शल्य पर्व ~ महाभारत । Shalya Parv ~ Mahabharat Stories In Hindi 2023

शल्य पर्व ~ महाभारत । Shalya Parv ~ Mahabharat Stories In Hindi

शल्य पर्व में कर्ण की मृत्यु के पश्चात कृपाचार्य द्वारा सन्धि के लिए दुर्योधन को समझाना, सेनापति पद पर शल्य का अभिषेक, मद्रराज शल्य का अदभुत पराक्रम, युधिष्ठिर द्वारा शल्य और उनके भाई का वध, सहदेव द्वारा शकुनि का वध, बची हुई सेना के साथ दुर्योधन का पलायन, दुर्योधन का ह्रद में प्रवेश, व्याधों द्वारा जानकारी मिलने पर युधिष्ठिर का ह्रद पर जाना, युधिष्ठिर का दुर्योधन से संवाद, श्रीकृष्ण और बलराम का भी वहाँ पहुँचना, दुर्योधन के साथ भीम का वाग्युद्ध और गदा युद्ध और दुर्योधन का धराशायी होना, क्रुद्ध बलराम को श्री कृष्ण द्वारा समझाया जाना, दुर्योधन का विलाप और सेनापति पद पर अश्वत्थामा का अभिषेक आदि वर्णित है।

शल्य का सेनापतित्व तथा अठारहवें दिन का युद्ध 

शल्य को सामने देखकर युधिष्ठिर ने अर्जुन से कहा कि तुम संसप्तकों से युद्ध करो। भीम कृपाचार्य से मोर्चा लेंगे तथा मैं शल्य से युद्ध करूँगा। शल्य और युधिष्ठिर भिड़ गए। चारों ओर से शल्य पर आक्रमण होने लगे। वे ढाल और तलवार लेकर रथ से कूदे तथा युधिष्ठिर को मारने दौड़े इसी समय युधिष्ठिर ने शल्य पर एक घातक शक्ति का प्रयोग किया तथा शल्य की मृत्यु हो गई।

कौरव-सेना भाग खड़ी हुई। इसी समय दुर्योधन पांडवों के सामने आ डटा। सहदेव शकुनि पर झपटे। शकुनि का पुत्र उलूक अपने पिता की रक्षा के लिए बढ़ा, पर सहदेव ने उसके प्राण ले लिये। सहदेव ने शकुनि पर भी एक तीर छोड़ा तथा शकुनि भी मारा गया।

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Category Badisoch
Written by Dr.PS,yadav
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महाभारत की सम्पूर्ण कथा पढ़ें :

शकुनि की मृत्यु के बाद दुर्योधन अकेले गदा लेकर रण-क्षेत्र से बाहर पैदल ही निकल गया। वह दूर सरोवर में जाकर छिप गया। उसे छिपते हुए कुछ लोगों ने देख लिया। कृष्ण ने कहा कि बिना दुर्योधन का वध किए पूरी विजय नहीं मिल सकती। उसी समय गाँव से आने वाले लोगों ने बताया कि उस सरोवर में एक मुकुटधारी व्यक्ति को छिपते हुए हमने देखा है। कृष्ण के कहने पर भीम ने दुर्योधन को अपशब्द कहकर ललकारा। दुर्योधन बाहर आ गया। उसी समय उसके गुरु बलराम उधर से आ निकले। कृष्ण ने दुर्योधन को युद्ध के लिए तैयार हो जाने को कहा। दुर्योधन ने कहा-मैं युद्ध के लिए तैयार हूँ, पर धर्म युद्ध होगा और मेरे गुरु बलराम निरीक्षक होंगे। भीम तथा दुर्योधन में गदा युद्ध छिड़ गया। कृष्ण ने अपनी जाँघ पर थपकी मारी जिससे भीम को दुर्योधन की जाँघ तोड़ने की अपनी प्रतिज्ञा याद आ गई। गदा युद्ध में कमर के नीचे प्रहार नहीं किया जाता। दुर्योधन की जाँघ की हड्डी टूट गई। गिरते ही भीम ने उसके सिर पर प्रहार किया। बलराम इस अन्याय युद्ध को देख क्रोधित होकर भीम को मारने दौड़े, पर कृष्ण ने उन्हें शांत कर दिया। पांडव वहाँ से चले गए तथा धृतराष्ट्र और गांधारी बिलख-बिलखकर रोने लगे।

अश्वत्थामा का सेनापतित्व

कौरवों के केवल तीन ही महारथी बचे थे-अश्वत्थामा, कृपाचार्य और कृतवर्मा। संध्या के समय जब उन्हें पता चला कि दुर्योधन घायल होकर पड़े हैं, तो वे तीनों वीर वहाँ पहुँचे। दुर्योधन उन्हें देखकर अपने अपमान से क्षुब्ध होकर विलाप कर रहा था। अश्वत्थामा ने प्रतिज्ञा की कि मैं चाहे जैसे भी हो, पांडवों का वध अवश्य करूँगा। दुर्योधन ने वहीं अश्वत्थामा को सेनापति बना दिया।
शल्य पर्व के अन्तर्गत 2 उपपर्व है और इस पर्व में 65 अध्याय हैं। ये 2 उपपर्व इस प्रकार है- ह्रदप्रवेश पर्व, गदा पर्व।
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Shalya Parva ~ Mahabharata । Shalya Parv ~ Mahabharat Stories In Hindi

After the death of Karna in Surgical festival, Kripacharya had to convince Duryodhana for the treaty, the consecration of Surgery on the post of Senapati, the amazing power of Madraja Surgery, the surgery of Yudhishthira and the slaughter of his brother, the slaughter of Shakuni by Sahadeva, with the remaining army Duryodhana’s exodus, Duryodhana’s entry into the heart, Yudhishthira’s visit to the heart on receiving information from hunters, Yudhishthira’s dialogue with Duryodhana, Sri Krishna and Balarama also reaching there, Bhima’s Vaguddha with Duryodhana and the mace of mace war and Duryodhana, The Krishna Balarama being explained by Shri Krishna, Duryodhana’s lament and Ashwatthama’s consecration at the post of commander are described.

The generalship of Surgery and the Eighteenth Day of War

Seeing the surgery in front, Yudhishthira told Arjuna that you fight with the saints. Bhima will take the front with Kripacharya and I will fight with surgery. Shalya and Yudhishthira clashed. Surgical attacks started from all around. They jumped with a chariot with a shield and sword and ran to kill Yudhishthira. At the same time, Yudhishthira used a deadly force on the surgery and the surgery died.

The Kaurava army fled. At this time, Duryodhana came in front of the Pandavas. Sahadev pounced on Shakuni. Shakuni’s son Uluq grew to protect his father, but Sahadeva took his life. Sahadeva also shot an arrow at Shakuni and Shakuni was also killed.

Read the complete story of Mahabharata:

After Shakuni’s death, Duryodhana walked out of the battlefield with mace alone. He hid away in the lake. Some people saw him hiding it. Krishna said that complete victory cannot be achieved without killing Duryodhana. At the same time, people coming from the village told that we have seen a crowned person hiding in that lake. At the behest of Krishna, Bhima challenged Duryodhana by abusing him. Duryodhana comes out. At the same time, his guru Balaram came from there. Krishna tells Duryodhana to get ready for war. Duryodhana said – I am ready for war, but there will be a war of religion and my guru Balarama will be the inspector. Mace war broke out in Bhima and Duryodhana. Krishna slapped his thigh which caused Bhima to remember his vow to break Duryodhana’s thigh. In mace, warfare is not attacked below the waist. Duryodhana’s thigh fractured. As soon as Bheem struck Bhima on his head. Balarama, angry at seeing this injustice war, ran to kill Bhima, but Krishna pacified him. The Pandavas left from there and Dhritarashtra and Gandhari wept bitterly.

Ashwatthama’s generalship

Only three of the Kauravas survived Maharathi – Ashwatthama, Kripacharya, and Kritavarma. At dusk, when he came to know that Duryodhana was injured, all the three heroes reached there. Duryodhana was angry at his insult upon seeing them and mourned. Ashwatthama vowed that I would kill the Pandavas, no matter what. Duryodhana made Ashwatthama the commander there.

There are 2 subfiles under the surgical festival and there are 65 chapters in this festival. These 2 subparts are as follows – Hridpravesh Parva, Gada Parva.

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