महर्षि वेदव्यास अथवा श्री कृष्ण द्वैपायन व्यास जी की जन्म कथा, जानिए| 

महर्षि वेदव्यास अथवा श्री कृष्ण द्वैपायन व्यास

महर्षि वेदव्यास- प्राचीन काल में सुधन्वा नाम के एक राजा थे| वे एक दिन आखेट के लिये वन गये| उनके जाने के बाद ही उनकी पत्नी रजस्वला हो गई| उसने इस समाचार को अपने शिकारी पक्षी के माध्यम से राजा के पास भिजवाया| समाचार पाकर महाराज सुधन्वा ने अपना वीर्ययुक्त दोना पक्षी को दे दिया| पक्षी उस दोने को राजा की पत्नी के पास पहुँचाने आकाश में उड़ चला| लेकिन मार्ग में उस शिकारी पक्षी पर दूसरे शिकारी पक्षी ने हमला कर दिया| दोनों पक्षियों में युद्ध होने लगा| युद्ध के दौरान वह दोना पक्षी के पंजे से छूट कर यमुना में जा गिरा|

 श्री कृष्ण द्वैपायन व्यास जी की माता का जन्म-

यमुना में ब्रह्मा के शाप से मछली बनी एक अप्सरा रहती थी| मछली रूपी अप्सरा  वह वीर्ययुक्त दोना को निगल गई तथा उसके प्रभाव से वह गर्भवती हो गई|एक निषाद ने गर्भ पूर्ण होने पर उस मछली को अपने जाल में फँसा लिया| निषाद ने जब मछली का पेट चीरा तो उसके पेट से एक बालक तथा एक बालिका निकली|

वह निषाद उन शिशुओं को लेकर महाराज सुधन्वा के पास गया| महाराज सुधन्वा के पुत्र न होने के कारण उन्होंने बालक को अपने पास रख लिया| जिसका नाम ‘मत्स्यराज’ हुआ बालिका निषाद के पास ही रह गई और उसके अंगों से मछली की गंध निकलती थी| इसलिए उसका नाम ‘मत्स्यगंधा’ रखा गया|

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उस कन्या को ‘सत्यवती’ के नाम से भी जाना जाता था| बड़ी होने पर वह बालिका (मत्स्यगंधा) नाव खेने का कार्य करने लगी| एक बार पाराशर मुनि को उसकी नाव पर बैठ कर यमुना पार करनी पड़ी| पाराशर मुनि सत्यवती के रूप-सौन्दर्य पर आसक्त हो गये| और बोले- “देवि! हम तुम्हारे साथ सहवास के इच्छुक हैं|” सत्यवती ने कहा- “मुनिवर! आप ब्रह्मज्ञानी हैं और मैं निषाद कन्या| हमारा सहवास सम्भव नहीं है|”

महर्षि वेदव्यास अथवा श्री कृष्ण द्वैपायन व्यास जी का जन्म

तब पाराशर मुनि बोले- “तुम चिन्ता मत करो| प्रसूति होने पर भी तुम कुमारी ही रहोगी|” इतना कह कर उन्होंने अपने योगबल से चारों ओर घने कुहरे का जाल रच दिया| और सत्यवती के साथ भोग किया| तत्पश्चात् उसे आशीर्वाद देते हुए कहा- “तुम्हारे शरीर से जो मछली की गंध निकलती है, वह सुगन्ध में परिवर्तित हो जायेगी|”

समय आने पर सत्यवती के गर्भ से वेद-वेदांगों में पारंगत एक पुत्र हुआ| जिसे कृष्ण द्वैपायन व्यास अथवा वेदव्यास के नाम से जाना गया | चूकि जन्म होते ही वह बालक बड़ा हो गया और अपनी माता से बोला- “माता! तू जब कभी भी विपत्ति में मुझे स्मरण करेगी, मैं उपस्थित हो जाउँगा।”

इतना कह कर वे तपस्या करने के लिये द्वैपायन द्वीप चले गये| द्वैपायन द्वीप में तपस्या करने तथा उनके शरीर का रंग काला होने के कारण उन्हे “कृष्ण द्वैपायन” कहा जाने लगा| आगे चल कर वेदों का भाष्य करने के कारण वे वेदव्यास के नाम से विख्यात हुए|


Maharishi Ved Vyasa or Shri Krishna Dvaipayan Vyas

Maharishi Ved Vyas – In ancient times there was a king name Sadhana. He went to the forest for hunting one day. It was only after he left that his wife became menstruating. He sent this news to the king through his bird of prey. After receiving the news, Maharaj Sudhanwa gave his semen containing two seeds. The bird flew into the sky to bring the two to the king’s wife. But on the way, that predatory bird was attacked by another predatory bird. There was a war between the two birds. During the war, he got rid of both bird’s claws and fell into the Yamuna.

Birth of Maharishi Ved Vyas or mother of Shri Krishna Dwapayan Vyas Ji.

In the Yamuna, a nymph made of fish lived by the curse of Brahma. A nymph-like fish swallowed the semen containing the semen and due to its effect, she became pregnant. A Nishad trapped the fish in her net when the pregnancy was complete. When Nishad made an incision in the belly of the fish, a boy and a girl came out of his stomach. That Nishad took those babies to Maharaj Sudhanwa. Due to not being the son of Maharaj Sudhanwa, he kept the child with him. The girl, whose name was ‘Matsyaraj’, remained with Nishad and the smell of fish emitted from her organs. Hence it was name ‘Matsyagandha’.

The girl was also known as ‘Satyavati’. When she grew up, she started working as a boat (matsyagandha) boat. Once, Parashar Muni had to sit on his boat and cross the Yamuna. Parashar Muni became enamored by the beauty of Satyavati. And said – “Devi! We are willing to cohabit with you.” Satyavati said- “Munivar! You are a cosmologist and I am a Nishad girl. Our cohabitation is not possible.”

Birth of Maharishi Ved Vyas or Shri Krishna Dvaipayan Vyas Ji

Then Parashar Muni said- “Don’t worry. You will remain a virgin even after having maternity.” Having said this, he created a thick mist network around his yoga force. And enjoyed with Satyavati. After that, while blessing him, he said, “The smell of fish coming out of your body will be transformed into fragrance.”

In due course of time, there was a son in the Vedas and Vedangs from the womb of Satyavati. Which was known as Krishna Dvaipayana Vyasa or Ved Vyasa? Since birth, that child grew up and said to his mother – “Mother! Whenever you will remember me in adversity, I will be present.” Having said this, he went to the island of Dwaipayan to do penance. Due to doing penance in Dwaipayan island and his body color being black, he came to be called “Krishna Dwaipayan”. Later on, he became famous by the name of Ved Vyas due to commenting on the Vedas.

 

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