व्यक्ति जरुर सफल होगा . शुरु में किसी भी business अथवा उचित कार्य में कठिनाइयां आती ही है .लोग अपने अपने दृष्टिकोण से आकलन करते है .

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क्योंकि यह भी सत्य ही है ,कि दोनों ही (प्रशंसा और निंदा) ही होगी .आप अच्छा या उचित कार्य कर रहे है ,जिसमे अच्छाई झलक रही है और लोगो का तथा स्वयं का भला हो रहा है ,तब भी नाकाम अथवा निकम्मे लोग बुराई ही करेंगे .वे लोग अच्छाई में भी बुराई खोज ही लेंगे.

क्योंकि नाकामो अथवा निकम्मों का काम ही बुराई खोजना और negativity फैलाना होता है . वो अपनी सारी उर्जा ही अकर्मण्यता ,hopeless अथवा वैचारिक जहर फ़ैलाने में खर्च करते है . और यही कारण होता है कि वे जीवन progress की दौड़ में पिछड़ जाते है . समयानुसार उतनी progress नहीं कर पाते . अतः यहाँ ध्यान देने वाली यह बात है कि ,निंदा करने वाले लोग कौन है ? अर्थात यही पर यह सिद्ध हो जाता है कि कार्य उचित है अथवा अनुचित .

.हाँ यदि आप कोई समाज सेवा का कार्य कर रहे हो और विद्वान अथवा भद्रजन आपको टोक रहे है ,तो जरुर उनसे ( विद्वानों से ) सलाह या उचित मार्गदर्शन लेकर कार्य अथवा स्वयं को आगे बढ़ाना चाहिए . केवल निंदा से डरकर पीछे नहीं हटना चाहिए . बल्कि War Against Fear.की स्थति में होना चाहिए . विदित रहे ,जो पिता अपने जीवन भर की कमाई से अपनी बेटी की शादी में जो खाना बनवाता है ,लोग ( निकम्मे लोग ) तो उसमे भी नमक -मिर्च अथवा मशाले की कमी निकाल देते है .अतः निंदा से नहीं डरना चाहिए .हाँ निंदनीय अनुचित कार्य करने से जरुर बचना चाहिए .किसी का अहित करने से डरना चाहिए .अधिकांश मामलो में या कभी -कभी जीवन-पथ पर progress का मार्ग भी आलोचनाओ से होकर गुजरता है .सोचनीय विचार यह है ,निंदा से डरकर असफल रहना है अथवा डर को भगाकर सफलता achieve करना है .बशर्ते नीति और  नीयति उचित अथवा साफ -स्वच्छ हो .

सफलता (success) की राह

विचारणीय बिंदु –इन्सान गरीबी में रहता है ,तब भी तकलीफ में रहता है . और जब इन्सान अमीर अथवा progress करने का प्रयास करे तब भी तकलीफ आती है .अतः प्रयास से कुछ समय तकलीफ का सामना करना होता है .और गरीबी में जीवनपर्यंत .इसलिए निंदा से डरे बगैर अमीर अथवा सफल बनने का प्रयास करना चाहिए .तथा साहस के साथ संघर्ष का सामना करना चाहिए . विदित रहे,”आप जीवन-पथ पर उतने ही बड़े champion हो जितनी बड़ी समस्या को solve करते हो” .

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War Against Fear – Praise and condemnation always go on the life path together. That is, some people who will be praised or praised will also condemn it. But it does not matter why people condemn it? Because some people do not even tolerate or accept the praise of God. So give two hands with every kind of fear. That is, War Against Fear. Somebody has said, it is also possible to condemn the person who is alive. Often people say in Samson that this man was good. It is often to be seen what is fair and what is unfair? It should not be seen that there will be praise or condemnation ..

The same is often heard from Purusharthi or people who believe in karma, that yes this person will definitely succeed. Initially there are difficulties in any business or proper work. People assess from their own perspective.

Because it is also true, that both will be (praise and condemnation). You are doing good or proper work, in which goodness is visible and good is being done to the people and to themselves, even then people fail or fail. They will do. They will find evil even in good.

Because the job of failures or negatives is to find evil and spread negativity. They spend all their energy in spreading inactivity, hopeless or ideological poison. And this is the reason why they fall behind in the race for life progress. Can not make much progress on time. So the thing to note here is, who are the condemned people? That is, it is proved that the work is fair or improper.

Yes, if you are doing some social work and a scholar or a gentleman is trying to stop you, then you should definitely take advice or appropriate guidance from them (scholars) and pursue the work yourself. One should not retreat only by being afraid of condemnation. Rather it should be in the position of War Against Fear. Be aware, the father who makes food in his daughter’s wedding with his lifetime earnings, people (worthless people) also remove the lack of salt-munch or spice. So, do not be afraid of condemnation. Must be avoided from working To achieve success by stepping away, provided the policy and policy is fair or clean.

Points to consider – Insan lives in poverty, still remains in trouble. And when human beings try to make rich or progress, then there is also trouble. So effort has to suffer for some time. And after life in poverty. Therefore one should try to become rich or successful without being afraid of condemnation. And courage Must face struggle with. Be aware, “You are as big a champion on the life path as you solve a big problem”.

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