द्रौपदी हरण ~ महाभारत ( Draupadi Haran ~ Mahabharata )

द्रौपदी हरण ~ महाभारत

जयद्रथ का काम्यवन आना
एक दिन दुर्योधन की बहन का पति जयद्रथ जो विवाह की इच्छा से शाल्व देश जा रहा था, अचानक आश्रम के द्वार पर खड़ी द्रौपदी पर उसकी द‍ृष्टि पड़ी और वह उस पर मुग्ध हो उठा। उसने अपनी सेना को वहीं रोक कर अपने मित्र कोटिकास्य से कहा, ‘कोटिक! तनिक जाकर पता लगाओ कि यह सर्वांग सुन्दरी कौन है? यदि यह स्त्री मुझे मिल जाय तो फिर मुझे विवाह के लिये शाल्व देश जाने की क्या आवश्यकता है? ‘मित्र की बात सुनकर कोटिकास्य द्रौपदी के पास पहुँचा और बोला, ‘हे कल्याणी! आप कौन हैं? कहीं आप कोई अप्सरा या देवकन्या तो नहीं हैं? ‘द्रौपदी ने उत्तर दिया, ‘मैं जग विख्यात पाँचों पाण्डवों की पत्‍नी द्रौपदी हूँ। मेरे पति अभी आने ही वाले हैं अतः आप लोग उनका आतिथ्य सेवा स्वीकार करके यहाँ से प्रस्थान करें। आप लोगों से प्रार्थना है कि उनके आने तक आप लोग कुटी के बाहर विश्राम करें।
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द्रौपदी का अपहरण

मैं आप लोगों के भोजन का प्रबन्ध करती हूँ।’कोटिकास्य ने जयद्रथ के पास जाकर द्रौपदी का परिचय दिया। परिचय जानने पर जयद्रथ ने द्रौपदी के पास जाकर कहा, ‘हे द्रौपदी! तुम उन लोगों की पत्‍नी हो जो वन में मारे-मारे फिरते हैं और तुम्हें किसी भी प्रकार का सुख-वैभव प्रदान नहीं कर पाते। तुम पाण्डवों को त्याग कर मुझसे विवाह कर लो और सम्पूर्ण सिन्धु देश का राज्यसुख भोगो। ‘जयद्रथ के वचनों को सुन कर द्रौपदी ने उसे बहुत धिक्कारा किन्तु कामान्ध जयद्रध पर उसके धिक्कार का कोई प्रभाव नहीं पड़ा और उसने द्रौपदी को शक्‍तिपूर्वक खींचकर अपने रथ में बैठा लिया। गुरु धौम्य द्रौपदी की रक्षा के लिये आये तो उसे जयद्रथ ने उसे वहीं भूमि पर पटक दिया और अपना रथ वहाँ से भगाने लगा।

पांडवों द्वारा जयद्रथ का पीछा ( द्रौपदी हरण )

थोड़ी देर में पांडव आश्रम में लौटे। द्रौपदी के अपहरण का समाचार पाते ही भीम गदा लेकर जयद्रथ के पीछे भागे। युधिष्ठिर ने भीम को बताया कि वह बहन दुःशला का पति है, अतः उसे जान से मत मारना। उसी समय अर्जुन भी उसके पीछे भागे। जयद्रथ द्रौपदी को छोड़कर भाग गया। भीम ने जयद्रथ का पीछा किया तथा उसे पृथ्वी पर पटक दिया। उसे बाँधकर द्रौपदी के सामने लाए। द्रौपदी ने दया करके उसे छुड़वा दिया।
जयद्रथ को वरदान ( द्रौपदी हरण )
इस अपमान से दुखी होकर जयद्रथ ने शंकर की तपस्या की तथा अर्जुन को छोड़कर किसी अन्य पांडव से न हारने का वरदान पा लिया।
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After Arjuna’s return to Indraprastha after learning of Divyastra, the five Pandavas were staying with Draupadi in Kamyavan as their ashram, only once the five Pandavas had gone out for some work. In the ashram, only Draupadi, one of her maidservants and the priest were dhomya.

Coming to life of Jayadratha
One day, Jayadratha, the husband of Duryodhana’s sister, who was going to Shalva Desh for want of marriage, suddenly saw Draupadi standing at the door of the ashram and was enchanted by her. He stopped his army there and told his friend Kotikasya, ‘Kotik! Go and find out who is this beautiful girl? If I get this woman, then why do I need to go to Shalwa country for marriage? On hearing his friend, Kotikasya reached Draupadi and said, ‘O Kalyani! Who are you? Are you a nymph or Devakanya? ‘Draupadi replied,’ I am Draupadi, the wife of the five Pandavas known to the world. My husband is just about to arrive, so you people will accept his hospitality service and leave from here. You are requested to rest outside the hut till their arrival.

Read the complete story of Mahabharata:

Draupadi’s kidnapping
I manage your food. ‘Kotikasya went to Jayadratha and introduced Draupadi. On knowing the introduction, Jayadratha went to Draupadi and said, ‘O Draupadi! You are the wife of those people who move around in the forest and cannot provide you any kind of pleasure. You abandon the Pandavas and marry me and enjoy the kingdom of the entire Indus country. Hearing Jayadratha’s words, Draupadi cursed him very much, but Kamandha Jayadradh had no effect on her curse and dragged Draupadi powerfully and seated her in the chariot. When Guru Dhaumya came to protect Draupadi, Jayadratha slammed him on the ground there and started driving his chariot from there.

Pandavas chase Jayadratha
After a while, the Pandavas returned to the ashram. On receiving the news of Draupadi’s abduction, Bhima ran after Jayadratha with mace. Yudhishthira tells Bhima that he is the husband of sister Dushala, so do not kill her. At the same time, Arjun also ran after him. Jayadratha left Draupadi and fled. Bhima chases Jayadratha and slams him on the earth. Tied him and brought him in front of Draupadi. Draupadi mercifully rescued him.

Boon to jayadratha
Saddened by this insult, Jayadratha meditated on Shankar and got the boon of not losing to any other Pandava except Arjuna.

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